बुधवार, 15 जून 2011

माफी... एक अवसर जो हमें रोज मिलता है

कहते हैं कि गलत काम करने वाले व्यक्ति को सजा देना देना जरूरी होता है। यही सजा उसके लिए सबक बनकर उसे सुधरने में मदद करती है। लेकिन हर बार ऐसा हो ये जरूरी नहीं। कभी-कभी हमारा क्षमादान भी उसे उसकी गलती का एहसास कराके इंसान बनने में मदद करता है।
जापान में एक संत थे। लोग उन्हें जापान का गांधी कहा करते थे। वे न कभी किसी के लिए बुरा बोलते, न कभी बुरा सोचते और न कभी किसी का बुरा करते इसलिए लोग उनका बहुत सम्मान करते थे। वहीं एक आदमी उनसे बड़ी घृणा करता था और चारों ओर संत की प्रशंसा देख उसे बड़ी जलन होती। एक दिन उसने संत को मारने का विचार किया।
एक रात वह चुपके से उस संत के घर में जा घुसा। संत को मारने के लिए उसने जैसे ही तलवार निकाली वैसे ही संत की नींद खुल गई। वह बुरी तरह से डर गया और डर के मारे कांपने लगा। उसे लगा कि अब संत शोर मचाऐंगे और सबको इक्कठ्ठा कर लेंगे और ये सब लोग मिलकर मुझे मार डालेगें।लेकिन उसने देखा कि संत हाथ जोडकर भगवान से प्रार्थना कर रहे थे कि हे ईश्वर मेरे इस भाई को सद्बुद्धि दो और इसकी गलती क्षमा करो। यह देख उसे अपने किए पर पछतावा होने लगा। वह संत के पैरों में गिरकर माफी मांगने लगा। संत ने उसे गले लगाया और कहा कि गलती इंसान से ही होती है। मुझे तुमसे कोई शिकायत नहीं अब तुम एक अच्दे इंसान बनने की कोशिश करो।

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