रविवार, 24 अक्तूबर 2010

जनकपुरी: ऐसा है सीता माता का ननिहाल

रामायण काल को भारतीय इतिहास का स्वर्णिम काल कहा जाता है। कुछ एक अपवादों को छोड़ दिया जाए तो रामायणकालीन युग नि:संदेह सर्वश्रेष्ठ माना जाएगा।

अवध, कैकेय, लंका जैसे देश इस काल के वैभव को व्यक्त करते थे। ऐसा ही एक देश था- मिथिला या जनकपुर।
इसे सीता माता का ननिहाल भी कहा जाता है।
जनकपुर तीर्थ का प्राचीन नाम है मिथिला, तीरभुक्ति, विदेह तथा विदेहनगर।
जनकपुर प्राचीन मिथिला की राजधानी का किला है, जिसके चारों ओर पूर्वक्रम से शिलानाथ, कपिलेश्वर, कूपेश्वर, कल्याणेश्वर, जलेश्वर, क्षीरेश्वर तथा मिथिलेश्वर रक्षक के रूप में रहते हैं।
इन शिवलिंगों के मंदिर अभी भी विद्यमान हैं।
चूंकि मिथिला सीता माता का ननिहाल रहा है, इसलिए यहां का मुख्य मंदिर भी श्रीजानकीमंदिर है। पहले यह मंदिर काफी जीर्ण-शीर्ण अवस्था में था पर सं. 1967 में टीकमगढ़ की स्व. वृषभानु कुंअरिजी ने यहां एक भव्य मंदिर बनवाया जो नौलखा, जानकीमहल अथवा शीशमहल के नाम से विख्यात है।
इसमें अंगरास-सर से उद्धृत सीता, राम और लक्ष्मणजी की मूर्तियां तथा राजर्षि जनक, सुनयना और शतानन्दजी की मूर्तियां भी दर्शनीय हैं। यह मंदिर मिथिला का मुख्य आकर्षण है।
मिथिला में श्रीराममंदिर, जनक-मंदिर, लक्ष्मण-मंदिर, रंगभूमि, रत्नसागर-मंदिर, दशरथ-मंदिर आदि प्रसिद्ध हैं।
मिथिला में अनेक पवित्र सरोवर एवं नदियां हैं जिनमें नहाकर ही श्रद्धालु मंदिर में दर्शन करने जाते हैं।
कैसे पहुंचे- जनकपुर जाने के लिए सीतामढ़ी या दरभंगा से पहुंचा जा सकता है। दोनों जगहों से जनकपुर 50 किलोमीटर दूर है।
बिहार के कई शहरों से जनकपुर के लिए सीधी बस सेवा उपलब्ध है।
(sabhar dainik bhaskar)

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