सोमवार, 15 नवंबर 2010

भागवत: 117-118 : ऐसे बचें वासनाओं के जाल से

आज हम भागवत के आठवें स्कंध में प्रवेश कर रहे हैं। वासना के विनाश के क्या मार्ग हो सकते हैं? ये प्रश्न परीक्षित शुकदेवजी महाराज से पूछ रहे हैं। शुकदेवजी कहते हैं- चार काम करिए वासनाओं से बच जाएंगे। पहला काम सतत स्मरण करिए, दूसरा काम है ईश्वर का ध्यान करें। तीसरी बात कि स्ववचन का पालन करें। आपने जो भी कहा है वो किया जाए। इसका गूढ़ अर्थ है कि मन, वचन और कर्म में एकरूपता हो और चौथी बात कि वासना से बचना चाहें तो शरणागति भगवान की करें। ये चार तरीके वासना से बचने के बताए।

शुकदेवजी ने कहा कि परीक्षित मै आपको मनु की कथा सुनाने जा रहा हूं। पांचवें मनु तामस के सहोदर रेवत की कथा सुन लीजिए। इस मनवंतर में शुभ ऋषि की पत्नी त्रुुकुण्टा के गर्भ से भगवान ने वैकुण्ठ अवतार धारण किया और उन्होंने वैकुण्ठ लोक की रचना की। चक्षु के पुत्र से चाक्षुस छठें मनु हुए। इस मनवंतर ने वराज की भार्या के गर्भ से भगवान ने अजिति नाम का अवतार धारण किया जिसने क्षीरसागर का मंथन कर देवताओं को अमृतपान कराया। आठवें स्कंध का एक प्रसंग आरम्भ होता है।
हाथियों का राजा गजेंद्र था। बड़ा मदमस्त रहता था। एक दिन अपने परिवार के साथ सरोवर में स्नान करने गया। तभी पानी के भीतर बैठे मगर ने उसका पैर पकड़ लिया। उसके बाद गजेंद्र का क्या हुआ? तथा गजेंद्र के पूर्व जन्म की कथा हम कल पढ़ेंगे।
जब भगवान हरि ने बचाए गजेंद्र के प्राण
पिछले अंक में हमने पढ़ा कि हाथियों का राजा गजेंद्र एक दिन परिवार के साथ सरोवर में स्नान के लिए गया जहां मगर ने उसका पैर पकड़ लिया। ये जो गजेंद्र था ये पूर्व जन्म में इन्द्रद्युम्न नाम का राजा था। मगर ने जैसे ही उसका पैर पकड़ा तो उसने पैर छुड़ाने की कोशिश की और वो जो मगर था वो हूहू नाम का एक गंधर्व था। इन दोनों को शाप मिला था तो इस योनि में आए थे। मगर ने पैर पकड़ लिया तो घबराया हाथी और चिल्लाया, उसकी पत्नियां थीं हथनियां और रिश्तेदारों ने उसको हाथ पकड़कर खींचना शुरू किया। मगर उसको और भीतर ले जा रहा था।

सबने बोला कि हमने इतनी ताकत लगाई पर तुम अंदर ही जा रहे हो, हम तुम्हारे साथ अंदर नहीं जाएंगे। हाथी ने देखा मेरी पत्नियां, मेरे बच्चे, वो मेरे मित्र जो मेरे साथ नहा रहे थे सब खड़े होकर तमाशा देखने लग गए। तो उसकी समझ में जो आया वो हम भी समझ जाएं। ये गजेंद्र हम हैं, हमारी मस्ती, हमारा मद है। हम संसार में ऐसे ही कूद-फान मचाते हैं। अचानक काल नीचे से आकर पकड़ लेता है और जैसे ही आपका काल आएगा आपको अकेले ही जाना है। थोड़ी बहुत खींचातानी सब कर लेंगे, पर जाना आपको अकेले ही है। तो गजेंद्र को समझ में आया। उसने भगवान की स्तुति की। एक कमल का फूल भगवान को अर्पित किया। हरि अवतार में भगवान आए सुदर्शन चक्र से मगर का वध किया। उसको मुक्त कराया। ये गजेंद्र मोक्ष की कथा है।

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