सोमवार, 13 जून 2011

...जाने भगवान कब, किस रूप में आ जाए!

इंसान की जिंदगी में कई ऐसे अवसर आते हैं जिसकी वह तलाश में रहता है। लेकिन कई बार वह इसे पहचान नहीं पाता। उसकी यही गलतियां उसे आगे जाकर पछताने पर मजबूर कर देती है। जीवन में अगर कोई अच्छा अवसर मिले तो उसका लाभ उठाना चाहिए। नहीं तो आगे जाकर पछताना पड़ता है।
किसी गांव में हरिया नाम का एक आदमी रहता था। वह भगवान पर बहुत श्रद्धा रखता था। वह रोज भगवान की पूजा करता। वह भगवान भक्ति में इतना डूब गया कि अंधविश्वासी हो गया। वह हर बात को भगवान से जोड़कर ही देखता। एक दिन गांव में बाढ़ आ गई। सब गांव वाले जान बचाकर भागने लगे लेकिन हरिया नहीं भागा। तभी हरिया के पास गांव का ही एक आदमी आया और बोला कि बाढ़ का पानी गांव को डुबा दे इसके पहले यहां से भाग चलो। लेकिन हरिया तो भगवान की भक्ति में अंधविश्वासी हो गया था। उसने कहा जब भगवान मुझे बचाने नहीं आएंगे मैं नहीं जाऊंगा। वह व्यक्ति चला गया। धीरे-धीरे गांव में पानी भराने लगा। हरिया घर की छत पर चढ़ गया। फिर उसके पास गांव का दूसरा आदमी आया और वहां से चलने को कहा। हरिया ने फिर वही जबाव दिया।
थोड़ी देर में बाढ़ के पानी ने पूरे गांव को डुबा दिया। हरिया एक बड़े पेड़ पर चढ़ गया। सब दूर पानी ही पानी हो गया। तभी नाव में बैठकर एक और गांव वाला हरिया को बचाने आया। हरिया ने उसे भी मना कर दिया। बाढ़ का पानी बढऩे से हरिया उसमें डूब कर मर गया। जब हरिया भगवान के पास पहुंचा तो गुस्से में बोला कि मैंने आपकी बहुत सेवा की और आप मुझे बचाने नहीं आए। भगवान मुस्कुराए और बोले- अरे मूर्ख। मैं एक नहीं तीन बार तुझे बचाने आया था लेकिन तुने मुझे पहचाना ही नहीं।
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