शुक्रवार, 24 जून 2011

हर पति का है ये कर्तव्य....

अगस्त्य मुनि ने राजा से अपनी आवश्यकता अनुसार धन दान में लिया और लोपामुद्रा की सारी इच्छाएं पूरी की। तब लोपामुद्रा ने कहा- आपने मेरी सारी इच्छाएं पूरी कर दीं, अब मैं हमारे एक पराक्रमी पुत्र को जन्म देना चाहती हूं। अगस्त्य मुनि ने कहा-
मैं तुम्हारे सदाचार से बहुत खुश हूं। इसलिए तुम्हारे बारे में जो मैं सोचता हूं वह सुनो तुम्हे सहस्त्र पुत्रों के समान सौ पुत्र हो या सौ के समान दस पुत्र हो? या सौ को परास्त कर देने वाला एक ही पुत्र हो तुम क्या चाहती हो?
तब लोपामुद्रा ने कहा- मुझे तो सौ को पराजित करने वाला एक ही पुत्र चाहिए। उसके बाद लोपामुद्रा का गर्भ ठहरा। दोनों फिर वन में रहने लगे। लगभग सात साल गर्भ से रहने के बाद लोपामुद्रा ने एक पुत्र को जन्म दिया। उनके पुत्र के जन्म के बाद उनके पूर्वजों को मोक्ष मिला। यह स्थान अगस्त्याश्रम के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इस आश्रम के ही पास भागीरथी नदी है। भगवान राम ने जब परशुरामजी को तेज विहीन कर दिया था। तब उन्होंने इसी तीर्थ में स्नान करके फिर से तेज प्राप्त किया था।

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