शुक्रवार, 26 नवंबर 2010

नहाकर ही क्यों जाते हैं मंदिर?

जब भी हम किसी मुसीबत में फंस जाते हैं तब अवश्य ही सभी को भगवान याद आते हैं। ऐसे में ईश्वर की भक्ति के लिए मंदिर जाते हैं। सामान्यत: यह बात सभी जानते हैं कि बिना नहाए मंदिर नहीं जाना चाहिए लेकिन ऐसा क्यों अनिवार्य किया गया है?
नहाकर ही मंदिर जाना चाहिए, इस संबंध में शास्त्रों में बताया गया है तन और मन से पूरी तरह पवित्र होकर ही भगवान (मंदिर में) के सामने जाना चाहिए। मन की सफाई के लिए तो हमें बुरे विचारों और दुर्भावनाओं को त्यागना होता है। वहीं तन की सफाई के लिए नहाना आवश्यक है।
शास्त्रों के अनुसार भगवान के पास जाने से पहले हमें आंतरिक और बाहरी शुद्धता का पूर्ण ध्यान रखना चाहिए। बाहरी शुद्धता तो नहाने से हो जाती है, परंतु आंतरिक शुद्धता के लिए हमें लोभ, काम, मद, मोह जैसी बुराइयों को छोडना चाहिए।
मंदिर का वातावरण होता है प्रदूषित...
सभी जानते हैं यदि हम रोज नहीं नहाते तो हमारे शरीर से दुर्गंध आने लगती है। ऐसे में जो भी व्यक्ति संपर्क में आता है वह हमारे साथ खुद को बहुत असहज महसूस करता है। ऐसे में बिना नहाए मंदिर जाने से शरीर की दुर्गंध भी मंदिर में फैलती है। जिससे वहां आने वाले अन्य श्रद्धालुओं को भगवान का ध्यान करने में परेशानी महसूस होती है। बिना नहाए शरीर के आसपास कई बीमारियों के कीटाणु रहते हैं। जिससे अन्य भक्तों पर बुरा प्रभाव पड़ता है और भगवान का भी अनादर होता है। अत: बिना नहाए कभी मंदिर में प्रवेश नहीं करना चाहिए।

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