सोमवार, 25 अक्तूबर 2010

घर में क्यों लगाएं हंसते हुए बुद्धा की मूर्ति?

जीवन में उतार-चढ़ाव तो आते ही रहते है।शांति, समृद्धि आज के मानव की पहली प्राथमिकता है। बुद्धा की मुर्ति सुख का पर्याय मानी जाती है। इस मुर्ति को मुख्यत: घर के मुख्य द्वार के सामने रखी जाती है इसके अलावा लॉबी या बैठक कक्ष में रखी जा सकती है। मूर्ति का मुंह हमेशा मुख्य द्वार के सम्मुख होना चाहिए।

अगर स्थापित करना मुश्किल हो तो टेबल, शाेकेस आदि के ऊपर इसे इस प्रकार स्थापित करें कि यह घर में प्रवेश करते समय दिखाई दे। यह सकारात्मक उर्जा का प्रतीक होता है। उसका हंसता हुआ चेहरा उर्जा को अधिक क्रियाशील व गतीशील बनाता है। इससे पूरे घर में सकारात्मक उर्जा का प्रवाह होता है।
इस मूर्ति को शयन कक्ष, रसोई घर, बाथरुम और शौचघर आदि स्थान नहीं रखा जाता। हंसते हुए बुद्धा के विषय में मान्यता है कि इसे खरीदना नहीं चाहिए, उपहार में ही मिले तो ही अच्छा है लेकिन यह धारणा सही नहीं है।

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