रविवार, 2 मई 2010

पुण्यतिथि पर विशेष..


हिंदी सिनेमा की सशक्त हस्ताक्षर थीं नर्गिस
बालीवुड में अपनी सुंदरता के साथ-साथ अभिनय के लिए ख्याति पाने वाली चंद अभिनेत्रियों में निस्संदेह नर्गिस का नाम अग्रिम पंक्ति में रखा जाता है। इसका उदाहरण है महबूब खान की क्लासिक दर्जा पा चुकी फिल्म मदर इंडिया जिसमें राधा की अमर भूमिका निभाकर नर्गिस ने अपने सशक्त अभिनय का परिचय दिया था।

नर्गिस को कला परंपरा में मिली थी और उनकी मां जद्दनबाई हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत में एक प्रसिद्ध नाम थी। नर्गिस को फिल्मों में लाने में उनकी मां की भूमिका उल्लेखनीय रही। तलाश.ए.हक उनकी पहली फिल्म थी जिसमें उन्होंने सिर्फ छह साल की उम्र में ही अभिनय किया था। उनका मूल नाम फातिमा राशिद था लेकिन इस फिल्म में उनका नाम बेबी नर्गिस था। बाद के फिल्मी सफर में नर्गिस ही उनका नाम हो गया।

उनके फिल्मी सफर को 1940 के दशक में पहचान मिली और 1950 के दशक में उन्होंने अभिनय की नई बुलंदियों को छुआ। 1957 में प्रदर्शित महबूब खान की फिल्म मदर इंडिया उनकी सर्वाधिक चर्चित फिल्मों में रही। इस फिल्म को आस्कर के लिए नामित किया गया था। इस दौरान उन्होंने कई स्थापित कलाकारों के साथ काम किया। उनके सहकलाकारों में राजकुमार, दिलीप कुमार, मोतीलाल, राजकुमार, बलराज साहनी जैसे कलाकार शामिल थे। बाल कलाकार के रूप में अपने फिल्मी सफर की शुरुआत करने वाली नर्गिस ने दर्जनों कामयाब फिल्मों में काम किया हालंाकि राजकपूर के साथ उनकी जोड़ी विशेष रूप से सराही गई। इस जोड़ी की कई फिल्में बेहद कामयाब रहीं। ऐसी फिल्मों में बरसात, अंदाज, आवारा, आह, श्री 420, चोरी चोरी, जागते रहो आदि शामिल हैं।

एक जून 1929 को पैदा हुइ नर्गिस ने अपने फिल्मी सफर में विभिन्न प्रकार की भूमिकाएं की लेकिन मदर इंडिया विशेष चर्चित हुई। इस फिल्म में उनकी भूमिका को आज भी याद किया जाता है। इस फिल्म को देश के अलावा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी सराहना मिली और कई पुरस्कार मिले। बाद में नर्गिस ने सुनील दत्त के साथ शादी कर ली जो मदर इंडिया में उनके सह-कलाकार थे। शादी के बाद वह फिल्म से लगभग अलग हो गर्ई। बाद में उन्होंने रात और दिन में काम किया। इस फिल्म में उनके अभिनय की बेहद तारीफ हुई और उन्हें इसके लिए पुरस्कृत किया गया।

शादी के बाद उन्होंने अपने पति के साथ अजंता आर्ट्स कल्चरल ट्रूप की स्थापना की। यह दल सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात सैनिकों के लिए स्टेज शो करता था। इस दल में उन्होंने अपने समय के कई कलाकारों और गायकों को भी शामिल किया था। नर्गिस को पद्मश्री और उर्वशी सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले। इनमें फिल्मफेयर पुरस्कार के अलावा फिल्म रात और दिन के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनय का राष्ट्रीय पुरस्कार शामिल है। विभिन्न सामाजिक कार्याें के अलावा नर्गिस स्पास्टिक सोसाइटी आफ इंडिया से भी जुड़ी रहीं। उन्हें बाद में राज्यसभा के लिए भी मनोनीत किया गया। लेकिन किस्मत को यह मंजूर नहीं था कि वह सांसद के रूप में अपना कार्यकाल पूरा करें। उन दिनों वह बीमार रहने लगीं और तीन मई 1981 को कैंसर के कारण उनका निधन हो गया।

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें