सोमवार, 13 जून 2011

हिन्दू रिवाज

कैसे नारियल से होती है लक्ष्मीजी प्रसन्न?
हिन्दू रिवाज और मान्यताओं के अनुसार श्रीफल यानि नारियल के बिना पूजा अधुरी मानी जाती है क्योंकि श्री फल लक्ष्मी जी का फल माना गया हैं। यह पूर्णता और सुख समृद्धि देने वाला फल है। इसलिए किसी भी शुभ काम या पूजा पाठ करने से पहले श्री फल का उपयोग किया जाता है ताकि किया गया कार्य पूरा हो और उसका सकारात्मक फल भी मिल सके।
धन अर्पित करने की हमारी शक्ति नहीं परंतु प्रतीक रूप से हम भगवान को श्रीफल अर्पित करते हैं। जिससे धन का अहंकार हमारे भीतर से निकल जाए और हम नारियल के भीतर की तरह श्वेत, कोमल और दोषरहित हो जाए। नारियल ऊपर से जितना कठोर होता है अंदर से उतना मुलायम। जिसका स्वाद सभी को अच्छा लगने वाला है।
लेकिन क्या आप जानते है कि बिना मौली का नारियल ऐसा शुभ फल नही देता है। जी हां हिन्दु धर्म के कुछ महत्वपूर्ण ग्रंथ ओर शास्त्रों के अनुसार बिना मौलि का नारियल अपूर्ण माना जाता है। ऐसा नारियल अधूरा फल देने वाला होता ह्रै। क्योंकि पूजा पाठ में मौलि का उपयोग उपवस्त्र के रूप में किया जाता है और श्री फल का उपयोग बिना वस्त्र के या बिना ढंके नही किया जाता है। माना जाता है कि श्री फल पर मौली लपेटकर अर्पित करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती है और घर में स्थिर लक्ष्मी का निवास होता है।

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