शुक्रवार, 29 अक्तूबर 2010

भूतों की दीपावली!

पानी में स्थाई रूप में धुंधला प्रकाश पसंद करती हैं। तट के निकट गहरा अंधेरा नहीं होता क्योंकि वहां तल तक सूर्य की रोशनी पहुंचती रहती है। इसीलिए तट के निकटवर्ती तल में ऐसे जीव •यादा पाए जाते हैं, जो तैरने के बजाय बैठे रहना अधिक पसंद करते हैं।
कुछ विशेष समुद्री पुष्प, दरारों में छिपे रहते हैं, ताकि उन पर सूर्य का प्रकाश सीधा न पड़े। इस तरह से ये सूख नहीं पाते और अपनी नमी बनाए रखते हैं। अन्य प्रजातियां समूह के रूप में एकत्र रहती हैं, जिससे इनका खोल और कचरा आदि इनके शरीर पर चिपका रहे और नमी ग्रहण करता रहे। ऐसे समूह घंटों सूर्य के संपर्क में रहने पर भी जीवित बने रहते हैं।

फिर भी अन्य जीवों के खोल कड़े और रक्षा करने वाले होते हैं, और बाहर आने के दौरान इनकी अच्छी तरह से रक्षा करते हैं। कुछ कीचड़ वाले क्षेत्र भी होते हैं, जहां तुलनात्मक रूप से कम जीव रहते हैं। सिर्फ घोंघा और सूक्ष्म पौधे ही यहां पाए जाते हैं।
अधिकतर समुद्री जीव-जंतु खारे पानी में रहने के अभ्यस्त होते हैं और तापमान की अधिकता और यांत्रिक प्रघात का सामना कर सकते हैं। कई जीव इन प्रघातों से बचने और अपने-आपको बह जाने से बचाने के लिए चट्टानों से कसकर चिपक जाते हैं। समुद्री शैवाल बहुत कठोर होता है योंकि यह सिर्फ उथले पानी में ही पाया जाता है, जहां लहरें इधर-उधर होती रहती हैं।
यही कारण है कि भूमि की तुलना में समुद्र में पौधों की कम किस्में पाई जाती हैं क्योंकि दु:साध्य समुद्र में •यादा किस्में जीवित नहीं रह वे प्राणी जो अपने आपको बदल नहीं सकते, सबसे अच्छा तरीका अपनाते हैं। वे अपना घर ही बदल लेते हैं।
वे ऐसे स्थानों पर चले जाते हैं, जहां तापमान, प्रकाश, खारापन और लहरों इत्यादि में •यादा परिवर्तन नहीं होता। वैज्ञानिक इन्हें जीव-संकेतक कहते हैं, योंकि इनकी उपस्थिति से यह पता चल जाता है कि उस क्षेत्र विशेष में ये लक्षण मौज़ूद होंगे।
नीचे गहराई में लहरें असर नहीं करतीं और पानी शांत रहता है। यहां, समुद्र तल ऐसे जीवों से भरा रहता है, जो उन छोटे जीवों को आहार बनाते हैं जो सतह से सरककर नीचे आ जाते हैं। इनमें से कुछ तो अपने पैरों पर रेंगते रहते हैं और कुछ समुद्र तल पर स्थाई रूप से चिपके रहते हैं। समुद्री लहरों के बीच ज़िन्दा रहने के लिए तुम्हें कितनी अल दौड़ानी पड़ेगी! तुम्हें धरती पर रहने को मिला, यह तुम्हारा सौभाग्य ही है न! - डॉ.सेवा नंदवाल इंदौर, मध्यप्रदेश

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