मंगलवार, 26 अक्तूबर 2010

बेहतर पढ़ाई का तरीका

भई, हर कोई तो पढ़ाई में नंबर वन नहीं हो सकता। जिसका दिमाग पढ़ाई में नहीं लगता, उसका दिमाग कहीं और चलता है- खेल में, गाने-बजाने या नौटंकी में। अल्बर्ट आइंस्टीन और मोहनदास भी मामूली छात्र ही थे। बड़े होकर दोनों ही अपनी शताब्दी के सबसे अधिक बुद्धिमान माने गए।
अल्बर्ट ने थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी दी तो मोहनदास गाँधी अहिंसा के चैंपियन बने। पढ़ाई एक तरीका है लेकिन समझदार बनने की गारंटी इसमें नहीं है। परीक्षा में ऊँचे अंक लाना तब तक किसी काम का नहीं, जब तक तुम एक अच्छे इंसान नहीं बनते।
जिसका दिमाग पढ़ाई में नहीं लगता, उसका दिमाग कहीं और चलता है- खेल में, गाने-बजाने या नौटंकी में। अल्बर्ट आइंस्टीन और मोहनदास भी मामूली छात्र ही थे। बड़े होकर दोनों ही अपनी शताब्दी के सबसे अधिक बुद्धिमान माने गए।
बायो में 99 मार्क लाओ और आगे जाकर एक स्वार्थी डॉक्टर बनो तो वह पढ़ाई दूसरों के किसी काम की नहीं। बात समझ में आ गई हो तो अगले वर्ष अच्छे अंक लाओ और कक्षा-कॉलोनी में सबके चहेते भी बनो।

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