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गुरुवार, 7 जुलाई 2011

गेमः आलू रेस

क्या है खेल?
आंखों पर पट्टी बांधकर गिरे हुए आलुओं को उठाकर बाल्टी में डालना है।

आवश्यक सामग्री
दो किलो आलू, उठाने के लिए बड़ा चम्मच, एक खाली बाल्टी और आंखों पर बांधने के लिए रूमाल।

आओ खेलें
इस खेल को जितने ज्यादा खिलाड़ी खेलेंगे, उतना ज्यादा मज़ा आएगा। सबसे पहले जगह निर्धारित कर आलुओं को बिखेर दीजिए। अब खिलाड़ी की आंखों पर पट्टी बांधकर उन आलुओं को चम्मच से उठाकर बाल्टी में डालने को कहिए। ध्यान रहे एक ही हाथ का प्रयोग करना है। एक मिनट में जो खिलाड़ी अधिक आलू बाल्टी में डालेगा, वही होगा विजेता।
नोट- यदि खिलाड़ियों की संख्या अधिक है, तो आप अकेले-अकेले खेलने के बजाय टीम बनाकर भी खेल सकते हैं। टीम में खेलते समय पूरी टीम के खिलाड़ियों के कुल अंक पर विजेता टीम का निर्धारण करना होगा।

रविवार, 29 मई 2011

क्रिकेट की दुनिया के दबंग


आईपीएल-4 शुरू होने से पहले वीरेन्द्र सहवाग, युवराजसिंह और गौतम गंभीर सहित कई खिलाड़ियों ने दावा किया था कि वे महेन्द्रसिंह धोनी की कप्तानी को अच्छी तरह जानते हैं और टूर्नामेंट में उनकी हर चाल का जवाब देंगे।
लेकिन, धोनी ने आईपीएल में अपनी टीम चेन्नई सुपरकिंग्स को लगातार दूसरी बार चैंपियन बनाकर दिखा दिया है कि क्रिकेट की दुनिया का असली दबंग कौन है। वर्ष 2007 से शुरू हुआ धोनी की सफलता का सिलसिला बदस्तूर जारी है और हर दिन वे नई ऊंचाइयां हासिल कर रहे हैं।
आईपीएल के फाइनल में धोनी के समक्ष चक्रवाती फॉर्म में चल रहे रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के कैरेबियाई बल्लेबाज क्रिस गेल की चुनौती थी। फाइनल मुकाबले से पहले गेल की मौजूदगी में बेंगलुरु टीम ने 11 में से नौ में जीत हासिल की थी और धोनी अच्छी तरह जानते थे कि गेल चल गए तो उनके गेंदबाजों का तेल निकाल देंगे।
चेन्नई ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 205 रन का मजबूत स्कोर खड़ा किया, लेकिन धोनी के सामने असली चुनौती गेल को सस्ते में निपटाने की थी क्योंकि गेल चलते तो बेंगलुरु के लिए 206 रन का लक्ष्य छोटा पड़ सकता था। आखिर कर्मयुद्ध के इस अंतिम पड़ाव में धोनी ने धुरंधर गेल के लिए ऐसा चक्रब्यूह रचा कि वे इससे निकल नहीं पाए।
धोनी ने पहले ही ओवर में गेंद ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन को थमाई। अश्विन ने ओवर की चौथी गेंद में चतुराई से पेस में परिवर्तन किया और गेल चकमा खा गए। गेंद उनके बल्ले का किनारा लेकर विकेटकीपर धोनी के दस्तानों में समा गई। धोनी की रणनीति काम कर गई और चेन्नई का एक बार फिर चैंपियन बनना उसी समय तय हो गया।
धोनी के बारे में कहा जाता है कि वे मिट्टी को छू लेते हैं तो वह भी सोना बन जाती है। उन्होंने बार-बार इसे साबित भी किया है। उनकी कप्तानी में भारत ने वर्ष 2007 में सभी को चौंकाते हुए ट्‍वेंटी-20 विश्वकप का खिताब जीता था। उसके बाद तो धोनी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक के बाद एक कई सफलताएं अर्जित करते चले गए।
यह माही की कप्तानी का करिश्मा था कि भारत दिसंबर 2009 में पहली बार आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में शीर्ष पर पहुंचा और तबसे उसने अपना दबदबा बनाए रखा है। इतना ही नहीं कैप्टन कूल धोनी ने भारत को 28 वर्ष बाद वनडे विश्वकप का खिताब जिताकर अपनी कप्तानी का लोहा मनवाया है।
आईपीएल में धोनी की टीम चेन्नई सुपरकिंग्स तीन बार फाइनल में पहुंची है, जिसमें से दो बार उसने खिताब पर कब्जा किया है। धोनी पिछले वर्ष चैंपियंस लीग टवंटी-20 टूर्नामेंट में भी अपनी टीम को चैंपियन बनाने में सफल रहे। इस तरह धोनी ने साबित कर दिया कि खेल के तीनों प्रारूपों में कोई उनका सानी नहीं है।
आईपीएल का चौथा संस्करण शुरू होने से पहले टीम इंडिया में धोनी के साथी खिलाडी सहवाग, युवराज और गंभीर ने दावा किया था कि वे माही की कप्तानी से वाकिफ हैं और उनकी चालों का मुंहतोड़ जवाब देंगे। सहवाग दिल्ली डेयरडेविल्स, युवराज पुणे वारियर्स और गंभीर कोलकाता नाइटराइडर्स के कप्तान थे।
दिल्ली की टीम टूर्नामेंट में सबसे फिसड्डी रही, जबकि युवराज की पुणे वारियर्स दिल्ली से एक स्थान ऊपर नौवें स्थान पर रही। नाइटराइडर्स की टीम भी एलिमिनेटर में बाहर हो गई। धोनी के आगे इन सबकी दबंगई धरी की धरी गई।
क्रिकेट की दुनिया में भगवान का दर्जा पा चुके मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर भी धोनी की कप्तानी के कायल हैं। विश्वकप के बाद सचिन ने स्वयं स्वीकार किया था कि वे अब तक जितने भी कप्तानों के अंडर में खेले हैं, उनमें धोनी सर्वश्रेष्ठ हैं। धोनी की कप्तानी के लिए इससे बड़ा प्रमाणपत्र क्या हो सकता है?
बेहतरीन रणनीतिकार होने के साथ-साथ धोनी ने नाजुक मौकों पर शानदार पारियां खेलकर टीम को संकट से उबारा है। विश्वकप के फाइनल में नाबाद 91 रन की पारी इसका सबूत है। धोनी ने आईपीएल-4 में 43.55 के औसत से 392 रन बनाएट वे आईपीएल में खिताब जीतने वाले एकमात्र भारतीय कप्तान हैं।
नाजुक मौकों पर संयम बनाए रखना और साहसिक फैसले लेना धोनी की सबसे बड़ी खूबी है। साथ ही वे अपने खिलाड़ियों का भरपूर साथ देते हैं और उनकी काबिलियत पर भरोसा करते हैं। विश्वकप से पहले जब युवराज बुरे दौर से गुजर रहे थे तब धोनी उनके साथ खड़े थे। आखिर युवराज ने विश्वकप में शानदार प्रदर्शन करते हुए धोनी को सही साबित किया और आलोचकों के मुंह पर ताले जड़ दिए।
धोनी अपने खिलाडियों पर कितना विश्वास करते हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आईपीएल4 के अंतिम छह मैचों में उन्होंने अंतिम एकादश में कोई बदलाव नहीं किया। धोनी की बेमिसाल रणनीति और नेतृत्व क्षमता के आगे आईपीएल में सभी विपक्षी कप्तान पानी भरते नजर आए और कैप्टन कूल को खिताब ले जाने से नहीं रोक सके।

मंगलवार, 18 जनवरी 2011

क्रिकेट वर्ल्डकप 2011

वर्ल्डकप क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन 19 फरवरी से होने जा रहा है। इसकी मेजबानी भारत, श्रीलंका और बांग्लादेश संयुक्त रूप से कर रहे हैं। क्रिकेट के इस महासंग्राम से जुड़ी सभी जानकारियाँ आप 'क्रिकेट वर्ल्डकप 2011 अपडेट' लिंक के माध्यम से नियमित प्राप्त कर सकते हैं। प्रस्तुत हैं वर्ल्डकप से जुड़े अब तक के अपडेट...

* गौतम गंभीर ने संकेत दिए हैं कि वे वर्ल्डकप के समापन के बाद वह परिणय सूत्र में बँध सकते हैं।
* ब्रायन लारा भारत को खिताब का प्रबल दावेदार मानते हैं, लेकिन साथ ही उनका यह भी कहना है कि भारत पर घरेलू उम्मीदों का भारी दबाव रहेगा।
* मशहूर कोच देश प्रेम आजाद का मानना है कि वर्ल्डकप के लिए चुनी गई भारतीय क्रिकेट टीम किसी भी लिहाज से संतुलित नहीं है।
* माइकल हसी को ऑस्ट्रेलिया की वर्ल्डकप टीम में शामिल जरूर किया है लेकिन बाएँ पैर की सर्जरी होने के बाद उनका वर्ल्डकप में खेलना संदिग्ध नजर आ रहा है।
* पाकिस्तान के चयनकर्ताओं ने अजूबा पेश करते हुए वर्ल्डकप के लिए 15 सदस्यीय टीम की घोषणा कर दी लेकिन उसने कप्तान का ऐलान नहीं किया। माना जा रहा है कि मिस्बाह उल हक पाकिस्तान टीम के कप्तान बनाए जाएँगे। पाक टीम से सीनियर खिलाड़ी मोहम्मद यूसुफ बाहर हैं।
* ऑस्ट्रेलिया ने भी अपनी 15 सदस्यों की टीम की घोषणा कर दी और इस टीम में तूफानी गेंदबाज ब्रेट ली और शॉन टेट को जगह दी है। एशियाई विकेटों को स्पिन गेंदबाजी की खान माना जाता है, ऐसे में ऑस्ट्रेलियाई चयनकर्ताओं द्वारा टीम में दो तेज गेंदबाज रखना, क्रिकेट बिरादरी में चर्चा का ‍‍विषय बना हुआ है।
* न्यूजीलैंड के पूर्व कप्तान स्टीफन फ्लेमिंग ने वर्ल्डकप के बाद भारतीय टीम के कोच बनने की संभावनाओं को सिरे से नकारते हुए कहा कि मैं अपने परिवार के साथ वक्त बिताना चाहता हूँ। मेरे लिए अब कोचिंग परिवार से बढ़कर नहीं है। उल्लेखनीय है कि वर्ल्डकप के बाद गैरी कर्स्टन का भारत के साथ कोचिंग करार खत्म हो जाएगा।
* भारतीय कप्तान महेन्द्रसिंह धोनी ने पीयूष चावला के चयन को उचित बताया जबकि कुछ क्रिकेट समीक्षकों ने चावला के चयन पर सवाल उठाए।
* मुख्य चयनकर्ता कृष्णमाचारी श्रीकांत ने दावा किया है कि 2011 के वर्ल्डकप के लिए घोषित टीम 'सर्वश्रेष्ठ टीम' है। उन्हें भरोसा है कि इसी टीम के हाथों में विश्वकप होगा।
* भारत की 15 सदस्यीय टीम का चयन 16 जनवरी को चेन्नई में किया गया, जिसमें महेन्द्रसिंह धोनी (कप्तान), वीरेन्द्र सहवाग (उपकप्तान), सचिन तेंडुलकर, गौतम गंभीर, विराट कोहली, युवराज सिंह, सुरेश रैना, यूसुफ पठान, हरभजन सिंह, जहीर खान, आशीष नेहरा, प्रवीण कुमार, मुनाफ पटेल, आर. अश्विन और पीयूष चावला शामिल हैं। रोहित शर्मा, श्रीसंथ और ईशांत शर्मा को भारतीय टीम में जगह नहीं मिली।
* आईसीसी के मुख्यकार्यकारी हारुन लोर्गट ने कहा कि 2011 वर्ल्डकप के सभी स्टेडियम आयोजन से पूर्व तैयार हो जाएँगे। सनद रहे कि मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम समेत 5 स्टेडियमों में निर्माण चल रहा है।
* क्रिकेट ऑस्ट्रे‍लिया के चयनकर्ता ग्रेग चैपल का मानना है कि 2011 के वर्ल्डकप में शेन वॉटसन ऑस्ट्रेलियाई टीम के लिए सफलता की कुंजी स‍ाबित हो सकते हैं।
* पॉल कॉलिंगवुड ने भविष्यवाणी है कि भारत, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड की टीमें सेमीफाइनल के दरवाजे तक पहुँच सकती है।
* कैस्ट्रोल इंडिया ने अपना ‍आईसीसी वर्ल्डकप लांच किया। टीवी पर कैस्ट्रोल के विज्ञापन में सचिन तेंडुलकर नजर आ रहे हैं। सचिन को हाल ही में कैस्ट्रॉल ने अनुबंधित किया है।
* वर्ल्डकप के ग्लोबल प्रायोजक पैप्सी के लिए महेन्द्रसिंह धोनी, वीरेन्द्र सहवाग, हरभजन सिंह, सुरेश रैना और विराट कोहली ने बॉडी पेंट करवाई। क्रिकेटरों के बॉडी पेंट का भारतीय क्रिकेट इतिहास में यह पहला मौका है।
* उद्योग जगत की जानकारी के अनुसार आईसीसी 2011 के वर्ल्डकप के टिकटों की ब्रिकी से 150 करोड़ रुपए तक की आय होने का अनुमान है। भारत, श्रीलंका तथा बांग्लादेश में कुल मिलाकर 20 लाख टिकटें इस दौरान बेची जानी हैं।
* सनथ जयसूर्या और चमिंडा वास को श्रीलंका की 15 सदस्यीय वर्ल्डकप टीम में शामिल नहीं किया गया है। श्रीलंका को 1996 में वर्ल्डकप दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले जयसूर्या और वास के अंतराष्ट्रीय करियर के खत्म होने का यह संकेत है।
* श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने राष्ट्रीय चयन समिति से वर्ल्डकप के लिए देश की सर्वश्रेष्ठ टीम का चयन करने का आग्रह करते हुए कहा कि निजी प्राथमिकता के कारण कोई बेहतर खिलाड़ी टीम से बाहर नहीं होना चाहिए।

शुक्रवार, 22 अक्टूबर 2010

..तब ढेरों पदक ढलते हैं

पी.टी.ऊषा
जीवन सूत्र . पी.टी.उषा ने खेल के मैदान में देश का नाम कई बार रोशन किया और अब अनगढ़ प्रतिभाओं को खोजकर निखार रही हैं। उषा की कहानी, उन्ही की Êाुबानी..

री पैदाइश केरल के छोटे से गांव मेलाडी पयोल्ली की है। परिवार साधारण था, लेकिन मेरी अभिलाषा पूरी करने के लिए उन्होंने जी-जान लगा दी। ६क् के दशक की वे यादें आज भी ताज़ा हैं, जब मेरे माता-पिता ने एहसास भी नहीं होने दिया कि मैं कोई ग़लत इच्छाएं पाल रही हूं। १३ साल की उम्र से लगातार मिले हौसले ने मुझे पयोल्ली एक्सप्रेस और उड़नपरी के नाम से मशहूर कर दिया। परिवार को यक़ीन था कि मैं कामयाब एथलीट बन सकती हूं। उसी यक़ीन ने मुझे सबसे पहले बल और भरोसा दिया। बच्चों में फूटने वाली रोशनी को माता-पिता पहचान सकते हैं।
हर मोर्चे पर संघर्ष
अफ़सोस होता है, यह देखकर कि लोगों का सारा ध्यान क्रिकेट में लगा है। देश के खेल अधिकारियों को देखकर खेद होता है, जो इतना भी यक़ीन दिलाने में नाकाम रहते हैं कि विदेश दौरे में हमारे साथ ठीक बर्ताव होगा। जब मेरा करियर चोटी पर था और तमगों पर मीडिया मुझे शाबाशी दे रहा था, उस व़क्त भी मुझे उतना आदर नहीं मिला, जितना इस देश में क्रिकेट के एक रिटायर खिलाड़ी को मिलता है। यह सब महसूस करके मुझे बेहद पीड़ा हुई है। लेकिन अपने सपने को साकार करने और देश का नाम ऊंचा उठाने के लिए मैने ज़िंदगी के हर मोर्चे पर लड़ाई लड़ी है।
उस पल की कसक
लॉस एंजेलिस में संपन्न १९८४ के ओलिंपिक खेल में ४क्क् मीटर की रेस में एक सेकेंड के सौवें हिस्से के फ़र्क़ ने मुझे कांस्य पदक जीतने से वंचित कर दिया। मैं आज भी उस पल को याद करती हूं कि कैसे चूक गई थी। फिर मुझे कोच की वह सीख याद आती है- ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है कि पीछे देखा जाए।
सपनों को लगे पंख
आख़िरकार2002में उन लड़कियों के सपनों को पंख लगे, जो मुझसे प्रेरित थीं। केरल सरकार की १५ लाख रुपए और ३क् एकड़ ज़मीन की मदद से मैं उषा स्कूल ऑफ एथलेटिक्स को आकार देने में कामयाब हो गई। आठ लड़कियां, जिन्हें मैं तैयार कर रही हूं, अब वही मेरा परिवार हैं। उनकी लगन और गंभीरता हैरान कर देती है।
विश्वास तो करें
अगर सभी खेलों को एक नज़र से देखा जाए, तो कल्पना कीजिए कि ये लड़कियां क्या कर सकती हैं? एक व़क्त शंका और दुविधा का था कि क्या भारत अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स के दायरे में कोई जगह बना सकता है? लेकिन आज मैं दावे के साथ कह सकती हूं, कि हम जीत सकते हैं। कॉमनवेल्थ में लड़कियों ने इतिहास रचकर यह साबित भी कर दिया। हम मेडल की झड़ी लगा सकते हैं, लेकिन जब आप विश्वास करें। मेरे माता-पिता के विश्वास का नतीजा सामने है। उसी विश्वास के साथ मैंने भी उन बच्चियों को तराशने की छोटी-सी कोशिश की है।

शनिवार, 16 अक्टूबर 2010

राष्ट्रमंडल खेलों में गाड़े झंडे,


भारत ने 19वें राष्ट्रमंडल खेलों में पदकों का शतक जमाकर इतिहास रच दिया। जो पिछले 80 सालों में नहीं हो सका वो करिश्मा दिल्ली में देखने को मिला। लेकिन इसका पूरा श्रेय जाता है हमारे निशानेबाजों और पहलवानों को। निशानेबाजी और कुश्ती में हमें 49 पदक मिले, यानी लगभग आधे।
भारत को शूटिंग में 14 गोल्ड, 11 सिल्वर और 5 ब्रोंज मेडल हाथ लगे, जबकि कुश्ती में हमारे पहलवानों ने 10 स्वर्ण, 5 रजत और 4 कांस्य पदक झटके। गगन नारंग, ओंकार सिंह, विजय कुमार, गुरप्रीत, अनीसा, अखिल कुमार, सुशील कुमार जैसे खिलाड़ियों ने देश का नाम रोशन कर दिया है।
भारत के पदकों के शतक में अहम भूमिका इन्ही दो खेलों की रही है। इसी के बूते भारत ने खेलों में दूसरा स्थान प्राप्त किया। अब सभी एथलीटों का लक्ष्य होगा नवंबर में होने वाले एशियन गेम्स। चीन की मेजबानी वाले इस टूर्नामेंट में इंडियन खलाड़ियों का सामना चीन, नोर्थ कोरिय और जापान जैसे देशों के दिग्गज खिलाड़ियों से सामना होगा।
अब भारतीय खिलाड़ियों के सामने राष्ट्रमंडल खेलों का प्रदर्शन चीन में दोहराने की चुनौती होगी। भारत के एकमात्र वर्ल्ड चैंपियन पहलवान सुशील कुमार ने एशियन गेम्स से नाम वापस लेकर पहले ही झटका दे दिया है। अब देखने वाली बात होगी कि हमारे धुरंधर चीन में क्या कमाल करते हैं।
भारत अगर किसी खेल में बादशाह है तो वो है क्रिकेट। लेकिन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड पहले ही हाथ खड़े कर चुका है। जून में ही बीसीसीआई ने ये घोषणा कर दी थी कि ना पुरुष ना महिला क्रिकेट टीम एशियन गेम्स में हिस्सा लेगी।
एशियन गेम्स के 1951 में हुए आगाज से लेकर साल 2006 में हुए अंतिम आयोजन तक भारत ने कुल 494 पदक हासिल किए हैं, जिसमें से 114 स्वर्ण, 152 रजत और 228 कांस्य पदक शामिल हैं।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 की स्वर्णिम सफलता के बाद अब सबकी निगाहें चीन में होने वाले एशियन गेम्स पर टिक गई हैं।
क्या आपको लगता है कि 12 नवंबर से 27 नवंबर के बीच होने वाले खेलों के महासमर में भारतीय एथलीट दिल्ली का प्रदर्शन दोहरा पाएंगे?

शनिवार, 2 अक्टूबर 2010

खेल बिगाड़ा तो खैर नहीं

 रिश्ते में तो हम तुम्हारे..
रविवार से शुरू हो रहे 19वें कॉमनवेल्थ खेलों में जहां सुरक्षा के बेहद कड़े सुरक्षा इंतज़ाम किए गए हैं। वहीं इस बार के कॉमनवेल्थ खेलों के दौरान आपको सुरक्षा दस्ते में लंगूर भी नज़र आ सकते हैं। जी हां खबर है कि भारत में आयोजित हो रहे कॉमनवेल्थ खेलों में बन्दर किसी तरह का कोई उत्पात ना मचाएँ इस लिए सरकार ने इन लंगूरों को बाकायदा नियुक्त किया है।

दरअसल दिल्ली में बंदरों ने खासा उत्पात मचाया हुआ है और सरकार नहीं चाहती कि बन्दर इन खेलों के दौरान किसी तरह का बखेड़ा खड़ा करें यही कारण है कि सरकार ने आनन् फानन में 10 लंगूरों को सिर्फ और सिर्फ बंदरों को भागने के लिए नियुक्त कर दिया है।

गौरतलब है कि इससे पहले बन्दर कई बार प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर रक्षा मंत्रालय तक में अच्छी खासी तोड़ फोड़ कर फरार हो चुके हैं और भारत सरकार नहीं चाहती कि विदेशी महमानों के सामने उसे इस तरह कि किसी भी घटना का सामना करना पड़े।

रविवार, 11 जुलाई 2010

दुनिया के सर्वश्रेष्ठ तीरंदाज

विश्व के पाँच महान धनुर्धर !
शतायु
धनुर्धर तो बहुत हुए हैं। राम और कृष्ण भी धनुर्धर थे, लेकिन वे भगवान थे। भगवान तो कुछ भी कर सकते हैं, लेकिन एक ऐसा भी धनुर्धर था, जिसकी विद्या से भगवान कृष्ण भी सतर्क हो गए थे। युद्ध के मैदान में भीम पौत्र बर्बरीक दोनों खेमों के मध्य बिन्दु, एक पीपल के वृक्ष के नीचे खड़े हो गए और यह घोषणा कर डाली कि मैं उस पक्ष की तरफ से लडूँगा जो हार रहा होगा।
भीम के पौत्र बर्बरीक के समक्ष जब अर्जुन तथा भगवान श्रीकृष्ण उसकी वीरता का चमत्कार देखने के लिए उपस्थित हुए तब बर्बरीक ने अपनी वीरता का छोटा-सा नमूना मात्र ही दिखाया। कृष्ण ने कहा कि यह जो वृक्ष है ‍इसके सारे पत्तों को एक ही तीर से छेद दो तो मैं मान जाऊँगा। बर्बरीक ने आज्ञा लेकर तीर को वृक्ष की ओर छोड़ दिया।

जब तीर एक-एक कर सारे पत्तों को छेदता जा रहा था उसी दौरान एक पत्ता टूटकर नीचे गिर पड़ा, कृष्ण ने उस पत्ते पर यह सोचकर पैर रखकर उसे छुपा लिया की यह छेद होने से बच जाएगा, लेकिन सभी पत्तों को छेदता हुआ वह तीर कृष्ण के पैरों के पास आकर रुक गया। तब बर्बरीक ने कहा प्रभु आपके पैर के नीचे एक पत्ता दबा है कृपया पैर हटा लीजिए क्योंकि मैंने तीर को सिर्फ पत्तों को छेदने की आज्ञा दे रखी है आपके पैर छेदने की नहीं।

उसके इस चमत्कार को देखकर कृष्ण चिंतित हो गए। भगवान श्रीकृष्ण यह बात जानते थे कि बर्बरीक प्रतिज्ञावश हारने वाले का साथ देगा। यदि कौरव हारते हुए नजर आए तो फिर पांडवों के लिए संकट खड़ा हो जाएगा और यदि जब पांडव बर्बरीक के सामने हारते नजर आए तो फिर वह पांडवों का साथ देगा। इस तरह वह दोनों ओर की सेना को एक ही तीर से खत्म कर देगा।
इसलिए भगवान श्रीकृष्ण ब्राह्मण का भेष बनाकर सुबह बर्बरीक के शिविर के द्वार पर पहुँच गए और दान माँगने लगे। बर्बरीक ने कहा माँगो ब्राह्मण! क्या चाहिए? ब्राह्मण रूपी कृष्ण ने कहा कि तुम दे न सकोगे। लेकिन बर्बरीक कृष्ण के जाल में फँस गए और कृष्ण ने उससे उसका शीश माँग लिया।

बर्बरीक द्वारा अपने पितामह पांडवों की विजय हेतु स्वेच्छा के साथ शीशदान कर दिया। दान के पश्चात्‌ श्रीकृष्ण ने बर्बरीक को कलियुग में स्वयं के नाम से पूजित होने का वर दिया। आज बर्बरीक को खाटू श्याम के नाम से पूजा जाता है। जहाँ कृष्ण ने उसका शीश रखा था उस स्थान का नाम खाटू है।

तो यह थी बर्बरीक की कहानी, लेकिन आप तो जानते ही हैं कि अर्जुन को श्रेष्ठ धनुर्धरों की श्रेणी में रखा जाता है। उसी तरह लक्ष्मण, कर्ण और एकलव्य को भी श्रेष्ठ धनुर्धरों की श्रेणी में रखा गया है। इस तरह अब हमारे पास क्रमश: पाँच श्रेष्ठ धनुर्धर हैं:- लक्ष्मण, बर्बरीक, कर्ण, अर्जुन, अश्वथामा और एकलव्य।

1.लक्ष्मण:- राम के छोटे भाई लक्ष्मण को कौन नहीं जानता। लक्ष्मण ने अपने तीर से रेखाGet Fabulous Photos of Rekha खींच दी थी। उस रेखा में ही इतनी ताकत थी कि कोई भी उसके उस पार नहीं जा सकता था। लक्ष्मण की धनुष विद्या के चर्चे दूर-दूर तक थे। शास्त्रों अनुसार लक्ष्मण को श्रेष्ठ धनुर्धर माना गया है। लक्ष्मण ने राम-रावण युद्ध के दौरान मेघनाद को हराया था जिसने युद्ध में इंद्र को परास्त कर दिया था इसीलिए मेघनाद को इंद्रजीत भी कहा जाता है।

2.कर्ण:- वैसे तो महाभारत काल में सैकड़ों योद्धा हुए हैं, लेकिन कहते हैं कि युद्ध में कर्ण जैसा कोई धनुर्धर नहीं था। कवच और कुंडल नहीं उतरवाते, तो कर्ण को मारना असंभव था। कर्ण के तीर की इतनी ताकत थी कि जब वे तीर चलाते थे और उनका तीर अर्जुन के रथ पर लग जाता था तो रथ पीछे कुछ दूरी तक खिसक जाता था। कृष्ण अर्जुन से कहते थे कि जिस रथ पर मैं और हनुमान विराजमान हैं उसके इस तरह पीछे धकेले जाने से पता चलता है कि कर्ण की धनुर्विद्या में बहुत बल है।
3.अर्जुन:- पाँच पांडवों में से एक अर्जुन की धनुष विद्या भी जग प्रसिद्ध थी। गुरु द्रोण के श्रेष्ठ शिष्यों में से एक थे अर्जुन। द्रोण ने अर्जुन को धनुष सिखाते वक्त वचन दिया था कि तुमसे श्रेष्ठ इस संसार में कोई धनुर्धर नहीं होगा। इस वचन की रक्षा के लिए ही उन्होंने एकलव्य से उसका अँगूठा माँग लिया था।

4.एकलव्य:- गुरु द्रोण की मूर्ति बनाकर मूर्ति के समक्ष एकलव्य ने धनुष विद्या सिखी थी। गुरु द्रोण को जब इस बात का पता चला कि एकलव्य अर्जुन से भी श्रेष्ठ धनुष बाण चलाना सिख गया है तो उन्होंने एकलव्य से पूछा कि तुमने यह विद्या कहाँ से सीखी। इस पर एकलव्य ने कहा- गुरुवर मैंने आपको ही गुरु मानकर आपकी मूर्ति के समक्ष यह विद्या को हासिल किया था।

इस बात पर द्रोण ने कहा कि तब तो हम गुरु दक्षिणा के हकदार हैं। एकलव्य यह सुनकर प्रसन्न हो गया और कहने लगा माँगिए गुरुदेव क्या चाहिए। द्रोण ने कहा कि तुम जिस हाथ से प्रत्यंचा चढ़ाते हो मुझे उस हाथ का अँगूठा चाहिए।

बर्बरीक की कहानी हम ऊपर लिख आए हैं। हालाँकि राम को भी श्रेष्ठ धनुर्धरों में गिना जाता है, राम के काल और महाभारत युद्ध में एक से एक श्रेष्ठ धनुर्धर हुए हैं। अश्वथामा को भी सर्वेश्रेष्ठ धनुर्धरों में शामिल किया जा सकता है। प्रत्येक धनुर्धर को अपनी एक अलग ही विद्या के कारण जाना जाता था इस लिहाज से सभी अपने-अपने फन में माहिर थे।

गुरुवार, 3 जून 2010

दिन में भी बिजली जलती रहेगी



विश्व कप फुटबॉल की मेजबानी करने वाले दक्षिण अफ्रीकी शहरों में से एक केपटाउन ने दिन में भी सड़कों पर बिजली जलाकर रखने का फैसला किया है। इसकी वजह है बिजली के तारों की चोरी रोकना।
केपटाउन शहर में नशे की लत में डूबे कई लोग इन तारों को बेचकर नशीली दवाएँ खरीदते हैं और उनकी तादाद बढ़ती जा रही है।
स्थानीय प्रशासन के एक अधिकार क्लाइव जस्टस का कहना है, 'बिजली केबल की चोरी अपने चरम पर पहुँची हुई है और ये कदम इसलिए उठाया जा रहा है क्योंकि ये चोर लाइव तारों को काटकर अपनी जान जोखिम में नहीं डालेंगे।'
गौरतलब है कि इसी महीने विश्व कप फुटबॉल की मेजबानी करने वाला दक्षिण अफ्रीका दो साल पहले भीषण बिजली संकट से जूझ रहा था और पूरे देश में देश की बूढ़ी होती बिजली व्यवस्था को लेकर भारी चिंता थी।
क्लाइव जस्टस का कहना है, 'आमतौर पर बिजली की इस बर्बादी को जायज नहीं ठहराया जा सकता और हम सबको बिजली बचाने पर जोर देना चाहिए, लेकिन चोरी हो गए केबलों को नए सिरे से लगाने की कीमत बिजली की कीमत से कहीं ज्यादा है।'
दिन में खासकर उन इलाकों में सड़कों पर बिजली जलती रहेगी जहाँ चोरी ज्यादा होती है। कुछ इलाके तो ऐसे हैं जहाँ अगर बिजली कर्मचारी पहुँचते हैं तो उनपर हमला भी होता है।
देश में जिन दस स्टेडियम में विश्व कप के मैच होने हैं वहाँ जेनरेटर की व्यवस्था की गई है जिससे कि अगर बिजली तंत्र चरमराता भी है तो खेल जारी रह सके।

गुरुवार, 13 मई 2010

महज खेल न समझिए क्रिकेट को!


पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कोच वूल्मर मरे पाए गए। कहते हैं कि उन्हें टीम की हार के बाद मार डाला गया। किसने मारा, कैसे मरे, ये बातें जाँच का ही विषय हो सकती हैं। मगर उनकी मौत पाकिस्तानी टीम की हार से जुड़ती लगती है।

अपने यहाँ के हालात अभी इतने बुरे नहीं लगते। बांग्लादेश से हारने के दंड स्वरूप यहाँ टीम इंडिया को गालियाँ दी गईं, जूते पहनाए गए, पुतले जलाए गए। धोनी के घर पर हमला किया गया, सहवाग को सजा देने की बात तक की जाने लगी। टीम इंडिया के कोच चैपल साहब भारतीय क्रिकेट फैनों का पागलपन पहले ही झेल चुके हैं जब एक जगह उनसे धक्का-मुक्की तक की गई थी। यह होना है। होते रहना है। यह अपने क्रिकेट का एक अंतःस्फोट है। उसके भीतरी अर्थ बदल रहे हैं। बदल चुके हैं। वह क्रिकेट से ज्यादा कुछ बन चला है। खेल से अधिक बन गया है। यह लेखक क्रिकेट का विश्लेषक नहीं है।

क्रिकेट एक पॉपुलर कल्चर की तरह है, जिसका आस्वाद लेने के लिए उसका विशेषज्ञ होना आदमी को उसके उस मजे से वंचित करना है, जो किसी खेल को देखकर आदमी को मिलता है। एक पाठक-दर्शक होने के नाते, देश का एक मामूली नागरिक होने के नाते इस लेखक को भी टीम का जीतना-हारना दिलचस्पी का विषय लगता है। कमेंट्रेटर जीत-हार का बारीकी से विश्लेषण करते हैं तो अक्ल दंग रह जाती है। कभी-कभी लगता है कि खेलने वाले से ज्यादा ये लोग जानते हैं। इन्हीं को खेलने के लिए कहना चाहिए।

यह लेखक कभी-कभी इस बात को देखकर चकित होता है कि जब जाने-माने क्रिकेट विशेषज्ञ खेल की समीक्षा करते हैं तो उनमें क्रिकेट को लेकर एक तरह की अंध-देशभक्ति मचलती है जैसी कि सड़क-छाप क्रिकेट फैन में होती है, जो जीत पर जश्न मनाता है और हार पर बौखलाता है, हिंसक होता है। जब से क्रिकेट का कॉर्पोरेटीकरण हुआ है, जब से उसमें बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बड़े धन का निवेश हुआ है, जब से स्पांसर उसके एक-एक पल को खरीदने-बेचने की होड़ लिए आए हैं, जब से टीवी प्रसारण ने क्रिकेट को खेल से ज्यादा एक पॉपुलर जीवन-शैली बना दिया है, जब से उसका बहुराष्ट्रीय ब्रांड बना है, जब से 'टीम इंडिया' बनी है, जब से हमारे खिलाड़ियों के माथे, पेट, पीठ, हाथ, पैर सब किसी न किसी ब्रांड चिह्न से सज्जित नजर आते हैं, तब से क्रिकेट की चाल, चेहरा, चरित्र यानी सकल चोला बदल गया है।

इन सबसे संवलित क्रिकेट अब एक विराट पॉपुलर कल्चर है जिसमें एक ही वक्त में क्षणिक देशभक्ति, थोड़ा भय, थोड़ा आंनद, थोड़ा खेल, थोड़ा कौतूहल, थोड़ा साहस और थोड़ी हार-जीत रहने लगी है। उसको उसके संपूर्ण अर्थ देने वाला तत्व उसका दर्शक, उसका फैन है, प्र्रशंसक है। यह प्रशंसक भी इकहरा नहीं है, उसमें भी थोड़ा-थोड़ा कुछ मिला रहता है।
हमारे क्रिकेट के विश्लेषकों को क्रिकेट की बॉल दिखती है, बल्ला दिखता है, हार-जीत दिखती है। उन्हें यह फैन नहीं दिखता कि वह हर बॉल, हर जीत-हार को कैसे लेता है और वह क्रिकेट के मानी को किस तरह घड़ी-घड़ी बदलता है। यदि इन दिनों क्रिकेट का विश्व कप देश की प्रतिष्ठा का पर्याय बन चला है, तो इसी फैन कल्चर के कारण। एक क्रिकेट मैदान में होती है, तो उससे भी बड़ी क्रिकेट फैन के दिमाग में होती है, उसके आसपास उसके घर में होती है। यह क्रिकेट का भाव है, रस है जिससे परिचालित होकर फैन अपनी क्रियाएँ करता है।

जब से टीवी उपभोक्ता ब्रांडों का बाजार बनाने वाला एक बड़ा माध्यम बना है, तब से क्रिकेट खेल से कुछ ज्यादा हो गया है। कुछ ही दिन पहले एक फैन से परिचय हुआ। वह टीम इंडिया की उसी ड्रेस में सज्जित था, जिसमें खिलाड़ी रहते हैं। उसका चेहरा धोनी जैसा था, बाल भीधोनी जैसे थे। वह भारतीय क्रिकेटर की ऑफिशियल शर्ट-पैंट को पहने था और खुद को धोनी से कम न समझ रहा था।

पूछने पर उसने बड़े गर्व से बताया कि उसने यह ड्रेस तीन हजार में एक मॉल से खरीदी है, उसके कई दोस्तों ने भी ली है। वे क्रिकेट वर्ल्ड कप के मैचों को जब देखेंगे तो इसी ड्रेस को पहनकर देखेंगे। मोहल्ले का वह नौजवान एक कॉल सेंटर में काम करता है। उसकी पाली दिन की है। वह रात में मैच जरूर देखेगा क्योंकि वर्ल्ड कप इस बार 'हमारा है'। उसने दाँव लगाया हुआ है कि अगर टीम अपने पहले कुछ मैच लगातार जीतती है तो उसे इतने का फायदा होगा। यह दोस्तों में लगी शर्त है। यदि हारी तो बुरा होगा, बहुत बुरा होगा...।

जब बांग्लादेश से टीम बुरी तरह हारी और वह अगले दिन सुबह मिला तो उसके चेहरे पर एक वास्तविक किस्म की उदासी थी, थोड़ी चिढ़ थी।

जाहिर है कि वह उन तमाम सवालों से उलझ चुका था जो उसके जैसे हीरो से लोगों ने पूछे होंगे। उसका कहना था कि उसका वश चलेतो टीम से सहवाग को फौरन आउट कर दे। चैपल को गोली मार दे। धोनी अब उसका हीरो नहीं था। लेकिन वह उस चेहरे को कहीं नहीं ले जा सकता था, जो धोनी जैसा था, वह उन बालों को नहीं कटवा सकता था, जो धोनी के बालों जैसे दिखते थे। वह धोनी का क्लोन था, उससे जुदा ज्यादा देर नहीं रह सकता था। उसे मंदिर जाना था और धोनी की सफलता की कामना करनी थी। टीम इंडिया जीते या हारे, धोनी तो आगे रहे!
यह एक आम फैन है, जिसे क्रिकेट ने बनाया है। यह इकहरा नहीं है। इसका क्रिकेट पर दबाव है क्योंकि उस पर ब्रांडों का दबाव है। उसने टीम जैसा होने, उसका असल दर्शक होने के लिए चार-पाँच हजार रुपया खर्च किया है। वह अपने को टीम का अभिन्ना हिस्सा मानता है,क्लोन मानता है। अगर टीम हारती है तो क्या उसे उतना भी दर्द न होगा जितना असल हारने वालों को होगा? वह फैन क्या जिसे दर्द न हो, हर्ष न हो! बल्कि ज्यादा दर्द होगा क्योंकि वह क्लोन है। हारने पर जो हिंसा अचानक हो उठती है, जीतने पर जैसी अंधी पटाखेदार खुशी मचल जाती है, वह इसी तरह के क्लोन या कहें फैन का व्यवहार है, जो क्रिकेट को 'डिफाइन' करता है। क्रिकेट का अर्थ अब खेल में महदूद नहीं है। वह उससे बाहर उसके चाहने वालों के पास है।

इस तरह क्रिकेट अब एक 'कल्चरल एक्शन' है, एक सांस्कृतिक कार्रवाई है। वहाँ कुछ भी हो सकता है। खिलाड़ी देवता बन सकता है, खिलाड़ी राक्षस भी बन सकता है। यही हो रहा है। खेल के मानी बदल गए हैं। इन नए अर्थों को पढ़े बिना काम नहीं चल सकता।

गुरुवार, 7 जनवरी 2010

क्रिकेट

आईपीएल थ्री में 51 क्रिकेटरों की लगेगी बोली


नई दिल्ली। पाकिस्तानी हरफनमौला शाहिद अफरीदी, कीवी तेज गेंदबाज शेन बांड और कैरेबियाई बल्लेबाज काइरोन पोलार्ड उन 51 क्रिकेटरों की सूची में शामिल है जिनका चयन 19 जनवरी को इंडियन प्रीमियर लीग के लिए होने वाली नीलामी के लिए किया गया है।

रामनरेश सरवन [वेस्टइंडीज], नाथन मैक्कुलम, [न्यूजीलैंड], क्लाइंट मैकाय और डग बोलिंगर [आस्ट्रेलिया], चनक वलेगेदारा और नुवान जोयसा [श्रीलंका], उमर अकमल [पाकिस्तान] और यूसुफ अब्दुल्ला तथा रोरी क्लेनवेल्ट [दक्षिण अफ्रीका] भी इस सूची में हैं। सूची में 11 आस्ट्रेलिया, नौ दक्षिण अफ्रीकी, आठ श्रीलंकाई, वेस्टइंडीज के आठ और पाकिस्तान के सात खिलाड़ी शामिल हैं। मुंबई में होने वाली इस नीलामी में पहली बार हालैंड और कनाडा के खिलाड़ी भी शामिल होंगे।

आईपीएल संचालन परिषद के दिशा निर्देशों के तहत हर फ्रेंचाइजी के पास खिलाडि़यों को खरीदने के लिए 750,000 डालर होंगे। आयोजकों द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया, आईपीएल को अंतरराष्ट्रीय खिलाडि़यों से करीब 100 आवेदन मिले हैं जिनमें से आठ फ्रेंचाइजी ने 60 खिलाडि़यों की छंटनी की और उनमें से अंतिम सूची में 51 खिलाडि़यों के नाम है। बाकियों को घरेलू बोर्ड से एनओसी मिलने के बाद शामिल किया जाएगा। आईपीएल का तीसरा सत्र 12 मार्च से शुरू होगा। आईपीएल अध्यक्ष और आयुक्त ललित मोदी ने कहा, दुनिया भर के खिलाडि़यों ने आईपीएल 2010 में खेलने को लेकर जो उत्साह दिखाया है, वह काबिले तारीफ है। मैं कनाडा और हालैंड के खिलाडि़यों का खास तौर पर स्वागत करता हूं और सभी 51 खिलाडि़यों को शुभकामना देना चाहता हूं।

खिलाडि़यों की सूची इस प्रकार है।

1 ़ मोहम्मद आमिर [पाकिस्तान]

2. यूसुफ अब्दुल्ला [दक्षिण अफ्रीका]

3. शाहिद अफरीदी [पाकिस्तान]

4. सईद अजमल [पाकिस्तान]

5. उमर अकमल [पाकिस्तान]

6. शाकिब अल हसन [बांग्लादेश]

7. सुलेमान बेन [वेस्टइंडीज]

8. डग बोलिंगर [आस्ट्रेलिया]

9. शेन बांड [न्यूजीलैंड]

10. डेरेन ब्रावो [वेस्टइंडीज]

11. रिजवान चीमा [कनाडा]

12. जांडेर डे ब्रून [दक्षिण अफ्रीका]

13. ग्रांट एलियट [न्यूजीलैंड]

14. डेरेन गंगा [वेस्टइंडीज]

15. मूरे गुडविन [जिम्बाब्वे]

16 . ब्रेड हैडिन [आस्ट्रेलिया]

17. वावेल हाइंड्स [वेस्टइंडीज]

18. फिलीप ह्यूज [आस्ट्रेलिया]

19. थिलन कदांबी [श्रीलंका]

20. जस्टिन केम्प [दक्षिण अफ्रीका]

21. रोरी क्लेनवेल्ट [दक्षिण अफ्रीका]

22. एशले नोफ्के [आस्ट्रेलिया]

23. जेसन क्रेजा [आस्ट्रेलिया]

24. नुवान कुलशेखरा [श्रीलंका]

25. बेन लागलिन [आस्ट्रेलिया]

26. ग्राहम मनोऊ [आस्ट्रेलिया]

27. डेमियन मार्टिन [आस्ट्रेलिया]

28. नाथन मैक्कुलम [न्यूजीलैंड]

29. क्लाइंट मैकाय [आस्ट्रेलिया]

30. राना नावेद उल हसन [पाकिस्तान]

31. इमरान नजीर [पाकिस्तान]

32. वेन पर्नेल [दक्षिण अफ्रीका]

33. थिसारा परेरा [श्रीलंका]

34. वेर्नोन फिलांडेर [दक्षिण अफ्रीका]

35. काइरोन पोलार्ड [वेस्टइंडीज]

36. अब्दुल रज्जाक [पाकिस्तान]

37. केमार राश [वेस्टइंडीज]

38. रामनरेश सरवन [वेस्टइंडीज]

39. पीटर सिडल [आस्ट्रेलिया]

40. चामरा सिल्वा [श्रीलंका]

41. लैंडल सिमंस [वेस्टइंडीज]

42. रियान टेन डोइशे [हालैंड]

43. उपल थरंगा [श्रीलंका]

44. एल सोटसोबे [दक्षिण अफ्रीका]

45. जोहान वानडेर वाथ [दक्षिण अफ्रीका]

46. वान वान जार्सवेल्ड [दक्षिण अफ्रीका]

47. लू विंसेंट [न्यूजीलैंड]

48. एडम वोजेस [आस्ट्रेलिया]

49. कौशल वीररत्ने [श्रीलंका]

50. चनक वलेगेदारा [श्रीलंका]

51. नुवान जोयसा [श्रीलंका]