गुरुवार, 23 जून 2011

नहाते समय गाना नहीं गाना चाहिए क्योंकि...

नहाने से शरीर में एक नई ताजगी व स्फूर्ति आ जाती है। नहाने से शरीर की सफाई तो होती ही है साथ ही आलस, बुरे विचार दूर होते हैं। अधिकतर लोगों की आदत होती है कि वे नहाते समय या तो गाने गाते हैं या मंत्र बोलते हैं या भगवान का नाम लेते हैं। शास्त्रों के अनुसार हमें आंतरिक और बाहरी शुद्धता का पूर्ण ध्यान रखना चाहिए। बाहरी शुद्धता तो नहाने से ही होती है।
कुछ लोग नहाते समय मंत्र जप करते हैं क्योंकि वे सोचते हैं कि ऐसा करने से पापों से मुक्ति मिलती है। वही कई लोग नहाते समय फिल्मी गीत गुनगुनाते हैं। जिस पर अक्सर बढ़े- बूजुर्ग लोग टोकते हैं और कहते हैं कि नहाते समय सिंगिंग नहीं करना चाहिए इससे दोष लगता है। दरअसल ये सिर्फ अंधविश्वास नहीं है। हमारे शास्त्रों के अनुसार भी ऐसी ही मान्यता है। शास्त्रों के अनुसार नहाते समय नहीं बोलना चाहिए और न ही गाना चाहिए।
मान्यता है कि नहाते समय बोलने से वरूण देव जिन्हें जल का देवता माना गया है वे शरीर का तेज छीन लेते हैं। इसका वैज्ञानिक कारण यह है कि स्नान से पहले शरीर पर कई कीटाणु व धूल के कण लगे होते हैं। नहाते समय मंत्र बोलने से मुंह के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। विज्ञान के अनुसार इससे इम्युनिटी पावर कम होता है। इसीलिए नहाते समय मंत्र नहीं बोलना चाहिए।

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