शुक्रवार, 26 जुलाई 2013

रायपुर और बिलासपुर में ठन गई


राजधानी रायपुर में हाईकोर्ट की खंडपीठ स्थापित करने को लेकर रायपुर बार एसोसिएशन और बिलासपुर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन आमने-सामने आ गए हैं। रायपुर बार एसोसिएशन राजधानी में हाईकोर्ट खंडपीठ की मांग कर रहा है। जबकि, बिलासपुर बार किसी भी कीमत पर हाईकोर्ट का बंटवारा नहीं चाहता। हाईकोर्ट की हाल में हुई फुल कोर्ट ने अपने एजेंडे 7-8 में हाईकोर्ट खंडपीठ का मुद्दा रखा था। इसमें रायपुर में खंडपीठ के मुद्दे पर चर्चा हुई थी। इससे खंडपीठ का मामला एक बार फिर गरमा गया है। रायपुर बार एसोसिएशन का कहना है कि 1980 के लॉ कमीशन की सिफारिश है कि हर रा\'य की राजधानी में हाईकोर्ट या उसकी खंडपीठ होनी चाहिए। इस स्थिति में रायपुर में खंडपीठ की मांग जायज है। खंडपीठ के मुद्दे को लेकर रायपुर बार एसोसिएशन की शुक्रवार को दोपहर २ बजे मीटिंग है। इसके बाद पदाधिकारी रा\'यपाल से मिलेंगे। फुल कोर्ट में हुई चर्चा को लेकर हाईकोर्ट भी जाएंगे।
छत्तीसगढ़ बनने के बाद रा\'य के दो प्रमुख शहरों को अलग-अलग महत्व मिला। रायपुर को रा\'य की राजधानी बनाई गई, जबकि बिलासपुर में हाईकोर्ट की स्थापना हुई। रा\'य निर्माण के बाद हाईकोर्ट में मामलों की संख्या बढऩे लगी है। रा\'य के दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को मामलों की सुनवाई व अन्य जरूरतों के लिए बिलासपुर जाना पड़ता है। काफी समय से रायपुर में हाईकोर्ट की खंडपीठ की मांग की जा रही है। रायपुर बार एसोसिएशन का कहना है कि रायपुर से बिलासपुर की दूरी करीब 125 किलोमीटर है। शासन-प्रशासन के अधिकारियों को मामलों की सुनवाई के लिए बार-बार बिलासपुर जाना पड़ता है। इसमें ही रा\'य सरकार के हर साल करीब एक अरब रुपए खर्च हो जाते हैं। दूसरा, मामलों की सुनवाई में अनावश्यक विलंब होता है।
सुनाई के दौरान दूसरे सत्र में यदि न्यायालय मामलों से संबंधित किसी दस्तावेज आदि की मांग करता है तो सरकार के पास तारीख मांगने के अलावा कोई रास्ता नहीं होता। ऐसी हालत में केस फिर अगली तारीख के लिए एक-दो महीना टल जाता है। ऐसे कई मामलों में हो सकते हैं। इससे सरकार का अनावश्यक खर्च होता है। बस्तर संभाग के लोगों के लिए बिलासपुर की अपेक्षा रायपुर अधिक सरल व सुगम होगा। इस समय हाईकोर्ट में 50 हजार मामले हैं।

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें