बुधवार, 12 अगस्त 2015

सभी प्रकार की भूमिका पसंद है केशव को

छत्तीसगढ़ फिल्म इंडस्ट्री में केशव वैष्णव एक जाना पहचाना नाम है। अभी हाल ही ने प्रदर्शित उनकी फिल्म असली संगवारी बिलासपुर में रिकार्ड बनाने में सफल रही है। केशव का कहना है सरकार छत्तीसगढ़ी फिल्मो को बढ़ावा दे ताकि देश के कोने कोने में इसका प्रदर्शन हो सके। छत्तीसगढ़ में फिल्मो का प्रदर्शन अनिवार्य किया जाए जिससे ताकिजो की मनमानी ख़त्म हो सके। केशव से हमने हर पहलूओं पर बेबाक बात की है। प्रस्तुत है बातचीत के संपादित अंश।
0 फिल्म असली संगवारी को लेकर आपने क्या उम्मीद की थी?
00 यह फिल्म हमारी उम्मीदों पर खरा उत्तरी है। लो बजट की फिल्म है जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया। अब पूरे छत्तीसगढ़ के ताकीजों में लगाये जाएंगे।
0 आपको एक्टिंग का शौक कब से है ?
00 मुझे एक्टिंग का शौक बचपन से ही रहा है। टीवी देख- देखकर मैं कलाकारों की नक़ल किया करता था। एक्टिंग में रूचि बचपन से ही था पर मौका नहीं मिल रहा था। मैं बहुत कुछ करना चाहता हूँ इस क्षेत्र में । मै कलाकारों को परदे पर देखता था तो मुझे अच्छा लगता था जिससे मुझे फिल्मो की और रुझान हुआ।
0 फिर मौका कैसे मिला और आपके प्रेरणाश्रोत कौन है ?
00 पहले तो छोटे-छोटे रोल किया करता था। चंदू और चांदनी से मैंने कॅरियर की शुरुआत की थी। काफी संघर्ष किया। मेरा कोई रोल मॉडल नहीं है।
0 कभी आपने सोचा था की फिल्मो को ही अपना कॅरियर बनाएंगे ?
00 हाँ ! शुरू से ही मै एक्टिंग को कॅरियर बनाने की सोचकर चल रहा था।
0  छालीवुड फिल्मो में आपको कैसी भूमिका पसंद है या आप कैसे रोल चाहेंगे।
00  मैं हर तरह की भूमिका निभाना चाहूंगा ताकि मुझे सभी प्रकार का अनुभव हो। छोटे बड़े सभी रोल मुझे पसंद है।
0 सरकार को आपको क्या अपेक्षाएं हैं?
00 सरकार अभिभावक की भूमिका में आये और छालीवुड को मदद करे। टाकीज बनवाए, नियम बनाये ताकि ताकिजो मालिकों की मनमानी खत्म हो जाए। 
0 कोई ऐसा अवसर आया हो ,जब आप बहुत उत्साहित हुई हो?
00 फिल्म असली संगवारी के रिलीज होने पर।
0 आप फिल्मो में भूमिका को लेकर कैसा महसूस करते हैं ?
00 जब मैं कोई भूमिका निभाता हूँ तो मुझे गर्व मेहसूस होता हैं की मैं अपने रोल को बखूबी से कर पा रहा हूँ। सभी करेक्टर का अध्ययन करता हूँ फिर कैमरे के सामने आता हूँ।
0 रील लाइफ और रीयल लाइफ में क्या अंतर है?
00 दोनों अलग अलग चीज है। रील लाइफ चुनौतीपूर्ण होती है उसमे कई करेक्टर होते है और रियल लाइफ में एक ही करेक्टर को जीना होता है।
0 ऐसा कोई क्षण जब निराशा मिली हो?
00 कभी नहीं। मैं कभी निराश नहीं होता।
0 आपका कोई सपना है जो आप पूरा होते देखना चाहती हैं?
00 मेरा सपना है  कि मै छत्तीसगढ़ी फिल्म को देश के कोने कोने में लोग देखे।

रविवार, 9 अगस्त 2015

नाम और शोहरत चाहती है अहाना

सफल अभिनेत्री बनने की तमन्ना है
छत्तीसगढ़ फिल्म इंडस्ट्री में अहाना फ्राँसिस एक नया नाम है, लेकिन कला उनमे कूट-कूट कर भरा हुआ है। अहाना को फिल्मो में काम करने का जूनून है। वह कहती है कि उनकी तमन्ना एक सफल अभिनेत्री बनने की है पर वह सभी प्रकार की भूमिका निभाना चाहती ताकि उन्हें एक नया अनुभव हो। उन्हें छालीवुड में सिर्फ नाम और शोहरत चाहिए। लोगो का प्यार और तालियां मुझे मिला तो मुझे अपार खुशी होगी। अहाना से हमने हर पहलूओं पर बेबाक बात की है। प्रस्तुत है बातचीत के संपादित अंश।
0 आपको एक्टिंग का शौक कब से है ?
00 मुझे एक्टिंग का शौक बचपन से ही रहा है। टीवी देख- देखकर मैं कलाकारों की नक़ल किया करती थी। अभी तो मेरे  कॅरियर की शुरुआत है । एक्टिंग में रूचि बचपन से ही था पर मौका नहीं मिल रहा था। मैं बहुत कुछ करना चाहती हूँ इस क्षेत्र में ।
0 फिर मौका कैसे मिला और आपके प्रेरणाश्रोत कौन है ?
00 मेरी प्रेरणाश्रोत मेरी माँ अंजना फ्रांसिस ही है ही हैं । हर वक्त वो मेरे साथ होती है। अच्छे बुरे सभी पलों में मुझे उनका साथ मिला और मैं आत्मविश्वास से काम करने लगी । उन्होंने ही मुझे इस लाईन में काम करने के लिए प्रेरित किया है। बगैर परिवार के सहयोग के इस लाईन में काम करना संभव नहीं था । और मौका मुझे मनोजदीप के चलते मिला।
0 कभी आपने सोचा था की फिल्मो को ही अपना कॅरियर बनाएंगी ?
00 नहीं ! पर मुझे रुचि थी। मेरी माँ चाहती थी की परिवार से कोई इस क्षेत्र में आये। उनकी इच्छा से मैं फिल्मो में आई हूँ । उनका सपना मुझे पूरा करना है।
0  छालीवुड फिल्मो में आपको कैसी भूमिका पसंद है या आप कैसे रोल चाहेंगी।
00 वैसे तो मुझे लीड रोल करने की इच्छा है फिर भी मैं हर तरह की भूमिका निभाना चाहूंगी ताकि मुझे सभी प्रकार का अनुभव हो।
0 आपको फिल्मों में सबसे ज्यादा कौन पसंद है?
00 दीपिका पादुकोण , मैं उनकी एक्टिंग पर फि़दा हूँ। जब वो भूमिका में होती हैं तो एकदम सच लगता है।
0 कोई ऐसा अवसर आया हो ,जब आप बहुत उत्साहित हुई हो?
00 जब पहली बार मुझे फिल्मो में काम मिला ।
0 आपने पहली फिल्म बेर्रा की है , तो आपको कैसा महसूस हुआ , कोई चूनौती तो नहीं ?
00 जब मैं कोई भूमिका निभाती हूँ तो मुझे गर्व मेहसूस होता हैं की मैं अपने रोल को बखूबी से कर पा रही हूँ। बेर्रा मेरी पहली फिल्म है। मुझे अपनी भूमिका अच्छा ही लगा। कोई चुनौती नहीं थी।
0 रील लाइफ और रीयल लाइफ में क्या अंतर है?
00 दोनों अलग अलग चीज है। रील लाइफ चुनौतीपूर्ण होती है उसमे कई करेक्टर होते है और रियल लाइफ में एक ही करेक्टर को जीना होता है।
0 ऐसा कोई क्षण जब निराशा मिली हो?
00 कभी नहीं। मैं कभी निराश नहीं होती, क्योकि मेरे माता-पिता का प्यार साथ होता है।
0 आपका कोई सपना है जो आप पूरा होते देखना चाहती हैं?
00 मेरा सपना है  कि मै एक सफल अभिनेत्री बनूँ और खूब नाम और शोहरत कमाऊं । मैं अपने इस सपने को पूरा होते देखना चाहती हूँ।

मंगलवार, 4 अगस्त 2015

पतिव्रत भारतीय नारी शैव्या

पद्मपुराण में पतिव्रत शैव्या की कथा का विस्तार में वर्णन मिलता है। हिंदू पौराणिक ग्रंथ की इस कथा के अनुसार बहुत समय पहले प्रतिष्ठानपुर नामक नगर में कौशिक नाम का एक ब्राह्मण रहता था। वह कोढ़ से पीढ़ित था। उसके रिश्तेदार उसे छोड़कर चले गए लेकिन उसकी पत्नी शैव्या उसे देवता के समान ही पूजती थी।
कौशिक बड़ा ही क्रोधी स्वभाव का था। वह शैव्या का अपमान करता लेकिन वह सुनती रहती। एक दिन कौशिक ने शैव्या से कहा, 'कुछ दिन पहले मैंने यहां एक सुंदर वैश्या को जाते देखा था। क्या तुम मुझे उसके पास ले चलोगी।'
यह सुकर शैव्या को क्रोध नहीं आया बल्कि वह पहले उस वैश्या के घर गई। वैश्या ने उससे कहा आधी रात को अपने पति को मेरे घर ले आना। यह सुनकर शैव्या अपने घर लौट आई।
रात के समय अपने पति को कंधे पर उठाकर शैव्या वैश्या के घर चल पड़ी। उसने रास्ते में देखा। मार्ग में एक सूली थी जिस पर चोरी के संदेह में माण्डव ऋषि को उस पर चढ़ा दिया था। हालांकि ऋषि अपनी मंत्र शक्ति से बच सकते थे लेकिन वह बचपन में चीटियों को कांटे चुभोया करते थे। वह जानते थे यह सजा उसी के फलस्वरूप मिली है।
वहां काफी अंधेरा था, जिसके चलते शैव्या के पति का पैर सूली से लग गया, जिससे सूली हिलने लगी और ऋषि का दर्द बढ़ गया। ऋषि ने शाप दिया, जिसने भी इस सूली को हिलाया है। सूर्य उदय होने से पहले उसकी मृत्यु हो जाए।
तब शैव्या बोली, 'हे ऋषि मेरे पति का पैर अनजाने में आपकी सूली से लग गया है। कृपया शाप वापस ले लें।' ऋषि ने मना कर दिया। तब शैव्या बोली, 'ऋषिवर आप शाप वापस ले लें अन्यथा कल सूर्य उदय नहीं होगा।' इतना कहकर वह अपने पति को वैश्या के घर की ओर ले जाने लगी।
पतिव्रता शैव्या के वचन के चलते सूर्य उदय नहीं हुआ। ऐसा कई दिनों तक चलता रहा। चारों तरफ तबाही का मंजर था। यह देख सभी देवतागण, ब्रह्माजी के पास पहुंचे। तब ब्रह्माजी ने कहा, शैव्या ही इस समस्या का निराकरण कर सकती हैं।
ब्रह्माजी पतिव्रता नारी शैव्या के पास पहुंचे। शैव्या ने ब्रह्माजी को बताया कि ऋषि अगर सूर्य उदय हुआ तो उसके पति की मृत्यु हो जाएगी। तब ब्रह्माजी बोले, तुम अपने वचन वापस ले लो, में तुम्हारे पति को स्वस्‍थ करके पुनः जीवित कर दूंगा। शैव्या ने ऐसा ही किया और अपने पति के प्राण भी बचा लिये। कौशिक जब स्वस्‍थ हुआ तो उसे अपनी गलती का अहसास हुआ। इस तरह दोनों दंपत्ति सुखपूर्वक रहने लगे। तो ऐसी थीं पतिव्रत भारतीय नारी शैव्या।

रविवार, 2 अगस्त 2015

मॉडलिंग से अभिनय की ओर तान्या

सफल अभिनेत्री बनने की तमन्ना है
मिस ब्यूटीफूल फेश आफ सेन्ट्रल इंडिया तान्या तिवारी मॉडलिंग में अपना जादू बिखेरने के बाद अब फिल्मो में भाग्य आजमा रही है। भोजपुरी फिल्म इन्साफ की जंग में
बतौर अभिनेत्री काम कर रही तान्या की दिली ख्वाहिश एक सफल अभिनेत्री बनने की है। वह किसी भी बात को लेकर कभी निराश नहीं होती है। आइना के सामने डांस कर माधुरी की नक़ल करने वाली तान्या छत्तीसगढ़ी और हिन्दी फिल्मो में काम करने की इच्छा रखती है। एक्टिंग और डांस उनका शौक है। तान्या से हमने हर पहलूओं पर बेबाक बात की है। प्रस्तुत है बातचीत के संपादित अंश। 
0 आपको एक्टिंग का शौक कब से है ?
00 मुझे एक्टिंग का शौक बचपन से ही रहा है। पहले मै मॉडलिंग करती थी। मॉडलिंग से ही मैंने अपना कॅरियर की शुरुआत की। एक्टिंग में रूचि बचपन से ही था पर मौका नहीं मिल रहा था। 
0 फिर मौका कैसे मिला और आपके प्रेरणाश्रोत कौन है ?
00 मेरी प्रेरणाश्रोत मेरी माँ रश्मि तिवारी ही हैं । हर वक्त वो मेरे साथ होती है। अच्छे बुरे सभी पलों में मुझे उनका साथ मिला और मैं आत्मविश्वास से काम करने लगी । उन्होंने ही मुझे इस लाईन में काम करने को प्रेरित किया। 
0 मॉडलिंग से अभिनय की ओर आपका रुझान कैसे हुआ ?
00 मॉडलिंग तो शुरुवात है एक्टिंग मेरी रूचि रही है । मैं मूवी देखकर आती और आईना के सामने खड़े होकर डांस और एक्टिंग करती थी। 
0 मिस ब्यूटीफूल फेश आफ सेन्ट्रल इंडिया कैसे बनी 
00 बहुत तैयारी की थी। यह कॉम्पीटिशन मैंने रायपुर में ही जीती थी,तब से मुझे फिल्मो का ऑफर मिलाने लगा था। भोजपुरी फिल्म भी ऐसे ही मिली है। 
0 आपको फिल्मों में सबसे ज्यादा कौन पसंद है?
00 माधुरी दीक्षित , मैं उनकी एक्टिंग पर फि़दा हूँ। जब वो भूमिका में होती हैं तो एकदम सच लगता है। 
0 कोई ऐसा अवसर आया हो ,जब आप बहुत उत्साहित हुई हो?
00 मिस ब्यूटीफूल फेश आफ सेन्ट्रल इंडिया का खिताब जीतने पर । 
0 आपने पहली फिल्म की है , तो आपको कैसा महसूस होता है?
00 जब मैं कोई भूमिका निभाती हूँ तो मुझे गर्व मेहसूस होता हैं की मैं अपने रोल को बखूबी से कर पा रही हूँ। 
0 रील लाइफ और रीयल लाइफ में क्या अंतर है?
00 दोनों अलग अलग चीज है। रील लाइफ चुनौतीपूर्ण होती है उसमे कई करेक्टर होते है और रियल लाइफ में एक ही करेक्टर को जीना होता है। 
0 ऐसा कोई क्षण जब निराशा मिली हो?
00 कभी नहीं। मैं कभी निराश नहीं होती, क्योकि मेरी माँ मेरे साथ होती है। 
0 आपका कोई सपना है जो आप पूरा होते देखना चाहती हैं?
00 मेरा सपना है  कि मै एक सफल अभिनेत्री बनूँ और खूब नाम कमाऊं । मैं अपने इस सपने को पूरा होते देखना चाहती हूँ।

सोमवार, 27 जुलाई 2015

छालीवुड में छाए रहने की तमन्ना रखती है उषा

छत्तीसगढ़ी में दर्शकों की कमी है
रायपुर। छत्तीसगढ़ी में दर्शकों की कमी है । फिल्मे भी अच्छी बनती है फिर भी यहां की जनता में अपनी भाषा के प्रति मोह नहीं होने के कारण फिल्मे नहीं चल पाती। इसके अलावा थियेटरों की भी कमी है। यह कहना है फिल्म अभेट्री और गायिका उषा विश्वकर्मा का। उषा की तमन्ना एक बड़े कलाकार बनाकर खूब नाम कमाने की है। 25 से अधिक फिल्मो में अपनी भूमिका का जादू बिखेर चुकी उषा को दुख है कि यहां के फिल्म इंडस्ट्री को सरकार से  नहीं मिलती। एक्टिंग और डांसिंग उनका शोक है। उषा विश्वकर्मा से हमने हर पहलूओं पर बेबाक बात की है। प्रस्तुत है बातचीत के संपादित अंश।

-----संक्षिप्त परिचय ----
नाम -               - उषा विश्वकर्मा
कला                - अभिनेत्री एवं गायिका
फिल्म               - 25
हिन्दी फिल्म         - 1
एल्बम               - हिन्दी और भोजपुरी
0 आपको एक्टिंग का शौक कब से है ?
00 मुझे एक्टिंग का शौक बचपन से ही रहा है। पहले मै स्टेज शो करती थी। बचपन में जब हम टीवी दीखाकर डांस किया करते थे तभी से कुछ करने की इच्छा जागी और आज हम आपके सामने है।
0 मौका कैसे मिला और आपके प्रेरणाश्रोत कौन है ?
00 मेरा कोई प्रेरणाश्रोत नहीं  अपने आप सीखी। मया फिल्म में मुझे मौका मिला। उपासना वैष्णव मुझे लेकर आई थी।
0 अभिनय की ओर आपका रुझान कैसे हुआ ?
00 टीवी देख कर अभिनय की ओर मेरा रुझान हूआ।
0 कोई ऐसा अवसर आया हो ,जब आप बहुत उत्साहित हुई हो?
00 जी अपने आप को पहली बार बड़े परदे पर देखकर बहुत उत्साहित हुई थी।
0 आप फिल्मो में चरित्र अभिनेत्री की भूमिका निभाती है, तो आपको कैसा महसूस होता है?
00 जब मैं कोई अभिनेत्री का भूमिका निभाती हूँ तो मुझे गर्व मेहसूस होता हैं की मैं अपने रोल को बखूबी से कर पा रही हूँ।
0 रील लाइफ और रीयल लाइफ में क्या अंतर है?
00 दोनों अलग अलग चीज है रियल लाइफ को रील लाइफ में नहीं जोड़ सकती । रील लाइफ में भूमिका निभाते है और रियल लाइफ में पारिवारिक जीवन जीते हैं।
0 ऐसा कोई क्षण जब निराशा मिली हो?
00 जब भोजपुरी फिल्म निरहुआ हिन्दुस्तानी नहीं कर पाई तब मुझे बहुत निराश हुई थी।
0 छत्तीसगढ़ी फिल्मे थियेटरों में ज्यादा दिन नही चल पाती ,आप क्या कारण मानती है ?
00 छतीसगढ़ी फिल्में इस कारण थियेटर में ज्यादा दिन नहीं चल पाती क्योंकि यहां दर्शक ही नहीं है छत्तीसगढ़ के लोग ही फिल्मे नहीं देखते। उन्हें अपनी भाषा से लगाव नहीं है।
0 आपका कोई सपना है जो आप पूरा होते देखना चाहती हैं?
00 मेरा सपना है  कि एक दिन मैं बड़ा कलाकार बनूँ और खूब नाम कमाऊं । मैं अपने इस सपने को पूरा होते देखना चाहती हूँ।


छालीवुड की सुपर स्टार बन्ना चाहती है सुनीता

एक्टिंग खराब होने से निराश हो उठती है  
छत्तीसगढ़ी फिल्मो की सह-अभिनेत्री सुनीता राजपूत की तमन्ना सुपर स्टार बनने की है। बचपन से एक्टिंग का शौक रखने वाली सुनीता कहती है कि जब अभिनय ठीक से नहीं कर पाती है तब उन्हें निराशा होती है। वे कहती कि छत्तीसगढ़ी फिल्मे भी अच्छी बनती है फिर भी यहां की जनता में अपनी भाषा के प्रति मोह नहीं होने के कारण फिल्मे नहीं चल पाती। नवोदित अदाकारा सुनीता को दुख है कि यहां के फिल्म इंडस्ट्री को सरकार से  नहीं मिलती। सुनीता से हमने हर पहलूओं पर बेबाक बात की है। प्रस्तुत है बातचीत के संपादित अंश।
0 आपको एक्टिंग का शौक कब से है ?
00 मुझे एक्टिंग का शौक बचपन से ही है। बचपन में जब हम टीवी देखकर डांस किया करते थे तभी से कुछ करने की इच्छा जागी और आज हम आपके सामने है।
0 मौका कैसे मिला और आपके प्रेरणाश्रोत कौन है ?
00 मेरी मम्मी तिलोतमा राजपूत ही मेरी प्रेरणाश्रोत है। उनका मुझे बहुत ही सहयोग है और उन्होंने ही मुझे फिल्मो में  आने की प्रेरणा दी है और मनोजदीप मेरे आदर्श है जिन्होंने मुझे फिल्मो में लेकर आये।
0 अभिनय की ओर आपका रुझान कैसे हुआ ?
00 टीवी देख कर और माँ की तमन्ना पूरा करने अभिनय की ओर मेरा रुझान हूआ।
0 कोई ऐसा अवसर आया हो ,जब आप बहुत उत्साहित हुई हो?
00 जी जब मेरा एक्टिंग अच्छा होता है तब मैं बहुत उत्साहित होती हूँ।
0 आप फिल्मो में अभिनेत्री की भूमिका निभाती है, तो आपको कैसा महसूस होता है?
00 जब मैं कोई भूमिका निभाती हूँ तो मुझे गर्व मेहसूस होता हैं और मैं अपने रोल को बखूबी निभाने की कोशिश करती हूँ।
0 रील लाइफ और रीयल लाइफ में क्या अंतर है?
00 दोनों अलग अलग चीज है रियल लाइफ को रील लाइफ में नहीं जोड़ सकते । रील लाइफ में सिर्फ भूमिका निभाते है और रियल लाइफ में परिस्थितियों और समाज अनुसार चलते हैं।
0 ऐसा कोई क्षण जब निराशा मिली हो?
00 जब एक्टिंग खराब होती है तब मुझे बहुत निराश होती है।
0 आपका कोई सपना है जो आप पूरा होते देखना चाहती हैं?
00 मेरा सपना है  कि एक दिन मैं सुपर स्टार बनूँ और खूब नाम कमाऊं । मैं अपने इस सपने को पूरा होते देखना चाहती हूँ। 

रविवार, 19 जुलाई 2015

एक्टिंग डांसिंग ही मेरा शौक है : उर्वशी साहू

छत्तीसगढ़ में कलाकारों की भरमार है जरुरत है उन्हें तराशने की
रायपुर। छत्तीसगढ़ में कलाकारों की भरमार है , जरुरत है उन्हें तराशने की। गाँव गाँव ,गली-गली में कलाकार मिलेंगे , उन्हें फिल्मो में मौका मिलना चाहिए। यह कहना है छत्तीसगढ़ी फिल्मो की अभिनेत्री उर्वशी साहू  का। वे कहती है कि अच्छी कहानी हो और अच्छे- अच्छे कलाकार हो तो छत्तीसगढ़ी फिल्मे भी अच्छी चलेंगी। एक्टिंग और डांसिंग उनका शोक है। लगभग 50 - 60 फिल्मो में अपने अभिनय का जादू चला चुकी उर्वशी हिन्दी भोजपुरी फिल्मो में भी अभिनय कर चुकी है। चुनौतीपूर्ण भूमिका उन्हें बहुत पसंद है। अच्छी फिल्मे बनाने और लोक कला मंच के कलाकारों को आगे बढ़ाने की तमन्ना रखती है। उर्वशी साहू से हमने हर पहलूओं पर बेबाक बात की है। प्रस्तुत है बातचीत के संपादित अंश।
संक्षिप्त परिचय 
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नाम -               - उर्वशी साहू
फिल्म              - 60
टेली फिल्म        -  5
एल्बम               - 12  हिन्दी और भोजपुरी

0 आपको एक्टिंग का शौक कब से है ?
00 मुझे एक्टिंग का शौक बचपन से ही रहा है जब भी मैं कोई फिल्म या सीरयल देखती थी तो उस जगह अपने आप को रखकर सोचती थी। कला खानदानी परम्परा है जिसे मैं आगे बड़ा रही हूँ।
0 मौका कैसे मिला और आपके प्रेरणाश्रोत कौन है ?
00 सबसे पहले मुझे फिल्म डांढ़ में विलेन की भूमिका करने का मौका मिला था। मेरे नाना स्वर्णदास साहू मेरे आदर्श हैं। वे मशहूर नाटक चरणदास चोर के लेखक थे।
0 अभिनय की ओर आपका रुझान कैसे हुआ ?
00 टीवी देख कर अभिनय की ओर मेरा रुझान हूआ।
0 कोई ऐसा अवसर आया हो ,जब आप बहुत उत्साहित हुई हो?
00 जी जब मैंने पहली बार स्टेज शो की और मेरी माँ मेरे लिए घाघरा चुनरी लेकर आई थी तो बहुत ही रोमांचित हुई और मेरा मनोबल उत्साह काफी बढ़ गया।
0 आप फिल्मो में चरित्र अभिनेत्री की भूमिका निभाती है, तो आपको कैसा महसूस होता है?
00 जब मैं कोई अभिनेत्री का भूमिका निभाती हूँ तो मुझे गर्व मेहसूस होता हैं की मैं अपने रोल को बखूबी से कर पा रही हूँ।
0 रील लाइफ और रीयल लाइफ में क्या अंतर है?

00 दोनों अलग अलग चीज है रियल लाइफ को रील लाइफ में नहीं जोड़ सकती । रील लाइफ में मैं एक प्रोफेशनल भूमिका निभाती हूँ और रियल लाइफ चुनौतीभरी होती है।
0 ऐसा कोई क्षण जब निराशा मिली हो?
00 जब छतीसगढ़ फिल्म इन्डस्ट्री में सम्मान नहीं मिलता और  तब मुझे बहुत निराश होती है।
0 छत्तीसगढ़ी फिल्मे थियेटरों में ज्यादा दिन नही चल पाती ,आप क्या कारण मानती है ?
00 छतीसगढ़ी फिल्में इस कारण थियेटर में ज्यादा दिन नहीं चल पाती क्योंकि आज के बच्चे और नोजवान छतीसगढ़ी नहीं समझ पाते और बॉलिवुड फिल्म को ज्यादा महत्व देते हैं । दूसरी तरफ जो गाँव के लोग है वो छतीसगढ़ी फिल्म को बड़े ही चाव से देखते है और महत्व भी देते है अगर हमारे आस पास के गाँव कस्बो में थियेटर की व्यवसथा कराई जाए तो छतीसगढ़ी फिल्म चलेगी भी और आगे भी बढेगी।
0 आपका कोई सपना है जो आप पूरा होते देखना चाहती हैं?
00 मेरा सपना है  कि लोककलाकारो को खूब आगे बढ़ाऊं और अच्छी फिल्म बनाऊँ । मैं अपने इस सपने को पूरा होते देखना चाहती हूँ।