मंगलवार, 29 सितंबर 2015

मरीजों का इलाज सबसे बड़ी चुनौती होती है : डॉ अजय सहाय

0 विदेशों में शिविर लगाकर करते हैं इलाज , मिलता है प्यार 
0 हर रोज नया इतिहास बनता है सहाय सुपरस्पेशिलिटी अस्पताल में 
0 इलाज को व्यवसाय बनाये जाने से मरीज-डाकटर का रिश्ता कमजोर हुआ 
0 झोला छाप डाकटरों पर होना चाहिए कार्रवाई 
मरीजों का इलाज सबसे बड़ी चुनौती होती है। डाकटरों को भगवान का दूत माना जाता है जो मरीजों के इलाज में अपना सब कुछ झोंक देता है। मरीज ठीक होकर हँसते हुए जाते है अगर मरीज की मौत हो जाए तो परिजनों का व्यवहार बदल जाता इससे काफी दुख होता है ,क्योकि डाक्टर अपना धर्म निभाता है। यह कहना है सहाय सुपरस्पेशिलिटी अस्पताल के संचालक एवं मधुमेह ,हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ अजय मोहन सहाय का। वे कहते है कि इलाज को व्यवसाय बनाये जाने से मरीज-डाकटर का रिश्ता कमजोर हुआ है। डॉ सहाय जितने अच्छे विशेषज्ञ है उतने ही अच्छे समाजसेवक भी है। गरीब मरीजों को भी ठीक कर दुआ बटोरते है। पैसा उनके लिए मायने नहीं रखता, सेवा को डॉ सहाय कर्म मानते हैं। सहाय सुपरस्पेशिलिटी अस्पताल में हर रोज नया इतिहास बनता है। देश विदेश से मरीज आते है और हँसते हुए घर को लौटते हैं। पाकिस्तान में शिविर लगाकर इलाज करने वाले डॉ सहाय कहते हैं कि सुनने और देखने में फर्क होता है। पाकिस्तान के लोगो से उन्हें बहुत प्यार मिला और भाईचारा भी देखने को मिला। डॉ सहाय से हमने हर पहलूओं पर बेबाक बात की।

0 डाकटरों को भगवान का दूसरा रूप कहा जाता है।मौजूदा परिवेश में डाकटर इसे कितना साकार कर पाते हैं ?
00 डाकटर मरीजों के इलाज में अपना सब कुछ झोंक देता है। मेरे लिए मरीजों का प्यार और भगवान का आशीर्वाद सच्ची दौलत है। मरीज अच्छा होकर हँसते हुए घर लौटे यही हम चाहतें है ,पैसा कोई मायने नहीं रखता।
0 कभी- कभी मरीजों के परिजनों के बिना वजह गुस्से का शिकार भी होना पड़ता?
00 हाँ , यह तो सहना पड़ता है। मरीज इलाज के लिए आता है और जब केस ज्यादा बिगड़ा हुआ होता है । चाह कर भी डाकटर उन्हें नहीं बचा पातेतो मरीज की मौत के बाद परिजनों का व्यवहार अचानक बदल जाता है। तब बहुत दुख होता है। हम अपना सेवा धर्म पूरी ईमानदारी से निभाते हैं । मौत शाश्वत सत्य है। एक चूक से बददुआ मिलाने लगती है जो तीर की तरह चुभती है।
0 क्या आप इस बात से सहमत है कि अस्पताल अब व्यवसाय का रूप ले लिया है?
00 डाक्टर तो भगवान का दूत होता है। आजकल डाक्टर सेवा देने वाले हो गए हैं और मरीज उपभोक्ता। यही कारण है कि डाक्टर और मरीज का रिश्ता कमजोर हो गया है। झोला छाप डाक्टरों के कारण यह स्थिति बनी है।
0 झोला छाप डाक्टरों पर शिकायतों के बाद कार्रवाई क्यों नहीं होती?
00 सरकार का मापदंड अलग अलग है। अच्छे और रजिस्टर्ड डाक्टरों पर जऱा सी चूक में कार्रवाई हो जाती है और सरकार झोला छाप डाकटरों पर कोई कार्रवाई नहीं करती क्योकि उनके खिलाफ कोई सबूत बही होता फिर वो रजिस्टर्ड भी नहीं होते। करोडो रुपया फूंककर डाक्टर बनने वाले पर तो सरकार की नजऱ हमेशा दुनिया भर के क़ानून लाड दिए गए है। उपभोक्ता फोरम भी जुर्माना ठोकने में पीछे नहीं होता।
0 मुख्यमंत्री बीमा योजना अस्पताल और मरीजों के लिए कितना कारगर है?
00 योजना सही है पर क्रियान्वयन गलत है। जागरूकता की कमी है। प्रक्रिया इत्तनी जटिल है कि अस्पताल को नुकसान उठाना पड़ता है। मरीज तो पूरा इलाज कराने के बाद कार्ड बता देते है पर उन्हें प्रक्रिया के बारे में पता नहीं होता है। कार्ड ना लो तो दुष्प्रचार करते हैं।
0 आपके अस्पताल में गरीबों के लिए क्या क्या सुविधाएं हैं?
00 गरीबों के लिए हमारे यहां कोई केश काउंटर नहीं है, उनके इलाज में हम देर नहीं करते। हमारी मंशा है कि गरीब मरीज ठीक होकर हँसते हुए घर जाए। उनकी दुआ ही मेरे लिए सबसे बड़ी दौलत है।
0 आप विदेशो में भी शिविर लगाकर मधुमेह की इलाज करते है। उसके बारे में बताएं?
00 हाँ मैंने नेपाल में भूकम्प पीडि़तों के लिए काम किया है। पाकिस्तान में 12 जगहों पर शिविर लगाकर इलाज किया। पाकिस्तान के सिंध प्रांत में 6 गरीब बच्चों का सफल इलाज किया है। काफी दुआ मिला।
0 पाकिस्तान के लोगो के मन में भारत के प्रति कैसा रवैया देखने को मिला?
00 देखने और सुनने में बहुत ही अंतर है। पाकिस्तान के लोगो के मन में भाई चारा है। सुनाने के विपरीत दिलों से भारत के लोगो से अलग नहीं है। बहुत ही यादगार पल रहा है पाकिस्तान का शिविर।
0 गाँवों में कोई डाकटर जाना नहीं चाहते इसके कारण क्या  है?
00 सरकार की व्यवस्था ठीक नहीं है। बिना साधन के डाकटर वहां कैसे जाकर अपना काम करेंगे। तनखा भी कम है और असुविधाएं नहीं है। पढ़े लिखे डाक्टरों पर बंदिश बहुत है लेकिन उनकी सुविधाओं की किसी को चिंता नहीं है।

मौत के मुंह से वापस लाया
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ग्राम बेलहरी की 21 वर्षीय उमा कुर्रे को सहाय सुपरस्पेशिलिटी अस्पताल से ना केवल जीवनदान मिली बल्कि गर्भ में पल रहे बच्चे भी सकुशल है। उमा को गंभीर अवस्था में जब अस्पताल लाया गया तब उसके तमाम अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। सारे डाक्टर जवाब दे चुके थे। सबके मना करने के बाद भी अ डॉ सहाय ने इलाज किया और उमा हँसते हुए घर के लिए विदा हुई और अस्पताल को दे गयी ढेर सारी दुआएं।

सक्षिप्त परिचय
नाम       -अजय मोहन सहाय
पेशा         मधुमेह ,ह्रदय रोग विशेषज्ञ
संस्थान    सहाय सुपरस्पेशिलिटी अस्पताल
योग्यता    एमबीबीएस , एमडी सहित 18 डिगी
अवार्ड       शैक्षणिक साहित्य , डाक्टर में 50 से अधिक अवार्ड
               सीबी राय अवार्ड सीएम के हाथों
               हेल्थ केयर एक्सीलेंस अवार्ड
               दाऊ महासिंह चंद्राकर सम्मान 

सोमवार, 14 सितंबर 2015

बेटी को कमजोर मत समझो , महान होती हैं : तीजन बाई

विदेशों में सब्जी चाँवल के लिए तरस जाती हूँ 
बेटियों को कमजोर समझना मानव समाज की सबसे बड़ी भूल है ,उसे कमजोर मत समझो क्योकि बेटियां ही अंत तक माँ -बाप की सेवा करती है। यह कहना है मशहूर पंडवानी गायिका पद्मविभूषन डॉ तीजन बाई का । वे कहती है कि जब प्रोग्राम के लिए हम विदेश जाते हैं तो सब्जी चाँवल के लिए तरस  जाते है। मैं कहीं भी रहूँ अपनी छत्तीसगढ़ की परम्परा को कभी नहीं भूलती। पेरिस उनका पसंदीदा शहर है ,जहां वे ८ बार कार्यक्रम पेश कर चुकी है। विदेशों में जब उनके ही गीतों से उनका स्वागत होता है तो तीजन बाई बहुत ही गर्व महसूस करती है। तीजन बाई को कौन नहीं जानता। जो तीजन को जानता है वह पंडवानी को भी जानता है। यह दोनों नाम एक दूसरे के पूरक हैं। भिलाई के गाँव गनियारी में जन्मी इस
कलाकार के पिता का नाम  छुनुकलाल परधा और माता का नाम सुखवती था। नन्हीं तीजन अपने नाना ब्रजलाल को महाभारत की कहानियां गाते सुनाते देखतीं और धीरे—धीरे उन्हें ये कहानियां याद होने लगीं। उनकी अद्भुत लगन और प्रतिभा को देखकर उमेद सिंह देशमुख ने उन्हें अनौपचारिक प्रशिक्षण भी दिया। 13 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपना पहला मंच प्रदर्शन किया। उस समय में महिला पंडवानी गायिकाएं केवल बैठकर गा सकती थीं जिसे वेदमती शैली कहा जाता है। पुरुष खड़े होकर कापालिक शैली में गाते थे। तीजनबाई वे पहली महिला थीं जो जिन्होंने कापालिक शैली में पंडवानी का प्रदर्शन किया। तीजन बाई को अपनी उपलब्धियों का जरा सा भी गुरूर नहीं है। वह कहती हैं मैं आज भी गांव की औरत हूं। दिल में कुछ नहीं है …ऊंच-नीच, गरीब-अमीर कुछ नहीं, मैं सभी से एक जैसे ही मिलती हूं। बात करती हूं। बच्चों बूढ़ों के बीच बैठ जाती हूं। इससे दुनियादारी की कुछ बातें सीखने तो मिलती है। ऎसे में कोई कुछ-कह बोल भी दे तब भी बुरा नहीं लगता। मैं आज भी एक टेम बोरे बासी (रात में पका चावल पानी में डालकर) और टमामर की चटनी खाती हूं। उनसे हमने हर पहलूओं पर बेवाक बात की है।
0 पंडवानी की क्या सम्भावनाये दिखती है?
00 बेहतर है। आने वाले समय में भी गाये जाएंगे। महाभारत के प्रसंगों और कथानकों पर विकसित यह लोकप्रिय विधा है। छत्तीसगढ़ी बोली इसका लालित्य है।
0 मुख्यरूप से यह कहाँ कहाँ गई जाती है ?
00 कहीं भी कोई बंदिश नहीं है। हर जगह गई जाती है।
0 तो क्या कारण है कि लोकगीत लुप्त होती जा रही है ,युवा पीढ़ी का इस क्षेत्र में कितना भविष्य है?
00  लोकगीतों को जीवित रखने के लिए अपनी परम्परा और संस्कृति से लगाव जरूरी है। साथ ही शास्त्रीय संगीत की तरह इस विधा में भी गुरु शिष्य परम्परा को बढ़ावा देना जरूरी है।यह जिम्मेदारी लोकगीत के साधकों की है।
0 आपने किससे सीखा और आपके कितने शिष्य है ?
00 मेरे गुरु मेरे नाना ब्रजभूषण जी शारदीय है जिससे मैंने सब कुछ सीखा है और इस समय मेरे 200  से ज्यादा शिष्य हैं,जो इस परम्परा को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं।
0 संगीत नाटक अकादमी जैसे संस्थान लोकगीतों के लिए क्या कर रहे हैं?
00 कुछ भी नहीं कर , क्यों ये तो वही जाने। सरकार कुछ कर रही है पर उसे  कहा जा सकता।
0 फिल्मो गीतों ने लोकगीतों को कितना नुकसान पंहुचाया है?
00 देखिये फिल्मो के बारे में मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है और मैं फिल्मो से मतलब भी नहीं रखता। दोनों अलग अलग चीजें है।
0  कोई सुखद अनुभव बताईये ?
00 पदमश्री मिलने का दिन आज भी मोर सुरता में है, वेंकटरमनजी ने दिया था। उसी दिन इंदिरा गांधी से भी मिली थी बहुत अच्छी लगी, उन्होंने मेरी पंडवानी सुनी थी। मुझे बुलाकर बोली- छत्तीसगढ़ की हो ना। मैने हाँ कहा तो इंदिरा बोली महाभारत करती हो तो मैं बोली पंडवानी सुनाती हूं महाभारत नहीं कराती, सुनकर इंदिराजी खुश हुई और मेरी पीठ थपथपाई थीं।
0 सरकार से लोकगीतों को आपको क्या अपेक्षाएं हैं?
00 सरकार लोकगीतों को मदद करे। बहुत सी लोकगीत है अनेक विधाएँ है सबकी रक्षा सरकार ही कर सकती है।
0 कोई ऐसा अवसर आया हो ,जब आप बहुत उत्साहित हुई हो?
00 पद्मविभूषण लेकर, वह बहुत ही जीवन का असीम क्षण है। और मुझे विदेशों में जब अपने ही गीतों से मेरा स्वागत करते हैं।
0 आप कई देशों में कार्यक्रम पेश करने के लिए जा चुकी है। इन देशो में समानता क्या है।
00 जब प्रोग्राम के लिए हम विदेश जाते हैं तो सब्जी चाँवल के लिए तरस  जाते है। विदेशों में उबले हुए आलू से काम चलाना पड़ता है।
0 ऐसा कोई क्षण जब निराशा मिली हो?
00 कभी नहीं। मैं कभी निराश नहीं होती।
0 पाठकों के लिए कोई सन्देश?
00 बेटियां अमूल्य धरोहर है उसकी रक्षा करे पढ़ा लिखाकर आगे बढ़ाये। बेटियों को कमजोर समझना मानव समाज की सबसे बड़ी भूल है ,उसे कमजोर मत समझो क्योकि बेटियां ही अंत तक माँ -बाप की सेवा करती है। मै भी तो एक बेटी ही हूँ जिस पर दुनिया नाज करती है।




शुक्रवार, 21 अगस्त 2015

फिल्मो में काम को महत्त्व देते है धर्मेन्द्र सोनी

छत्तीसगढ़ फिल्म इंडस्ट्री में धर्मेन्द्र सोनी का अपना वजूद है। उनका कहना है फिल्मो में वे काम को महत्त्व देते है पैसों को नहीं। पैसा कमाना उनका मकसद नहीं है , वे चाहतें है की बॉलीवुड की तरह छालीवुड फिल्मो को भी महत्त्व मिले। धर्मेन्द्र को फिल्मो में हर प्रकार की भूमिका पसंद है। थियेटर से काम शुरू करने वाले धर्मेन्द्र आज अभिनेता के साथ साथ फाइट मास्टर भी बन गए हैं। उनसे हमने हर पहलूओं पर बेबाक बात की है। प्रस्तुत है बातचीत के संपादित अंश।
0 छालीवुड की क्या सम्भावनाये दिखती है?
00 बेहतर है। आने वाले समय में यहां की फिल्मे बॉलीवुड की तरह ही चलेंगी।
0 अभी तो फिल्मे ज्यादा नहीं चल पाती है?
00 ऐसा नहीं है फिल्मे चलती है। छत्तीसगढ़ में दर्शकों की कमी है और जो दर्शक है उनकी रुझान हिन्दी फिल्मो की ऑर है।
0 तो छालीवुड की फिल्मे दर्शकों को क्यों नहीं खीच पा रही है? 
00 जल्दी जल्दी फिल्मे आने से दर्शको का मन भंग हो जाता है। राजा छत्तीसगढ़िया को देखिये कैसी भीड़ खींच रही है ही फिल्मो की जरुरत है दर्शको को। फिल्मो में कम से कम ३ माह का गेप होना चाहिए।
0 आपको एक्टिंग का शौक कब से है ?
00 मुझे एक्टिंग का शौक बचपन से ही रहा है। नाटक से मै फिल्मो में आया हूँ। एक्टिंग में रूचि बचपन से ही था पर मौका नहीं मिल रहा था। मैं बहुत कुछ करना चाहता हूँ इस क्षेत्र में ।
0 फिर मौका कैसे मिला और आपके प्रेरणाश्रोत कौन है ?
00 पहले तो छोटे-छोटे रोल किया करता था। मया दे दे मया ले ले से मैंने कॅरियर की शुरुआत की थी। काफी संघर्ष किया। मेरा कोई रोल मॉडल नहीं है।
0 कभी आपने सोचा था की फिल्मो को ही अपना कॅरियर बनाएंगे ?
00 हाँ ! शुरू से ही मै एक्टिंग को कॅरियर बनाने की सोचकर चल रहा था।
0  छालीवुड फिल्मो में आपको कैसी भूमिका पसंद है या आप कैसे रोल चाहेंगे।
00  मैं हर तरह की भूमिका निभाना चाहूंगा ताकि मुझे सभी प्रकार का अनुभव हो। छोटे बड़े सभी रोल मुझे पसंद है।
0 सरकार को आपको क्या अपेक्षाएं हैं?
00 सरकार छालीवुड को मदद करे। टाकीज बनवाए, नियम बनाये ताकि ताकिजो मालिकों की मनमानी खत्म हो जाए।
0 कोई ऐसा अवसर आया हो ,जब आप बहुत उत्साहित हुई हो?
00 फिल्म काबूली पठान के रिलीज होने पर।उसमे मैंने विलेन की भूमिका निभाई है।
0 आप फिल्मो में भूमिका को लेकर कैसा महसूस करते हैं ?
00 जब मैं कोई भूमिका निभाता हूँ तो पहले गंभीरता से मनन करता हूँ।  हूँ की डायरेक्टर क्या चाहता है।
0 ऐसा कोई क्षण जब निराशा मिली हो?
00 कभी नहीं। मैं कभी निराश नहीं होता।
0 आपका कोई सपना है जो आप पूरा होते देखना चाहती हैं?
00 मेरा सपना है कि छत्तीसगढ़ी फिल्म भी बॉलीवुड की बराबरी पर चले।

बुधवार, 12 अगस्त 2015

सभी प्रकार की भूमिका पसंद है केशव को

छत्तीसगढ़ फिल्म इंडस्ट्री में केशव वैष्णव एक जाना पहचाना नाम है। अभी हाल ही ने प्रदर्शित उनकी फिल्म असली संगवारी बिलासपुर में रिकार्ड बनाने में सफल रही है। केशव का कहना है सरकार छत्तीसगढ़ी फिल्मो को बढ़ावा दे ताकि देश के कोने कोने में इसका प्रदर्शन हो सके। छत्तीसगढ़ में फिल्मो का प्रदर्शन अनिवार्य किया जाए जिससे ताकिजो की मनमानी ख़त्म हो सके। केशव से हमने हर पहलूओं पर बेबाक बात की है। प्रस्तुत है बातचीत के संपादित अंश।
0 फिल्म असली संगवारी को लेकर आपने क्या उम्मीद की थी?
00 यह फिल्म हमारी उम्मीदों पर खरा उत्तरी है। लो बजट की फिल्म है जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया। अब पूरे छत्तीसगढ़ के ताकीजों में लगाये जाएंगे।
0 आपको एक्टिंग का शौक कब से है ?
00 मुझे एक्टिंग का शौक बचपन से ही रहा है। टीवी देख- देखकर मैं कलाकारों की नक़ल किया करता था। एक्टिंग में रूचि बचपन से ही था पर मौका नहीं मिल रहा था। मैं बहुत कुछ करना चाहता हूँ इस क्षेत्र में । मै कलाकारों को परदे पर देखता था तो मुझे अच्छा लगता था जिससे मुझे फिल्मो की और रुझान हुआ।
0 फिर मौका कैसे मिला और आपके प्रेरणाश्रोत कौन है ?
00 पहले तो छोटे-छोटे रोल किया करता था। चंदू और चांदनी से मैंने कॅरियर की शुरुआत की थी। काफी संघर्ष किया। मेरा कोई रोल मॉडल नहीं है।
0 कभी आपने सोचा था की फिल्मो को ही अपना कॅरियर बनाएंगे ?
00 हाँ ! शुरू से ही मै एक्टिंग को कॅरियर बनाने की सोचकर चल रहा था।
0  छालीवुड फिल्मो में आपको कैसी भूमिका पसंद है या आप कैसे रोल चाहेंगे।
00  मैं हर तरह की भूमिका निभाना चाहूंगा ताकि मुझे सभी प्रकार का अनुभव हो। छोटे बड़े सभी रोल मुझे पसंद है।
0 सरकार को आपको क्या अपेक्षाएं हैं?
00 सरकार अभिभावक की भूमिका में आये और छालीवुड को मदद करे। टाकीज बनवाए, नियम बनाये ताकि ताकिजो मालिकों की मनमानी खत्म हो जाए। 
0 कोई ऐसा अवसर आया हो ,जब आप बहुत उत्साहित हुई हो?
00 फिल्म असली संगवारी के रिलीज होने पर।
0 आप फिल्मो में भूमिका को लेकर कैसा महसूस करते हैं ?
00 जब मैं कोई भूमिका निभाता हूँ तो मुझे गर्व मेहसूस होता हैं की मैं अपने रोल को बखूबी से कर पा रहा हूँ। सभी करेक्टर का अध्ययन करता हूँ फिर कैमरे के सामने आता हूँ।
0 रील लाइफ और रीयल लाइफ में क्या अंतर है?
00 दोनों अलग अलग चीज है। रील लाइफ चुनौतीपूर्ण होती है उसमे कई करेक्टर होते है और रियल लाइफ में एक ही करेक्टर को जीना होता है।
0 ऐसा कोई क्षण जब निराशा मिली हो?
00 कभी नहीं। मैं कभी निराश नहीं होता।
0 आपका कोई सपना है जो आप पूरा होते देखना चाहती हैं?
00 मेरा सपना है  कि मै छत्तीसगढ़ी फिल्म को देश के कोने कोने में लोग देखे।

रविवार, 9 अगस्त 2015

नाम और शोहरत चाहती है अहाना

सफल अभिनेत्री बनने की तमन्ना है
छत्तीसगढ़ फिल्म इंडस्ट्री में अहाना फ्राँसिस एक नया नाम है, लेकिन कला उनमे कूट-कूट कर भरा हुआ है। अहाना को फिल्मो में काम करने का जूनून है। वह कहती है कि उनकी तमन्ना एक सफल अभिनेत्री बनने की है पर वह सभी प्रकार की भूमिका निभाना चाहती ताकि उन्हें एक नया अनुभव हो। उन्हें छालीवुड में सिर्फ नाम और शोहरत चाहिए। लोगो का प्यार और तालियां मुझे मिला तो मुझे अपार खुशी होगी। अहाना से हमने हर पहलूओं पर बेबाक बात की है। प्रस्तुत है बातचीत के संपादित अंश।
0 आपको एक्टिंग का शौक कब से है ?
00 मुझे एक्टिंग का शौक बचपन से ही रहा है। टीवी देख- देखकर मैं कलाकारों की नक़ल किया करती थी। अभी तो मेरे  कॅरियर की शुरुआत है । एक्टिंग में रूचि बचपन से ही था पर मौका नहीं मिल रहा था। मैं बहुत कुछ करना चाहती हूँ इस क्षेत्र में ।
0 फिर मौका कैसे मिला और आपके प्रेरणाश्रोत कौन है ?
00 मेरी प्रेरणाश्रोत मेरी माँ अंजना फ्रांसिस ही है ही हैं । हर वक्त वो मेरे साथ होती है। अच्छे बुरे सभी पलों में मुझे उनका साथ मिला और मैं आत्मविश्वास से काम करने लगी । उन्होंने ही मुझे इस लाईन में काम करने के लिए प्रेरित किया है। बगैर परिवार के सहयोग के इस लाईन में काम करना संभव नहीं था । और मौका मुझे मनोजदीप के चलते मिला।
0 कभी आपने सोचा था की फिल्मो को ही अपना कॅरियर बनाएंगी ?
00 नहीं ! पर मुझे रुचि थी। मेरी माँ चाहती थी की परिवार से कोई इस क्षेत्र में आये। उनकी इच्छा से मैं फिल्मो में आई हूँ । उनका सपना मुझे पूरा करना है।
0  छालीवुड फिल्मो में आपको कैसी भूमिका पसंद है या आप कैसे रोल चाहेंगी।
00 वैसे तो मुझे लीड रोल करने की इच्छा है फिर भी मैं हर तरह की भूमिका निभाना चाहूंगी ताकि मुझे सभी प्रकार का अनुभव हो।
0 आपको फिल्मों में सबसे ज्यादा कौन पसंद है?
00 दीपिका पादुकोण , मैं उनकी एक्टिंग पर फि़दा हूँ। जब वो भूमिका में होती हैं तो एकदम सच लगता है।
0 कोई ऐसा अवसर आया हो ,जब आप बहुत उत्साहित हुई हो?
00 जब पहली बार मुझे फिल्मो में काम मिला ।
0 आपने पहली फिल्म बेर्रा की है , तो आपको कैसा महसूस हुआ , कोई चूनौती तो नहीं ?
00 जब मैं कोई भूमिका निभाती हूँ तो मुझे गर्व मेहसूस होता हैं की मैं अपने रोल को बखूबी से कर पा रही हूँ। बेर्रा मेरी पहली फिल्म है। मुझे अपनी भूमिका अच्छा ही लगा। कोई चुनौती नहीं थी।
0 रील लाइफ और रीयल लाइफ में क्या अंतर है?
00 दोनों अलग अलग चीज है। रील लाइफ चुनौतीपूर्ण होती है उसमे कई करेक्टर होते है और रियल लाइफ में एक ही करेक्टर को जीना होता है।
0 ऐसा कोई क्षण जब निराशा मिली हो?
00 कभी नहीं। मैं कभी निराश नहीं होती, क्योकि मेरे माता-पिता का प्यार साथ होता है।
0 आपका कोई सपना है जो आप पूरा होते देखना चाहती हैं?
00 मेरा सपना है  कि मै एक सफल अभिनेत्री बनूँ और खूब नाम और शोहरत कमाऊं । मैं अपने इस सपने को पूरा होते देखना चाहती हूँ।

मंगलवार, 4 अगस्त 2015

पतिव्रत भारतीय नारी शैव्या

पद्मपुराण में पतिव्रत शैव्या की कथा का विस्तार में वर्णन मिलता है। हिंदू पौराणिक ग्रंथ की इस कथा के अनुसार बहुत समय पहले प्रतिष्ठानपुर नामक नगर में कौशिक नाम का एक ब्राह्मण रहता था। वह कोढ़ से पीढ़ित था। उसके रिश्तेदार उसे छोड़कर चले गए लेकिन उसकी पत्नी शैव्या उसे देवता के समान ही पूजती थी।
कौशिक बड़ा ही क्रोधी स्वभाव का था। वह शैव्या का अपमान करता लेकिन वह सुनती रहती। एक दिन कौशिक ने शैव्या से कहा, 'कुछ दिन पहले मैंने यहां एक सुंदर वैश्या को जाते देखा था। क्या तुम मुझे उसके पास ले चलोगी।'
यह सुकर शैव्या को क्रोध नहीं आया बल्कि वह पहले उस वैश्या के घर गई। वैश्या ने उससे कहा आधी रात को अपने पति को मेरे घर ले आना। यह सुनकर शैव्या अपने घर लौट आई।
रात के समय अपने पति को कंधे पर उठाकर शैव्या वैश्या के घर चल पड़ी। उसने रास्ते में देखा। मार्ग में एक सूली थी जिस पर चोरी के संदेह में माण्डव ऋषि को उस पर चढ़ा दिया था। हालांकि ऋषि अपनी मंत्र शक्ति से बच सकते थे लेकिन वह बचपन में चीटियों को कांटे चुभोया करते थे। वह जानते थे यह सजा उसी के फलस्वरूप मिली है।
वहां काफी अंधेरा था, जिसके चलते शैव्या के पति का पैर सूली से लग गया, जिससे सूली हिलने लगी और ऋषि का दर्द बढ़ गया। ऋषि ने शाप दिया, जिसने भी इस सूली को हिलाया है। सूर्य उदय होने से पहले उसकी मृत्यु हो जाए।
तब शैव्या बोली, 'हे ऋषि मेरे पति का पैर अनजाने में आपकी सूली से लग गया है। कृपया शाप वापस ले लें।' ऋषि ने मना कर दिया। तब शैव्या बोली, 'ऋषिवर आप शाप वापस ले लें अन्यथा कल सूर्य उदय नहीं होगा।' इतना कहकर वह अपने पति को वैश्या के घर की ओर ले जाने लगी।
पतिव्रता शैव्या के वचन के चलते सूर्य उदय नहीं हुआ। ऐसा कई दिनों तक चलता रहा। चारों तरफ तबाही का मंजर था। यह देख सभी देवतागण, ब्रह्माजी के पास पहुंचे। तब ब्रह्माजी ने कहा, शैव्या ही इस समस्या का निराकरण कर सकती हैं।
ब्रह्माजी पतिव्रता नारी शैव्या के पास पहुंचे। शैव्या ने ब्रह्माजी को बताया कि ऋषि अगर सूर्य उदय हुआ तो उसके पति की मृत्यु हो जाएगी। तब ब्रह्माजी बोले, तुम अपने वचन वापस ले लो, में तुम्हारे पति को स्वस्‍थ करके पुनः जीवित कर दूंगा। शैव्या ने ऐसा ही किया और अपने पति के प्राण भी बचा लिये। कौशिक जब स्वस्‍थ हुआ तो उसे अपनी गलती का अहसास हुआ। इस तरह दोनों दंपत्ति सुखपूर्वक रहने लगे। तो ऐसी थीं पतिव्रत भारतीय नारी शैव्या।

रविवार, 2 अगस्त 2015

मॉडलिंग से अभिनय की ओर तान्या

सफल अभिनेत्री बनने की तमन्ना है
मिस ब्यूटीफूल फेश आफ सेन्ट्रल इंडिया तान्या तिवारी मॉडलिंग में अपना जादू बिखेरने के बाद अब फिल्मो में भाग्य आजमा रही है। भोजपुरी फिल्म इन्साफ की जंग में
बतौर अभिनेत्री काम कर रही तान्या की दिली ख्वाहिश एक सफल अभिनेत्री बनने की है। वह किसी भी बात को लेकर कभी निराश नहीं होती है। आइना के सामने डांस कर माधुरी की नक़ल करने वाली तान्या छत्तीसगढ़ी और हिन्दी फिल्मो में काम करने की इच्छा रखती है। एक्टिंग और डांस उनका शौक है। तान्या से हमने हर पहलूओं पर बेबाक बात की है। प्रस्तुत है बातचीत के संपादित अंश। 
0 आपको एक्टिंग का शौक कब से है ?
00 मुझे एक्टिंग का शौक बचपन से ही रहा है। पहले मै मॉडलिंग करती थी। मॉडलिंग से ही मैंने अपना कॅरियर की शुरुआत की। एक्टिंग में रूचि बचपन से ही था पर मौका नहीं मिल रहा था। 
0 फिर मौका कैसे मिला और आपके प्रेरणाश्रोत कौन है ?
00 मेरी प्रेरणाश्रोत मेरी माँ रश्मि तिवारी ही हैं । हर वक्त वो मेरे साथ होती है। अच्छे बुरे सभी पलों में मुझे उनका साथ मिला और मैं आत्मविश्वास से काम करने लगी । उन्होंने ही मुझे इस लाईन में काम करने को प्रेरित किया। 
0 मॉडलिंग से अभिनय की ओर आपका रुझान कैसे हुआ ?
00 मॉडलिंग तो शुरुवात है एक्टिंग मेरी रूचि रही है । मैं मूवी देखकर आती और आईना के सामने खड़े होकर डांस और एक्टिंग करती थी। 
0 मिस ब्यूटीफूल फेश आफ सेन्ट्रल इंडिया कैसे बनी 
00 बहुत तैयारी की थी। यह कॉम्पीटिशन मैंने रायपुर में ही जीती थी,तब से मुझे फिल्मो का ऑफर मिलाने लगा था। भोजपुरी फिल्म भी ऐसे ही मिली है। 
0 आपको फिल्मों में सबसे ज्यादा कौन पसंद है?
00 माधुरी दीक्षित , मैं उनकी एक्टिंग पर फि़दा हूँ। जब वो भूमिका में होती हैं तो एकदम सच लगता है। 
0 कोई ऐसा अवसर आया हो ,जब आप बहुत उत्साहित हुई हो?
00 मिस ब्यूटीफूल फेश आफ सेन्ट्रल इंडिया का खिताब जीतने पर । 
0 आपने पहली फिल्म की है , तो आपको कैसा महसूस होता है?
00 जब मैं कोई भूमिका निभाती हूँ तो मुझे गर्व मेहसूस होता हैं की मैं अपने रोल को बखूबी से कर पा रही हूँ। 
0 रील लाइफ और रीयल लाइफ में क्या अंतर है?
00 दोनों अलग अलग चीज है। रील लाइफ चुनौतीपूर्ण होती है उसमे कई करेक्टर होते है और रियल लाइफ में एक ही करेक्टर को जीना होता है। 
0 ऐसा कोई क्षण जब निराशा मिली हो?
00 कभी नहीं। मैं कभी निराश नहीं होती, क्योकि मेरी माँ मेरे साथ होती है। 
0 आपका कोई सपना है जो आप पूरा होते देखना चाहती हैं?
00 मेरा सपना है  कि मै एक सफल अभिनेत्री बनूँ और खूब नाम कमाऊं । मैं अपने इस सपने को पूरा होते देखना चाहती हूँ।