मंगलवार, 1 मार्च 2011

आंखों का फड़कना भी कर जाता है बड़ा 'संकेत'

मनुष्य का शरीर काफी संवेदनशील होता है। यही कारण है कि भविष्य में होने वाली घटना के प्रति हमारा शरीर पहले ही आशंका व्यक्त कर देता है। शरीर के विभिन्न अंगों का फड़कना भी भविष्य में होने वाली घटनाओं से हमें अवगत कराने का एक माध्यम है। किस अंग के फड़कने का क्या शुभ-अशुभ फल होता है, वह इस प्रकार है-
सिर के विभिन्न हिस्सों का फड़कना
सिर के अलग-अलग हिस्सों के फड़कने का भिन्न-भिन्न अर्थ होता है जैसे- मस्तक फड़कने से भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है। कनपटी फड़के तो इच्छाएं पूर्ण होती हंै। दाहिनी आंख व भौंह फड़के तो समस्त अभिलाषा पूर्ण होती है। बांई आंख व भौंह फड़के तो शुभ समाचार मिलता है।दोनों गाल यदि फड़के तो धन की प्राप्ति होती है। यदि होंठ फडफ़ड़ाएं तो किसी मित्र का आगमन होता है। मुंह का फड़कना पुत्र की ओर से शुभ समाचार का सूचक होता है। यदि लगातार दाहिनी पलक फडफ़ड़ाए तो शारीरिक कष्ट होता है।
हाथ के विभिन्न हिस्सों का फड़कना
दाहिनी ओर का कंधा फड़के तो धन-संपदा मिलती है। बांई ओर का फड़के तो सफलता मिलती है और यदि दोनों कंधे फड़कें तो झगड़े की संभावना रहती है। हथेली में यदि फडफ़ड़ाहत हो तो व्यक्ति किसी विपदा में फंस जाता है। हाथों की अंगुलियां फड़के तो मित्र से मिलना होता है। दाईं ओर की बाजू फड़के तो धन व यश लाभ तथा बाईं ओर की बाजू फड़के तो खोई वस्तु मिल जाती है। दाईं ओर की कोहनी फड़के तो झगड़ा होता है, बाईं ओर की कोहनी फड़के तो धन की प्राप्ति होती है।
शरीर के मध्य भागों का फड़कना
पीठ फड़के तो विपदा में फंसने की संभावना रहती है। दाहिनी ओर की बगल फड़के तो नेत्रों का रोग हो जाता है। पसलियां फड़के तो विपदा आती है। छाती में फडफ़ड़ाहट मित्र से मिलने का सूचक होती है। ह्रदय का ऊपरी भाग फड़के तो झगड़ा होने की संभावना होती है। नितंबों के फड़कने पर प्रसिद्धि व सुख मिलता है।
पैर के विभिन्न हिस्सों का फड़कना
दाहिनी ओर की जांघ फड़के तो अपमान होता है, बाईं ओर की फड़के तो धन लाभ होता है। गुप्तांग फड़के तो दूर की यात्रा पर जाना होता है। दाहिनें पैर का तलवा फड़के तो कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। बाईं ओर का फड़के तो निश्चित रूप से यात्रा पर जाना होता है।
(www.bhaskar.com)

1 टिप्पणी:

  1. panditji namaskar mera prem vivah hua hai kintu meri patni ko uske gharwale aane nhi de rhe hai. meri dai aankh me fadkan hoti hai. mera naam vivek hai meri jnmtithi 30.05.85 hai jnmstan betul (m.p.) hai, meri patni ka naam arpita urf rani hai uski jamtithi 10.03.87 hai jnmstan betul (m.p.) hai. panditji main bahut preshan ho gya hu, hm dono ek sath rahna chahte hai kya hamara milan hoga, maine ek stri vrat ka bi sankalp liya hai isliye main dusra vivah nhi krna chahta. kya main rani ke sath sansarik jivan bita sakunga, kripya margdharshan kre, apke margdharshan ke intjar me .........vivek

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