मंगलवार, 28 अप्रैल 2015

माँ ने जीवन चक्र के चाक पर मुझे शब्दों का कुम्हार बनाया - रश्मि प्रभा

ज के दौर में रश्मि प्रभा बहुत बड़ा नाम है। वे किसी परिचय के मोहताज नहीं है। rashmi prabha.jpgदेश के तमाम बड़े कवि उनके आदर्श और मार्गदर्शक है। उनकी माँ ही उनकी प्रेरणा है। वे कहती है कि कुम्हार जिस तरह निरंतर चाक पर मिटटी को आकार देता हैउस तरह मेरी माँ ने सोचने को धूलकण ही सहीदिया और लीक से हटकर एक पहचान दी। उनकी हर सम्भव कोशिश होती है कि व्यक्ति,स्थानसमयस्थिति को अलग अलग ढंग से प्रस्तुत करें,लोगों को सोचने पर विवश करें। उनका कहना है कि पारिवारिक पृष्ठभूमि और इस नाम ने जीवन चक्र के चाक पर मुझे शब्दों का कुम्हार बनाया और निरंतर लिखने के लिए कई उतार-चढ़ाव दिए। यूँ सच पूछिये तो एक नाम से बढ़कर जीवन अनुभव होता है एक ही नाम तो कितनों के होते हैं नाम की सार्थकता सकारात्मक जीवन के मनोबल से होती है हवाओं का रूख जो बदले सार्थक परिणाम के लिए असली परिचय वही होता है। उनसे सभी पहलुओं पर बेबाक बात की। प्रस्तुत है बातचीत के अंश -

प्र. आपको इस क्षेत्र में रूचि कैसे हुई ?
उ. साहित्यिक माहौल तो बचपन से था - सौभाग्य कि प्रकृति के सौन्दर्य कवि सुमित्रानंदन पन्त ने मुझे 'रश्मिनाम दिया - पारिवारिक पृष्ठभूमि और इस नाम ने जीवन चक्र के चाक पर मुझे शब्दों का कुम्हार बनाया और निरंतर लिखने के लिए कई उतार-चढ़ाव दिए।
जि़न्दगी की धरती बंजर हो या उपजाऊ सामयिक शब्द बीज पनपते रहते हैंमिटटी से अद्भुत रिश्ता था तो रूचि बढ़ती गई।

प्र. आपके प्रेरणाश्रोत और आदर्श कौन है?
उ. कोई एक नाम लिख दूँ तो नाइंसाफी होगीक्योंकि हिंदी साहित्य के कई कवि लेखक ऐसे हैं - जिन्होंने मेरे परिवार से परे मेरे भीतर एक दिव्य ज्योति की प्राणप्रतिष्ठा की - सुमित्रानंदन पन्त,हरिवंश राय बच्चनरामधारी सिंह दिनकरजयशंकर प्रसादमैत्रेयी देवीशिवानीशिवाजी सामंत,आशापूर्णा देवीप्रेमचंदशरतचंद्र ..... आदर्शों की कमी नहीं - जिसमें मेरी माँ स्व. सरस्वती प्रसाद हैं।
कुम्हार जिस तरह निरंतर चाक पर मिट्टी को आकार देता हैउस तरह मेरी माँ ने सोचने को धूलकण ही सहीदिया और लीक से हटकर एक पहचान दी।

प्र. आपकी उपलब्धि क्या-क्या है?
उ. पहली उपलब्धि काबुलीवाले की 'मिन्नीहोनाजिस नाम से मुझे सबने पुकारामेरी दूसरी उपलब्धि पंत की 'रश्मिहोनाइस नाम ने मुझे एक उद्देश्य दिया कि मैं इस नाम का हमेशा मान रखूँ ! इससे परे हमें जानना होगा कि हम उपलब्धि कहते किसे हैं ! 4, 5 काव्य-संग्रहकुछ पुरस्कार .... मेरे ख्याल से किताबेंपुरस्कार - इन सबसे ऊपर की उपलब्धि है भीड़ में एक पहचान। और यह उपलब्धि मुझे मिली हैख़ुशी होती है जब कोई मुझसे अपनी किताब की भूमिका लिखने को कहता है.उनकी ज़ुबान पर मेरा नाम मेरी उपलब्धि है।

प्र. आप परिवार के बीच साहित्य के लिए समय कैसे निकल पाते है?
उ. परिवार यानि मेरे बच्चेशब्द - मेरे बच्चेमकसदउद्देश्य इन्हें इनका मुकाम देना तो इनके लिए मेरे पास समय होता ही होता है।

प्र. क्या आपको अपने परिवार से सहयोग या प्रोत्साहन मिलता है?
उ. जैसा कि मैंने आरम्भ में ही कहा कि परिवार में बचपन सेएक साहित्यिक वातावरण थामिटटी की सोंधी खुशबू सा आदान-प्रदान हमारी बातचीत में थामेरे बच्चे भी इससे अछूते नहीं रहेउनकी मोबाइल पर मेरे गीत का होनाउसे सुनना मेरे लिए बहुत बड़ा प्रोत्साहन है।

प्र. गीतों से आपका क्या तात्पर्य है? आपके गीत कहीं ज्?
उ. मेरे गीतों को धुन में ढाला ऋषि कम्पोजर नेस्वर कुहू गुप्ता और श्रीराम इमानी ने दिए ज् अल्बम बनाने की ख्वाहिश थीपूरी नहीं हुई है पर नि:संदेहविश्वास हैवो सुबह कभी तो आएगी ...

प्र. भविष्य की क्या योजना है या कोई तमन्ना है?
उ. जीवन का कोई एक पहलु ही नहीं होताउसे देखने काहर व्यक्ति का अपना नजरिया होता हैज् मेरी हर सम्भव कोशिश होती है कि व्यक्तिस्थानसमयस्थिति को अलग अलग ढंग से प्रस्तुत करूँ,लोगों को सोचने पर विवश करूँ ज् वर्तमानभविष्य की यही ख्वाहिश है

प्र. सबसे सुखद क्षण कौन सा है?
उ. हर वह क्षण जिसमें मेरे बच्चों के चेहरे खिलखिलाते हैं और मुझे सुकून भरे शब्द दे जाते हैं

प्र. ऐसा कोई समय आया हो जब आपको बहुत निराशा मिली हो?
उ. निराशा जब भी होती हैव्यक्तिगत होती है - लेखन से जुडी हो या जि़न्दगी सेपर बहुत निराशा के पल में एक अदृश्य ताकत मुझमें शक्ति का संचार करती रहीइसलिए एक वक़्त के बाद मैंने उसे भुलाने की कोशिश की।

रश्मि प्रभा
संक्षिप्त परिचय
काव्य-संग्रह                             :  शब्दों का रिश्ता (2010)अनुत्तरित (2011)महाभिनिष्क्रमण से निर्वाण तक (2012)खुद की तलाश (2012), चैतन्य (2013)
संपादन                                      :  अनमोल संचयन (2010)अनुगूँज (2011)परिक्रमा (2011)एक साँस मेरी (2012)खामोशखामोशी और हम (2012)बालार्क (2013) , एक थी तरु (2014)वटवृक्ष (साहित्यिक त्रैमासिक एवं दैनिक वेब पत्रिका - 2011 से 2012)
ऑडियो-वीडियो संग्रह          :  कुछ उनके नाम (अमृता प्रीतम-इमरोज के नाम)
सम्मान                                     :  परिकल्पना ब्लॉगोत्सव द्वारा वर्ष 2010 की सर्वश्रेष्ठ कवयित्री का सम्मान'द संडे इंडियन’ पत्रिका द्वारा तैयार हिंदी की 111 लेखिकाओं की सूची में शामिल नामपरिकल्पना ब्लॉगर दशक सम्मान -2003-2012, शमशेर जन्मशती काव्य-सम्मान – 2011, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी कविता प्रतियोगिता 2013 भौगोलिक क्षेत्र 5भारत - प्रथम स्थान प्राप्तभोजपुरी फीचर फिल्म साई मोरे बाबा की कहानीकारगीतकार

 ArunKumarBanchhor-90.jpg
अरुण कुमार बंछोर

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