मंगलवार, 29 सितंबर 2015

कविता लिखना बहुत बड़ी चुनौती है : सुनीता शर्मा

जितने सफल होंगे उतने ही ज्यादा दुश्मन होते हैं
रायपुर।  घर, नौकरी और साहित्य की जिम्मेदारी बखूबी निभाने वाली सुनीता शर्मा एक जाना पहचाना नाम है। कई कवि सम्मेलनों में अपनी कविताओं का लोहा मनवा चुकी सुनीता कविता लिखने और स्टेज पर कविता पाठ करने को सबसे बड़ी चुनौती मानती है। माता पिता की प्रेरणा से लेखन में कदम रखने वाली सुनीता की दिली इच्छा अंतर-राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने की है। गौमाता की सबसे बड़ी भक्त सुनीता गौरक्षा पर कविता लिखकर देश को गौरक्षा का सन्देश देना चाहती हैं। वे कहती है कि जो जितना सफल होते है उतने ही उनके ज्यादा दुश्मन होते है। उनकी कविता संग्रह समर्पण बाज़ार में उपलब्ध है जिसमे 50 कविताओं का समावेश है। सुनीता शर्मा से हमने हर पहलूओं पर बेवाक बात की है। पेश है बातचीत के संपादित अंश।                                  -  अरुण कुमार बंछोर
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संक्षिप्त परिचय 
0 नाम                - सुनीता शर्मा
0 शिक्षा              - बी काम , एम ए , बीजेएमसी
0 व्यवसाय           - नौकरी महिला प्रकोष्ठ अधिकारी जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, रायपुर
0 रुचि                - लेखन , पेंटिंग , तीर्थाटन
0 उपलब्धि           - कविता संग्रह समर्पण
                     - नायिका अवार्ड , ब्रम्ह सम्मान , चिंगारी सम्मान , स्त्री शक्ति सम्मान ,
                       उत्कृष्ट कर्मचारी सम्मान, सावन क्वीन सम्मान, पावन कवियित्री सम्मान ,
                       लाखे पुरूस्कार , गौपालन गौरक्षा सम्मान ।
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0 कविता लिखने की ओर रुझान कैसे हुआ?
00 बचपन से ही मेरा रुझान इस ओर रहा है। बचपन में कुछ ना कुछ करती रहती थी। स्कूल में थी तो माँ -बाप बहुत प्रेरित करते थे। उसी माहौल में लिखना सीखा है।
0 मतलब पारिवारिक माहौल ने ही आपको लिखना सिखाया?
00 हाँ ! मेरे पापा स्वर्गीय वी एल शर्मा ओर माता श्रीमती सरोज शर्मा ही मेरे आदर्श है। उसके बाद मेरे पति अश्विनी कुमार शर्मा का बहुत बड़ा सहयोग रहा है तभी आज मैं इस मुकाम पर हूँ।
0 घर परिवार और नौकरी के बीच कविता लिखने के लिए समय कैसे निकाल पाती हैं?
00 जिस समय मूड होता है उसी समय लिखती हूँ। खासकर रात में या कही सफर पर होती हूँ तो लिखती हूँ। ज्यादातर मै सरकारी नौकरी में होने के कारण दौरे पर होती हूँ तो समय रास्ते में समय का उपयोग करती हूँ।
0 कभी-कभी आपको आलोचना भी सहनी पड़ती होगी ?
00 हाँ जरूर ! जो जितना सफल होते है उतने ही उनके ज्यादा दुश्मन होते है।
0 कविता लिखना कितनी बड़ी चुनौती है?
00 बहुत बड़ी चुनौती लगती है । थीम ऐसा हो, जिसमे सरल , कवि मन और पाठकों के लिए हो। इसे सोचने , समझने और शब्दों में ढालना चुनौती है।
0  इस क्षेत्र  में कभी निराशा हुई है ?
00 कभी नहीं! मैं कभी निराश नहीं होती।
0  और कभी ऐसा क्षण हो आया हो जब आप बहुत ज्यादा उत्साहित हुई हो?
00 अखिल भारतीय कवि सम्मलेन का संचालन कर बहुत उत्साहित हुई थी। वो सुखद क्षण था और यादगार लम्हा।
0 आपको इसके लिए परिवार से कितना सहयोग मिलता है?
00 पूरा सहयोग मिलता है। एक लड़की होने के बाद भी मेरे माता-पिता ने मुझे कभी बंधन में नहीं रखा। और आज मेरे पति भी मेरे हर कदम में हर पल मेरे साथ होते हैं , इसलिए आज मैं इस मुकाम पर हूँ।
0 ऐसा आपका कोई सपना जो आप पूरा होते हुए देखना चाहती हों?
00 राष्ट्रीय अंतर-राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बने , यही सपना है। साथ ही गौरक्षा पर कविता लिखकर देश को गौरक्षा का सन्देश देना चाहती हूँ।




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