बुधवार, 5 मई 2010

'मूर्खता के निशान'



दोस्तो, कुछ ऐसी बातें होती हैं जिसके पीछे कोई न कोई राज छुपा होता है। जैसे सूरज पूरब से ही क्यों उगता है। तारे रात में ही क्यों निकलते हैं और मछलियाँ उड़ती क्यों नहीं। इसी तरह की बातें किस तरफ बनीं। कुछ बातों में सच्चाई होती है कुछ हमने अपने मन को समझाने के लिए ढूँढ ली होती, तो आइए ऐसी ही कुछ कहानियों का सिलसिला इस अंक से शुरु करते हैं। 'गप और सच वाली कहानी' नाम से। हर अंक में यह पेज आपकी कहानियों में इजाफा करेगा। पहली कहानी 'मूर्खता के निशान'। यह कहानी वियतनाम में सुनाई जाती है।
एक बार एक शेर अपनी गुफा से बाहर घूमने के लिए निकला और कुछ दूर आने के बाद उसने देखा कि एक किसान खेत जोत रहा है। किसान के हल में एक हृष्ट पुष्ट बैल जुता हुआ है। ताकतवर बैल किसान का हर इशारा मान रहा है। यह देखकर शेर को बड़ा ताज्जुब हुआ।
दोपहर तक जुताई करने के बाद जब किसान घर गया तो शेर खेत में जा पहुँचा। बैल उसे देखकर लड़ाई को तैयार हो गया पर शेर ने कहा- डरो मत भाई मैं लड़ने नहीं कुछ पूछने आया हूँ। दोस्त तुम इतने ताकतवर होकर भी उस किसान की बात क्यों मानते हो?
बैल बोला कि मैं दिन भर उसके लिए काम करता हूँ और इसके बदले में वह मुझे भोजन देता है और मेरी रक्षा करता है। और सबसे बड़ी बात तो यह है कि उसके पास बुद्धि है, इसलिए मैं उसका कहना मानता हूँ और जिसके पास बुद्धि होती है उसे कोई भी नहीं हरा सकता है।
शेर का माथा ठनका और वह बोला यह बुद्धि क्या होती है। बैल बोला- भई वह तो मुझे नहीं पता। शेर असमंजस में पड़ गया। उसने सोचा कि मैं सबसे ताकतवर जानवर हूँ। मेरे शरीर का सुंदर रंग देखो। क्या कोई और मुझसे भी अच्छा हो सकता है। इतना होने के साथ ही अगर मेरे पास बुद्धि भी आ जाए तो मुझे कोई नहीं हरा पाएगा।
थोड़ी देर बाद जब किसान खाना खाकर वापस लौटा तो शेर कूदकर उसके सामने जा खड़ा हुआ। किसान पहले तो डरा पर शेर ने कहा- किसान भाई मुझे तुमसे कुछ पूछना है। किसान की हिम्मत बँधी और उसने कहा- पूछो फिर मुझे बहुत सा काम भी करना है। शेर बोला- मैंने सुना है तुम्हारे पास बुद्धि है। थोड़ी बुद्धि मुझे भी चाहिए। किसान ने कहा- अरे भाई इतनी सी बात। तुम्हें पहले बताना चाहिए था। जब मैं खाना खाने घर गया था तो बुद्धि वहीं रख आया था। अब तो मुझे वापस घर जाना होगा। शेर ने कहा- तो जल्दी जाओ मैं यहीं तुम्हारा इंतजार करूँगा।


किसान ने पलट जवाब दिया पर मुझे तुम पर भरोसा नहीं है। मैं घर गया और तुम मेरे पीछे मेरे बैल को खा गए तो? शेर ने कहा- मेरा विश्वास करो। पर किसान नहीं माना। उसने कहा- ऐसा ही है तो मैं तुम्हें रस्सी से बाँधकर घर जा सकता हूँ। शेर तुरंत राजी हो गया। किसान ने मोटी रस्सी से शेर को खेत में लगे एक पेड़ से बाँध दिया। इसके बाद किसान अपने काम में लग गया। शेर को हैरत हुई। उसने दहाड़कर कहा कि क्या करते हो। अब घर क्यों नहीं जाते।
किसान ने बात अनसुनी कर दी और खेत में जुताई करता रहा। शेर शाम तक दहाड़ता रहा पर किसान मजे से खेत की जुताई में लगा रहा। शाम को किसान ने बैल और हल लिया और घर की ओर जाने लगा। तब शेर ने कहा- मुझे तो छोड़ दो। किसान बिना बात सुने एक सोंटा उठाया और शेर को खूब टिकाए। शेर के शरीर पर जहाँ-तहाँ सोंटे के निशान पड़ गए।
शेर बोला- मैंने सुना है तुम्हारे पास बुद्धि है। थोड़ी बुद्धि मुझे भी चाहिए। किसान ने कहा- अरे भाई इतनी सी बात। तुम्हें पहले बताना चाहिए था। जब मैं खाना खाने घर गया था तो बुद्धि वहीं रख आया था। अब तो मुझे वापस घर जाना होगा।
उसकी अच्छी तरह खबर लेने के बाद किसान घर को चला गया। किसान के हाथों की पिटाई ने शेर के शरीर में सूजन ला दी थी। बेचारा बँधे-बँधे रात भर रस्सी से रगड़ाता रहा और छूटने की कोशिश करता रहा। आखिरकर भोर में जब सूरज निकलने से पहले का झुटपुटा था। शेर ने पूरी ताकत लगाई और झटके से रस्सी तोड़ दी।

पूरा दिन और रातभर रस्सी से बँधे रहने के कारण उसका पूरा शरीर ऐंठ गया था और वह बहुत थक भी गया था। उसके सुनहरे शरीर पर रस्सी और मार के निशान भी पड़ गए थे। शेर ने वे निशान छुड़ाने की बहुत कोशिश की पर उन्हें छूटा नहीं पाया। तो आप शेर के शरीर पर जो काली धारियाँ देखते हैं उसके पीछे यह कहानी है। आज भी शेर के शरीर पर ये धारियाँ देखी जा सकती हैं जो बताती है कि अभी भी उसमें अक्ल नहीं आई है।

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