गुरुवार, 6 मई 2010

स्कोरिंग सब्जेक्ट है इकोनॉमिक्स


आईएएस बनने का ख्वाब बहुत सारे युवा देखते हैं, लेकिन इसमें सफल होने के लिए तीन तरह की परीक्षाएं होती हैं और जो तीनों परीक्षाओं में सफल होते हैं, उन्हें ही अंतिम रूप से चयन किया जाता है। यही कारण है कि यह परीक्षा काफी कठिन मानी जाती है। इस परीक्षा में सफल होने के लिए कठिन मेहनत के अलावा सही विषय का चयन भी महत्वपूर्ण होता है। यदि आपने अपनी रुचि के अनुरूप स्कोरिंग विषय का चयन किया है, तो औरों के मुकाबले सफलता के चांसेज बढ जाते हैं।

प्रारंभिक परीक्षा में इन दिनों वैकल्पिक विषयों के रूप में इकोनॉमिक्स काफी स्टूडेंट्स ले रहे हैं। यदि आपने भी इकोनॉमिक्स विषय लिया है, तो इसकी तैयारी के लिए एक अलग स्ट्रेटेजी बनाएं। अगर इस विषय की पॉपुलरिटी की बात करें, तो अर्थशास्त्र से ग्रेजुएट की डिग्री लेने वाले स्टूडेंट्स के अलावा, मैनेजमेंट बैकग्राउंड के स्टूडेंट्स का भी यह पसंदीदा ऑप्शनल विषय है। मुख्य परीक्षा में यह स्कोरिंग विषय भी माना जाता है। इसके अलावा जीएस में भी लगभग सौ प्रश्न इकोनॉमिक्स से आते हैं। यही कारण है कि इकोनॉमिक्स का क्रेज सिविल सेवा की परीक्षा में बढता ही जा रहा है।

सिलेबस स्कैन

प्रारंभिक परीक्षा में इकोनॉमिक्स के सिलेबस को दो भागों में बांटा जा सकता है। पहले भाग में थ्योरी ऑफ इकोनॉमिक्स है। इसके अंतर्गत माइक्रो इकोनॉमिक्स, मनी, बैंकिंग ऐंड पब्लिक फाइनेंस, इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स, प्लानिंग ऐंड डेवलपमेंट और इकोनॉमिक स्टैटिस्टिक्स शामिल हैं। दूसरे सेक्शन में भारतीय अर्थव्यवस्था, जिसके अंतर्गत भारत की आर्थिक नीति, विश्व की अर्थव्यवस्था का भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव आदि हैं। इस विषय पर पकड बनाने के लिए जरूरी है कि आप दोनों सेक्शन पर विशेष ध्यान दें।

कैसे बनाएं स्ट्रेटेजी

सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा में किसी भी चैप्टर से प्रश्न पूछे जा सकते हैं। इस कारण सेलेक्टिव अप्रोच अपनाने से बचें। इस तरह की रणनीति तभी कारगर हो सकती है, जब आप एक बार सिलेबस का गहन अध्ययन कर चुके हैं। परीक्षा में पूछे जा रहे प्रश्नों के ट्रेंड की बात करें, तो एक अनुमान के मुताबिक, इंडियन इकोनॉमिक्स और माइक्रो इकोनॉमिक्स से लगभग 50 प्रतिशत से अधिक प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनमें इंडियन इकोनॉमिक्स से 25-30 प्रश्न और माइक्रो इकोनॉमिक्स से 20-25 प्रश्न पूछे जाते हैं। इसके अलावा, स्टैटिस्टिक्स से हर वर्ष करीब पांच प्रश्न पूछे जाते हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था में ज्यादातर प्रश्न सीधे व सरल होते हैं। कहने का आशय यह है कि यदि ढंग से पढाई करते हैं, तो आप इस विषय में अच्छा स्कोर कर सकते हैं।

रहें अपडेट

यह एक ऐसा विषय होता है कि जिसमें रोज कुछ न कुछ बदलाव होते रहते हैं। इसमें बेहतर करने के लिए जरूरी है कि रोजमर्रा के आर्थिक बदलाव से अपडेट रहें और उसी के अनुरूप अपनी तैयारी को अंतिम रूप दें। अर्थशास्त्र के इंडियन इकोनॉमिक्स सेक्शन में लेटेस्ट इकोनॉमिक सर्वे, बजट में प्रोविजन्स, आरबीआई की मॉनिटरी, क्रेडिट पॉलिसी, सरकार की नई आर्थिक नीति, ग्लोबल इकोनॉमिक के बदलते परिदृश्य आदि से प्रश्न पूछे जा सकते हैं। इसमें थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों तरह के प्रश्न पूछे जाते हैं। आपके लिए बेहतर होगा कि आप सभी तरह के प्रश्नों पर ध्यान दें।

ट्रेंड से रहें अवगत

सिविल सेवा परीक्षा में सभी विषयों में कुछ न कुछ बदलाव हर वर्ष होते रहते हैं। आपके लिए बेहतर होगा कि आप बदलते ट्रेंड से अवगत रहें। इसके लिए पिछले वर्षो के प्रश्नों को देखें और और उसी के अनुरूप तैयारी करें, तो बेहतर मा‌र्क्स ला सकते हैं। पिछले कुछ वर्षो से माइक्रो इकोनॉमिक्स में फिगर बेस्ड प्रश्न पूछे जा रहे हैं। इस तरह के प्रश्नों में आप बेहतर तभी कर सकते हैं, जब अधिक से अधिक अभ्यास करें। इसके अलावा तैयारी के दौरान फैक्ट्स का रिवाइज करना जरूरी होता है।

विश्लेषण जरूरी

आजकल विभिन्न देशों के संबंध भी इकोनॉमिक बेस्ड हो गए हैं। इस कारण इस विषय में बेहतर करने के लिए विश्लेषण क्षमता का ज्ञान जरूरी है। क्योंकि कुछ प्रश्न इसी को आधार बनाकर पूछे जाते हैं। उदाहरण के लिए आर्थिक नीति के संदर्भ में लिए गए निर्णयों से भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका क्या प्रभाव पडेगा? इस तरह के प्रश्नों का विश्लेषणात्मक अध्ययन नहीं करने से सही उत्तर देने में परेशानी हो सकती है। इसके साथ ही, विश्व की अर्थव्यवस्था में आए प्रमुख बदलाव का भी विश्लेषण करने की क्षमता विकसित करें।

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