गुरुवार, 11 फ़रवरी 2010

हँसगुल्ले

एक चोर तेजी से दौड़ता हुआ गली के मोड़ पर खड़े सिपाही से टकरा गया। सिपाही ने उसे डाँटते हुए कहा- 'कौन हो तुम?'
पहले तो चोर घबराया, फिर भागते हुए बोला- 'चोर।'
सिपाही बोला- 'अजीब पागल है, पुलिस से मजाक करता है।'


आकाश (अपने दोस्त से) : 'अरे यार! मैं अमेरिका जाने की सोच रहा हूँ, कितने रुपए लगेंगे?'
सचिन : 'सोचने के कोई रुपए नहीं लगते।'

एक आदमी (पहलवान से)- 'तुम मेरे तीस दाँत तोड़ने की धमकी दे रहे हो। पूछ सकता हूँ बाकी के दो दाँतों पर इतना रहम क्यों?'
पहलवान- 'त्योहारों का मौसम है, इसलिए विशेष छूट दे रहा हूँ।'

एक आदमी (दुकानदार से)- 'जल्दी से एक पिंजरा दे दो। मुझे गाड़ी पकड़नी है।'
दुकानदार- 'मेरे पास इतना बड़ा पिंजरा नहीं है कि जिसमें गाड़ी पकड़ी जा सके।'


एक आदमी बस स्टैंड पर खड़ा बस का इंतजार कर रहा था। तभी, बस आई और थोड़ी देर रुककर चल दी। वह आदमी बस पर चढ़ नहीं पाया तो बस के पीछे-पीछे दौड़ने लगा, दौड़ते-दौड़ते वह अपने घर तक पहुँच गया और घर पहुँचकर पत्नी से बोला- 'देखो मैं कितना बुद्धिमान हूँ बस के पीछे दौड़कर घर पहुँचा और 2 रपए बचाए।'
पत्नी : 'अगर तुम टैक्सी के पीछे दौड़ते तो ज्यादा पैसे बचते।'

राजू (पिता से) : 'पिताजी! मैं क्लास में ब्लैकबोर्ड नहीं देख पाता।'
पिताजी उसे तुरंत आँखों के डॉक्टर के पास ले गए।
डॉक्टर : 'राजू! तुम्हें ब्लैकबोर्ड देखने में क्या परेशानी होती है?'
राजू : 'जी, मेरे सामने एक लंबा लड़का बैठता है।'

डॉक्टर : 'आपकी खाँसी कैसी है?'
मरीज : 'खाँसी तो चली गई, लेकिन आँखें आ गई है।'
डॉक्टर : 'घबराइए नहीं, वे भी चली जाएँगी।'

पिताजी : 'बेटी! तुम मेरी इस कानून की किताब को चिमटे से पकड़कर क्यों ला रही हो?'
बेटी : ' पिताजी! आप ही तो कहते हैं, कि हमें कानून को हाथों में नहीं लेना चाहिए।'

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