सोमवार, 25 अक्तूबर 2010

यहां भगवान पीते हैं शराब

भगवान की महिमा अपरम्पार है। उनके बारे में इतनी बातें प्रचालित हैं कि साधारणत: लोगों को विश्वास ही नहीं होता खासकर विज्ञान तो ऐसी बातों को सिरे से ही नकार देता है।
पर मामला जब आस्था से जुड़ा होता है तो विश्वास करना ही पड़ता है। ऐसा ही स्थान जहां आस्था विज्ञान पर भारी पड़ती है- उज्जैन स्थित काल भैरव का है।

यहां की विशेषता है कि यहां भगवान यानि काल भैरव शराब पीते हैं और उन्हें बाकायदा शराब का ही प्रसाद चढ़ाया जाता है।
काल भैरव को उज्जैन का क्षेत्रपाल कहा जाता है। यह स्थान भैरवगढ़ के नाम से प्रसिद्ध है। भैरव महाराज का मंदिर एक ऊंचे टीले पर बना हुआ है जिसके चारों ओर परकोटा बना हुआ है।
कहते हैं प्राचीन समय में यहां प्रवेश द्वार के ऊपर चौघडिय़े बजा करते थे। मंदिर में काल भैरव की मूर्ति बहुत भव्य एवं प्रभावोत्पादक है। कहा जाता है कि यह मंदिर राजा भद्रसेन द्वारा निर्मित है।
मंदिर की शोभा देखते ही बनती है। मंदिर पर भैरव अष्टमी को यात्रा होती है जिसमें सवारी भी निकलती है। पुराणों में जिन अष्टभैरव का वर्णन है, उनमें ये प्रमुख हैं।
यहां की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि यहां काल भैरव की प्रतिमा को शराब का प्रसाद चढ़ाया जाता है और बाकायदा मूर्ति शराब पीती भी है। पूरे देश में शराब का खुलेआम विक्रय करना अपराध है पर यहां मंदिर में चढ़ाने के लिए शराब खुले आम बेची जाती है।
कई बार विज्ञान ने इस आश्चर्य पर अविश्वास प्रकट किया पर काफी छान-बीन के बाद अब विज्ञान भी इस चमत्कार को मानने के लिए बाध्य है। अपनी इस विशेषता के कारण आज यह मंदिर विश्व प्रसिद्ध हो गया है।
भगवान का अनूठा चमत्कार देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु यहां आते हैं।
कैसे पहुंचे- भोपाल-अहमदाबाद रेलवे लाइन पर स्थित उज्जैन एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यहां हर गाड़ी रुकती है।
मध्य-प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर से उज्जैन मात्र 60 किलोमीटर दूर है। यह दूरी बसों से आसानी से पूरी की जा सकती है।

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