रविवार, 14 फ़रवरी 2010

हँसगुल्ले

मुन्ने चल, चलाचल!
पत्नी : 'तुम्हें कुछ खबर भी है? अरे, हमारे मुन्ने ने चलना भी शुरू कर दिया है।'
दार्शनिक पति : 'अच्छा! कब से?'
पत्नी : 'दस दिन हो गए।'
पति : 'अरे! तो उसे पकड़ो! अब तक तो बहुत दूर निकल गया होगा, शैतान।'

वाह साहबजादे!पन्नूजी, बेटे के साथ चीनी लेने दुकान पर पहुँचे।
दुकानदार बोला- 'चीनी तो आउट ऑफ स्टॉक
है।'

यह सुन बेटे ने पूछा- 'पापा! आउट ऑफ स्टॉक का क्या मतलब?'
पन्नू जी ने बताया- 'बेटे! कोई चीज जब मौजूद न हो तो उसे आउट ऑफ स्टॉक कहा जाता है।'
खैर, दोनों घर पहुँचे तभी किसी ने बाहर से आवाज दी।
पन्नूजी ने बेटे से कहा- 'कह दे पापा घर में नहीं हैं।'
साहबजादे ने बाहर जाकर फरमाया- 'अंकल! मेरे पापा आउट ऑफ स्टॉक हैं।

ले बेटा!

माँ : 'पप्पू बेटे रो क्यों रहे हो?'
पप्पू : 'पापा कीचड़ में गिर गए।'
माँ : 'अरे तो रोना कैसा? तुम्हें तो हँसना चाहिए।'
पप्पू : 'मैं पहले हँसा ही तो था।'

पराठा चिंतन!
देहरादून जा रही बस में एक लड़का बार-बार उठकर कंडक्टर से पूछता- 'क्योंजी! क्या मेरठ आ गया?'
तंग आकर कंडक्टर ने पूछ ही लिया- 'तुम्हें तो देहरादून उतरना है.... फिर ये मेरठ-मेरठ की रट क्यों लगा रखी है?'
लड़का बोला- 'इसलिए बाबू, कि मेरी मम्मी ने मेरे साथ भरवाँ पराठे बाँधे हैं और कहा है कि जब मेरठ आ जाए तो मैं इन्हें खा लूँ।'




स्वप्न का घोड़ा








एक व्यक्ति (डॉक्टर से)- 'डॉक्टर साहब, मुझे रात को बहुत बुरे-बुरे सपने आते हैं।'
डॉक्टर- 'तुम स्वप्न में क्या देखते हो?'
व्यक्ति- 'मैं रात को घोड़ा बन गया हूँ और घास खाने लगा हूँ।'
डॉक्टर- 'इसमें परेशानी किस बात की है, सपना ही तो है।'
व्यक्ति -'दिक्कत यह है कि जब मैं सुबह उठा, तो आधी चटाई खा चुका था।'

ओह नो
टिंकू : 'मम्मी। बैंक में सर्विस करने वाली हमारी जो नई पड़ोसन आंटी हैं न, मुझे आज उनका नाम मालूम पड़ गया।'
मम्मी : 'कैसे?'
टिंकू : 'मैं आज जब भैया के साथ बैंक गया तो मैंने देखा वो आंटी वहीं काम कर रही थीं और पता है उनके सामने कांउटर पर उनकी नेमप्लेट भी रखी थी।'
मम्मी : 'तो, क्या लिखा था नेमप्लेट पर?'
टिंकू : 'चालू खाता'

गधा
पुत्र (पिता से)- 'पिताजी-पिताजी ! दूल्हे को घोड़े पर क्यों बिठाते हैं, गधे पर क्यों नहीं ?'
पिता- 'बेटे ! एक गधे को दूसरे गधे पर नहीं बैठाया जाता।'

पगडंडी
एक मूर्ख- 'अगर तुम इस टॉर्च की पगडंडी पर ऊपर तक जाओगे, तो मैं तुम्हें तीन हजार रुपए दूँगा।'
दूसरा मूर्ख- 'मैं इतना मूर्ख नहीं हूँ। मैं जानता हूँ जैसे ही मैं पगडंडी पर ऊपर पहुँच जाऊँगा, तुम टॉर्च बंद कर दोगे।'

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