बुधवार, 27 अक्तूबर 2010

शाम के समय क्यों नहीं सोना चाहिए?

आदमी का शरीर चौबीसों घण्टे मशीन की तरह काम करता है। जाहिर सी बात कि उसे भी आराम चाहिए होता है। तभी तो कई बार दिन में लोग कुछ देर के लिए आराम करते हैं।
कई लोग समय की कमी के कारण शाम के वक्त आराम करते हैं। यहां आराम करने से हमारा मतलब है-सोने से।
पर शाम को सोना शास्त्रों की दृष्टि से अनुचित माना जाता है।
क्या कारण है कि शाम को सोना वर्जित माना जाता है?
वैसे देखा जाए तो सोने के रात्रि को ही श्रेष्ठ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार तो दिन भी नहीं सोना चाहिए। दिन में सोने से आयु घटती है, शरीर पर अनावश्यक चर्बी बढ़ती है, आलस्य बढ़ता है आदि।
इसलिए दिन में सोना प्रतिबन्धित है। सिर्फ वृद्ध, बालक एवं रोगियों के मामले में यहां स्वीकृति है।
इस प्रकार जब शास्त्रों में दिन में सोने पर पाबंदी है तो शाम का समय तो वैसे भी संध्या-आचमन का होता है। शाम का समय देवताओं की आराधना एवं संध्या का होता है।
इस समय सोने से शरीर में शिथिलता आती है और नकारात्मक विचारों का आगमन होता है। इस समय तो पूरे भक्तिभाव से भगवान की पूजा-अर्चना एवं संध्या करनी चाहिए।
शाम को सोने के साथ ही खाना खाना, पढ़ाई करना एवं मैथुन कर्म करना भी वर्जित है। कहते हैं इन कर्मों को शाम को करने से आयु तो घटती ही है, साथ ही यश, लक्ष्मी, विद्या आदि सभी का नाश हो जाता है।
इसलिए शाम को सोना शास्त्रोक्त विधान के अनुसार अनुचित माना गया है।

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