बुधवार, 15 जून 2011

ग्रहण के बाद जरूर करना चाहिए 'स्नान' क्योंकि...

शास्त्रों के अनुसार ग्रहण करने के बाद स्नान करना बहुत जरूरी माना गया है क्योंकि माना जाता है कि ग्रहण के समय में अंतरिक्षीय प्रदूषण होता है।
अंतरिक्षीय प्रदूषण के इस समय को सूतक काल कहा गया है। इसलिए सूतक काल और ग्रहण के समय में भोजन तथा पेय पदार्थों के सेवन की मनाही की गई है। साथ ही इस समय मंत्र जप व पूजा-पाठ के बाद दान पुण्य आदि करने के बाद भोजन करने का नियम बनाया गया है।
इसलिए ऋषियों ने पात्रों के कुश डालने को कहा है, ताकि सब कीटाणु कुश में एकत्रित हो जाएं और उन्हें ग्रहण के बाद फेंका जा सके। पात्रों में अग्नि डालकर उन्हें पवित्र बनाया जाता है ताकि कीटाणु मर जाएं। ग्रहण के बाद स्नान करने का विधान इसलिए बनाया गया ताकि स्नान के दौरान शरीर के अंदर ऊष्मा का प्रवाह बढ़े, भीतर-बाहर के कीटाणु नष्ट हो जाएं और धुल कर बह जाएं।

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