गुरुवार, 16 जून 2011

कलियुग में यहां आने वाले के खत्म हो जाएंगे सारे पाप

तीर्थराज पुष्कर के बारे में बताने के बाद पुलस्त्यजी ने प्रयाग की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि प्रयाग में ब्रह्मा आदि देवता दिशाएं, दिक्पाल, लोकपाल साध्यपितर, सन्तकुमार आदि परमर्षि, अप्सरा, सुपर्ण आदि सभी रहते हैं। ब्रह्मा के साथ स्वयं विष्णुभगवान भी वहां निवास करते हैं। प्रयाग क्षेत्र में अग्रि के तीन कुंड है। उनके बीचों-बीच से श्री गंगाजी प्रवाहित होती है। तीर्थशिरोमणि सूर्यपुत्री यमुनाजी भी आती है। वहीं यमुनाजी का गंगाजी के साथ संगम हो रहा है।
गंगा और यमुना के बीच के भाग को पृथ्वी की जांघ समझना चाहिए। यहां बड़े-बड़े राजा यज्ञ करते हैं इसी से यह भूमि पवित्र हुई है। ऋषिलोग कहते हैं कि प्रयाग के नाम को याद करने से और वहंा कि मिट्टी स्पर्श करने से सारे पाप मुक्त हो जाते हैं। यह देवताओं की यज्ञ भूमि यहां स्नान करने से अश्चमेघ यज्ञ का फल प्राप्त होता है। चार प्रकार कीविद्याओं के अध्ययन का व सच बोलने का जो पुण्य होता है। वहां देवनदी गंगा भी है इसीलिए यहां आने वाले के सैकड़ों पाप नष्ट हो जाते हैं। सतयुग में सभी तीर्थ पुण्यदायक होते हैं। त्रेता में पुष्कर और द्वापर में कुरूक्षेत्र की विशेष महिमा है। कलियुग में तो एकमात्र गंगा का ही सबसे ज्यादा महत्व है। गंगाजी नामोच्चारण मात्र से पापों को धो बहाती है। दर्शनमात्र से क ल्याण करती है। स्नान और पान से सात पिढिय़ां तक पवित्र हो जाती है। जब तक मनुष्य की हड्डिया गंगा के जल में रहती हैं तो उसे स्वर्ग जैसा सम्मन मिलता है। इसीलिए कलियुग मे इस तीर्थ का विशेष महत्व रहेगा।

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें