शनिवार, 2 नवंबर 2013

सच्ची दोस्ती... (बच्चों के लिए कहानी)


टीना नवीं कक्षा में पढ़ती थी, वह पढ़ाई में बहुत होशियार थी और हमेशा ही अपनी कक्षा में अव्वल आती थी। टीना में वैसे तो सभी आदतें अच्छी थीं किन्तु पढ़ाई को लेकर वह बहुत असुरक्षित महसूस करती थी। उसे हमेशा डर रहता था कि पढ़ाई में कहीं कोई उससे आगे न निकल जाए। अपने असुरक्षा बोध के कारण वह अपनी पढ़ाई को कभी किसी के साथ भी शेयर नहीं करती थी। टीना की एक सहेली थी रितु, रितु भी टीना के साथ ही पढ़ती थी और पढ़ाई में भी टीना के लगभग बराबर ही थी। टीना रितु के साथ वैसे तो अपनी सभी बातें शेयर करती किन्तु जैसे ही पढ़ाई की बात आती वह या तो बात बदल देती या पढ़ाई न हो पाने का रोना रोती, परीक्षा आने से पहले तक टीना को यह कहते सुना जा सकता था कि उसकी पढ़ाई अच्छी नहीं चल रही है। कई बार जब उसकी सहेली रितु किसी कारण से क्लास वर्क न कर पाने के कारण अथवा स्कूल में अनुपस्थिति की वजह से काम न कर पाती और टीना से उसकी कॉपी या नोट्स मांगती तो टीना हमेशा ही यह बहाना बना देती कि उसका काम पूरा नहीं हुआ है। टीना को डर था कि कहीं उसके नोट्स पढ़कर कोई उससे ज्यादा नंबर न ले आए। रितु टीना की इस आदत को समझने लगी थी कि टीना यह झूठ बोल रही है परन्तु वह टीना को अपना सबसे अच्छा दोस्त मानती थी, वह उसकी बात उसके सामने बताकर उसे झूठा नहीं ठहरा सकती थी। एक बार की बात है टीना बहुत बीमार थी, बीमारी की वजह से वह कई दिनों सें स्कूल भी नहीं जा पा रही थी। परीक्षाएं नजदीक थीं और कई दिनों से स्कूल न जा पाने के कारण टीना परीक्षाओं का सिलेबस भी पूरा नहीं कर पाई थी। टीना बहुत दुः.खी थी। एक दिन अचानक रितु टीना के घर उसकी तबियत के बारे में पूछने आई। टीना ने बताया कि तबियत तो अब कुछ ठीक है किन्तु डॉक्टर ने उसे अभी और कुछ दिन तक आराम करने को कहा है। टीना ने रितु को बताया कि इतने दिनों से स्कूल न जा पाने की वजह से उसका स्कूल का सारा काम बाकी है और परीक्षाएं भी सिर पर हैं। रितु टीना की प्राब्लम को समझ पा रही थी, उसने तुरंत ही टीना से कहा- ‘‘टीना ! यदि तू चाहे तो मैं स्कूल के बाद शाम को अपने स्कूल बैग के साथ एक-दो घंटे तेरे घर आ सकती हूं, इस बीच हम स्कूल में बाकी रह गए तुम्हारे काम को भी पूरा कर पाएंगे और परीक्षा की तैयारी भी कर सकेंगे। रितु की बात से टीना को बड़ा आश्चर्य हुआ, टीना को रितु के साथ अपने पूर्व व्यवहार के कारण यह उम्मीद नहीं थी कि रितु इस तरह से उसका साथ देगी। टीना की आंखों में आंसू थे, उसने हां में अपना सिर हिलाया। अगले दिन से रितु प्रतिदिन टीना के घर गई और अपने नोट्स देकर स्कूल न जा पाने के कारण बाकी रह गए उसके सारे कार्य को निपटाने में उसकी मदद की। साथ मिलकर पढ़ने से उनकी पढ़ाई से संबंधित बहुत सी दुविधाएं भी दूर हो गईं थीं। रितु की मदद से टीना इस बार अपनी परीक्षाएं पूरे विश्वास के साथ दे पाई और पहले की ही तरह पूरे नंबर भी प्राप्त किए। टीना को अपनी मार्कशीट देखकर स्वयं से ज्यादा गर्व अपनी सहेली पर हो रहा था। अब उसने तय कर लिया था कि वह भी अपनी आदत बदलेगी और समय पड़ने पर अपने दोस्तों का सदा साथ देगी।

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