शनिवार, 18 जून 2011

मेंहदी लगाने के बाद दूल्हा या दुल्हन को अकेला क्यों नहीं छोड़ा जाता?

दूल्हा हो या दुल्हन हिन्दू परंपरा के अनुसार शादी में दोनों को मेंहदी लगाई जाती है। दरअसल मेंहदी सोलह श्रृंगारों में से एक है। यह ना केवल सौंन्दर्य बढ़ाती है बल्कि इसके लगाने के पीछे तथ्य यह है कि मेंहदी की तासीर ठण्डी होती है और हाथों में मेंहदी लगाए जाने का उद्देश्य अपने धैर्य और शांति को बनाए रखने का प्रतीक माना जा सकता है। आज मेंहदी का प्रयोग ना केवल हाथों में होता है बल्कि पैरों में भी शौक के रूप में इसे लगाया जाता है जो एक अच्छा संकेत है।
लेकिन हमारे यहां मेंहदी लगाने के बाद एक परंपरा का पालन आवश्यक रूप से किया जाता है। वह यह कि मेंहदी लगाने के बाद दूल्हा या दुल्हन को बाहर नहीं निकलने दिया जाता है। इसे सरबाला या सरबाली की रस्म कहा जाता है। इसके अलावा मेंहदी लग जाने के बाद से ही तुरंत वर और वधू दोनों के ही साथ उनके निकटतम मित्र और सखी या फिर कोई समान आयु का निकटतम रिश्तेदार निरंतर साथ बना रहने का उल्लेख शास्त्रों में किया गया है।
ऐसा पहले भी किया जाता था कि सरबाला-सरबाली (रिश्तेदार या मित्र जो साथ रहता है) होते थे और आज भी यह प्रथा जारी है। इसके पीछे भी कोई रूढि़ या दकियानूसी धारणा नहीं है बल्कि ऐसा इसलिए किया जाता है कि यदि कोई नकारात्मक शक्ति उस समय वहां है तो वह शक्ति संशय में रहे और वास्तविक वर-वधू को किसी भी नकारात्मक प्रभाव से बचाया जा सके।

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