शनिवार, 25 जून 2011

कुछ ऐसा था रामजी की शादी के बाद का दृश्य

सभी दूल्हा-दुल्हन एक-दूसरे को देखकर मन ही मन खुश हो रहे हैं। सभी लोग उनकी सुंदरता की सराहना कर रहे हैं। जोडिय़ां कितनी सुंदर लग रही हैं। आपस में वहां उपस्थित लोग ऐसी चर्चा कर रहे हैं। अपने सभी पुत्रों को बहुओं के साथ देखकर दशरथजी बहुत खुश हो रहे हैं। जब सभी राजकुमारों का विधि-विधान से विवाह हो गया। तब पूरा दहेज व मंडप दहेज से भर गया।
बहुत से कंबल, वस्त्र व रेशमी कपड़े दास-दासियां हाथी, घोड़े, अनेक वस्तुएं हैं जिनकी गिनती नहीं की जा सकती।दशरथजी ने सारा दहेज याचको को, जो जिसे जो अच्छा लगा उसे दे दिया। जनकजी ने हाथ जोड़कर दशरथजी से कहा आपके साथ संबंध हो जाने से अब हम सभी प्रकार से बड़े हो गए। उन्होंने दशरथजी से कहा आप हमें अपना सेवक ही समझिएगा। इन लड़कियों से कोई भी भूल हो तो इन्हें क्षमा कर दीजिएगा। रामचंद्रजी का सांवला शरीर है वे पीले रंग कि धोती पहनकर व पीली जनेऊं उन पर बहुत सुंदर लग रही है।
उनके हाथ की अंगुठी और ब्याह के सारे साज जो उन पर सजे हैं उनकी शोभा को और बड़ा रहे हैं।उनके ललाट पर तिलक बहुत सुंदर लग रहा है। पार्वतीजी रामजी को लहकौर यानी वर-वधु को एक-दूसरे को ग्रास देना सिखाती हैं व सीताजी को सरस्वतीजी सिखा रही हैं। रानिवास में सभी लोग आनंद में डूबे हुए हैं। उसके बाद वर-वधु को जनवासे ले जाया गया। नगर में हर और आनंद छाया हुआ है। सभी नगरवासी भी यही चाहते हैं कि सभी जोडिय़ा सुखी और चिरंजीवी हों।

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