मंगलवार, 21 जून 2011

रात को पानी का बरतन सिरहाने रखकर क्यों सोते हैं?

कहते हैं अगर शरीर को स्वस्थ्य रखना हो तो ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए। पानी पीने से कई तरह के रोग तो दूर होते ही है साथ ही शरीर में उपिस्थत विषैले पदार्थ भी बाहर निकल जाते हैं। त्वचा कांतिमय रहती है। हमारे शास्त्रों में वरूण को जल का देवता माना गया है। माना जाता है कि तांबे के जग या पात्र का पानी पीने से कई तरह की पेट से संबंधित समस्याएं भी खत्म होती हैं।
लेकिन ज्योतिष के अनुसार तांबे को सूर्य की धातु माना गया है। ऐसी मान्यता है कि जन्मकुंडली में सूर्य अच्छी स्थिति में ना हो या नीच राशि में हो तो तांबे के लौटे से सूर्य को अघ्र्य देने से सूर्य से संबंधित सभी दोष दूर हो जाते हैं। इसी कारण नीच के सूर्य का प्रभाव कम करने के लिए तांबे की अंगुठी पहनने की राय दी जाती है। साथ ही ज्योतिष के अनुसार एक मान्यता यह भी है कि कुंडली में सूर्य के अच्छी स्थिति में ना होने पर किसी भी कार्य में आसानी से सक्सेस नहीं मिल पाती है। इसीलिए किसी भी व्यक्ति को अगर सफलता नहीं मिल रही हो और वह अपने जीवन में सफलता चाहता हो तो उसे सूर्य से जुड़े उपाय करने चाहिए। ज्योतिष के अनुसार सूर्य आत्मा का कारक है।
सूर्य अच्छा है तो आत्मविश्वास बढ़ता है।इसीलिए सफलता प्राप्ति के लिए सूर्य को बलि बनाना आवश्यक है। इसके लिए रात्रि को तांबे के पात्र में जल भरकर उसमें माणिक डालकर रातभर रखें और वह पानी पीएं क्योंकि माणिक को सूर्य का रत्न माना गया है। दरअसल इसका एक ओर पहलू है वो है कलर थैरेपी। कलर थैरेपी के अनुसार लाल रंग को आत्मविश्वास बढ़ाने वाला माना जाता है और लाल धातु में लाल रत्न यानी तांबे में माणिक रत्न यही काम करता है।ऐसा नियमित रूप से करने से सूर्य से जुड़े सारे दोष दूर होने के साथ ही कई रोग दूर होते हैं। दिनभर तन व मन स्फूर्ति से भरा रहता है और शीघ्र ही सफलता के रास्ते खुलने लगते हैं।

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