शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2015

राज्योत्सव में अपमानित होने से दुखी है भानुमति

० कलाकारों का सम्मान करे सरकार 
रायपुर। राष्ट्रीय सम्मान से नवाजी जा चुकी छत्तीसगढ़ की लोकगायिका भानुमति कोसरे राज्योत्सव २०१४ में अपमानित होने से दुखी है। उनका कहना है कि सरकार के नुमाईंदे राज्य के कलाकारों का सम्मान करना सीखे क्योकि वे सम्मान के ही भूखे होते है। दूरदर्शन रायपुर,भोपाल के लिए लोकगीत गए चुकी भानुमति बताती है कि परिवार वालों के विरोध के बाद भी वे इस क्षेत्र में  बनाई है। १५ छत्तीसगढ़ी फ़िल्में, कई एल्बम और स्टेज शो कर चुकी भानुमति लोकगायिका के लिए राष्ट्रीय एवार्ड से सम्मानित हो चुकी है। उनसे हमने हर पहलूओं पर बात की है पेश है बातचीत के संपादित अंश। 
------------------------
संक्षिप्त परिचय 
० नाम -   भानुमति कोसरे  
० कला-    लोकगायिका, फिल्म अभिनेत्री 
० चर्चित फिल्म - कारी,ऐसे होते प्रीत, पठौनी के चक्कर 
                           भुला जहां देबे, सजना मोर 
० आगामी फिल्म - छलिया, मया २ , सिधवा सजन 
० अवार्ड -  लोकगीत का राष्ट्रीय अवार्ड 
               बाबा साहेब आम्बेडकर कलाश्री , 
                केरल साहब आम्बेडकर कलाश्री 
० उपलब्द्धी - १५ छत्तीसगढ़ी फिल्मे, विज्ञापन , दूरदर्शन में काम 
पता -       भिलाईनगर , जिला -दुर्ग 

० आपको गाने का और अभिनय का शौक कैसे हुआ?
०० बचपन से ही मुझे गाने का शौक था। मै पंडवानी देख देखकर मुझे भी इच्छा हुई और मै गायिकाओं की कापी करने लगी। 
० परिवार का कितना सहयोग मिला?
०० कभी नही मिला। जब मै गाने की नक़ल करती थी तब मेरी दादी डांटती थी, बोलती थी - नाचबीन बनबे का। 
० फिर कैसे आ गयी इस क्षेत्र में , परिजनों ने रोका नहीं?
० ० सबसे पहले सोनहा बिहान के लिए गाना गई थी तब मुझे काफी विरोध का सामना करना पड़ा था। लेकिन मैंने कदम पीछे नहीं हटाई और आगे बढ़ती चली गयी। 
० आप अपना प्रेरणाश्रोत और आदर्श किसे मानती है?
०० मेरी माँ तीरथ बाई मेरी प्रेरणाश्रोत रही है वे रेडियो के लिए गाती थी जब मै क्लास दो में थी तब से रेडियो सुनटी रही हूँ। 
० कितने फिल्मो में अकाम कर चुकी है और कौन सा फिल्म आपको अच्छी लगी?
०० मैंने १५ फिल्मो में काम की है और मया की डोरी मेरी सबसे अच्छी फिल्म उसमे मैंने विलेन की भूमिका की है। 
० कभी आपको निराशा महसूस हुई है/
०० हाँ! एक बार एक भावनात्मक डायलॉग बोलते समय मुझे काफी निराशा हुई थी। मुझे अकेली होने का एहसास हुई थी। बहुत पीड़ा हुई अपने पति की याद में मै रो पडी थी। 
० कभी उत्साह का कोई क्षण आया हो?
०० फिल्म छलिया में एक लड़की की  समय मै बहुत ही उत्साहित हुई थी। 
० छत्तीसगढ़ी फिल्मो में आपको कौन से कलाकार पसंद है?
०० प्रदीप शर्मा! उनके साथ काम करके मुझे बहुत ही अच्छा लगा था और सीखने को भी मिला था। उस फिल्म में वह मेरे पति की भूमिका में थे। 

रविवार, 4 अक्टूबर 2015

यूँ ही आ गयी एक्टिंग में, डांस मेरा शौक है

मेरी आशिकी तुमसे ही की नायिका राधिका मैदान से ख़ास चर्चा 
- अरुण कुमार बंछोर
"मेरी आशिकी तुमसे ही की " नायिका राधिका मैदान कहती है कि एक्टिंग में तो मैं यूँ ही आ गयी। मेरा शौक तो डांस है और मैं डांसर ही बनाना चाहती थी। इसके लिए मैंने काफी तैयारी भी की थी। एक प्रश्न के उत्तर में राधिका हंसती हुई कहती है कि एकता कपूर के सीरियल में तो कई कई शादी होना तो सामान्य बात हैं, हो सकता है इतनी मुझे भी करनी पड़े। टीवी धारावाहिक की नायिका राधिका मैदान अपने निजी प्रवास पर रायपुर आई तो हमने उनसे कई पहलूओं पर बेवाक बात की।
0 आपको एक्टिंग का शौक कैसे हुआ?
00 एक्टिंग में तो मैं यूँ ही आ गयी। मैं एक्टिंग में नहीं आना चाहती थीं। पर अब धारावाहिक में काम करना अच्छा लग रहा है।
0 फिर किस क्षेत्र में कॅरियर बनाना चाह रही थी?
00 डांसिंग में ! डांस मेरा शौक भी है और पसंदीदा चाह भी। डांस की ट्रेनिंग लेने यूएस जाने का प्लान भी कर ली थी। लेकिन जाने से पहले सीरियल मिल गई , तो नहीं जा पाई।
0 कभी-कभी एक्टिंग में आपको आलोचना भी सहनी पड़ती होगी ?
00 हाँ जरूर ! जो जितना सफल होते है उतने ही उनके ज्यादा दुश्मन होते है।
0 आपको सीरियल कैसे मिला ?
00 आर्टिस्ट सलेक्शन क्रू के कुछ मेंबर्स ने फेसबुक पर मेरा फोटो देखा और सीरियल के ऑडिशन के लिए बुलाया।फिर मैंने आडिशन दिया। किरदार के चेहरे पर जो मासूमियत चाहिए थी, वह सलेक्शन टीम को मेरे चेहरे में नजर आई और मुझे रोल दे दिया गया।
0 आपने झलक दिखला जा में भी हिस्सा लिया था?
00 बहुत अच्छा अनुभव रहा। मुझे काफी कुछ सीखने को मिला। जल्दी बाहर होने का भी मुझे ज्यादा दुख नहीं हुआ। आगे और कोशिश करूंगी।
0  इस क्षेत्र  में कभी निराशा हुई है ?
00 कभी नहीं! मैं कभी निराश नहीं होती।
0  और कभी ऐसा क्षण हो आया हो जब आप बहुत ज्यादा उत्साहित हुई हो?
00 हमेशा उत्साहित रहती हूँ। क्योकि मेरे परिवार मेरे साथ है।
0 आपको इसके लिए परिवार से कितना सहयोग मिलता है?
00 पूरा सहयोग मिलता है। एक लड़की होने के बाद भी मेरे माता-पिता ने मुझे कभी बंधन में नहीं रखा। यहां भी खूब मेहनत कर रही हूं। कभी-कभी तो पापा कहते हैं, ज्यादा शूटिंग करती हो, इतना काम करने की क्या जरूरत है। अगर अभी भी लगता है, तो वापस आ जाओ। मैं कॉलेज लाइफ मिस करती हूं, लेकिन मुझे कॅरियर बनाना है तो सब ठीक है।
0 ऐसा आपका कोई सपना जो आप पूरा होते हुए देखना चाहती हों?
00 अब और कोई तमन्ना नहीं है बस एक्टिंग में ही आगे जाना चाहती हूँ। पहले सोचती थी डांसिंग स्टार बनूंगी पर मौका मिला तो एक्टिंग में आ गई।अब इसी को कॅरियर बनाउंगी।


मंगलवार, 29 सितंबर 2015

आशिक आवारा में मेरा किरदार कुछ हटकर है : निरहुआ

भोजपुरी फिल्मों के स्टार दिनेश लाल यादव 'निरहुआ' इन दिनों अपनी आनेवाली फिल्म 'आशिक़ आवारा' में व्यस्त हैं। उनकी फिल्मो में वो सब कुछ होती है जो दर्शको को चाहिए। फिल्म बनाने के पहले वे इस पर गहन अध्ययन करते है। पेश है उनसे बातचीत के मुख्य अंश:
0 आशिक़ आवारा' के बारे में कुछ बताइये?
00 आशिक़ आवारा की शूटिंग अभी शुरू की गई है। फिल्म एक अलग कांसेप्ट पर बन रही है। इसमें मेरा किरदार मेरी अब तक की सभी फिल्मों से काफी अलग है।
0 आपका किरदार किस तरह का है?
00 मुझे अब तक दर्शकों ने साधारण किरदारों में देखा है। कभी गांव के सीधे-सादे लड़के के रूप में तो कभी गरीब लड़के की रूप में,  लेकिन इस फिल्म में मैं बिजऩेस आइकॉन बना हूं जो अपने काम को लेकर काफी गंभीर रहता है।
0 इस फिल्म में आप फिर एक बार आम्रपाली के साथ हैं। क्या आप मानते हैं कि आपकी जोड़ी हिट है? 
00 फिल्मों को मिले रिस्पांस और दर्शकों की प्रतिक्रिया को देखकर तो यही लगता है। दर्शक भी मुझे कई बार कहते हैं कि मेरी जोड़ी आम्रपाली के साथ उन्हें बहुत अच्छी लगती है।
 0 'आशिक़ आवारा' के निर्देशक सतीश जैन के बारे में क्या कहेंगे?
00 सतीश जैन ने 'आशिक़ आवारा ' से पहले 'निरहुआ हिंदुस्तानी', 'निरहुआ रिक्सावाला 2' बनाई है। 'आशिक़ आवारा' की कहानी इतनी अनोखी है कि मैंने फौरन हां कह दी।
0 आपकी आनेवाली फिल्मे कौन-कौन सी है?
00 आशिक़ आवारा' की शूटिंग पूरी करने के बाद 'मोकामा जीरो किलोमीटर' की शूटिंग करनेवाला हूँ। उसके बाद 5-6 फिल्में हैं जिसके बारें में जल्दी ही आप सबको पता चल जाएगा।

धर्मेन्द्र चौबे का थियेटर से फिल्मो तक का सफर

इतिहास बनाना ही मेरा मकसद है 
जिस दिन मरुँ लोग मेरे पीछे चले 
छत्तीसगढ़ फिल्म इंडस्ट्री में धर्मेन्द्र चौबे को कौन नहीं जानता वे एक जाना पहचाना नाम है। अभी हाल ही ने प्रदर्शित उनकी फिल्म राजा छत्तीसगढिय़ा सिनेमा घरों में काफी धूम मचा रही है। वे कहतें हैं कि इतिहास बनाना ही मेरा मकसद है और जिस दिन मरुँ लोग मेरे पीछे चले । थियेटर से कॅरियर की शुरुआत करने वाले धर्मेन्द्र अब तक 36 फिल्मो में अपनी अभिनय का लोहा मनवा चुके है। इसके अलावा वे निर्देशक, निर्माता और शानदार विलेन भी है । उनसे हमने हर पहलूओं पर बेबाक बात की है। प्रस्तुत है बातचीत के संपादित अंश।
0 फिल्म राजा छत्तीसगढिय़ा के शानदार प्रदर्शन की उम्मीद थी ?
00 यह फिल्म हमारी उम्मीदों पर खरा उत्तरी है। इसे दर्शकों ने खूब पसंद किया। पूरे छत्तीसगढ़ के टाकीजों में धूम मचा रही है । इससे यही सन्देश जाता है कि छत्तीसगढ़ी फिल्मों के अच्छे दिन आ गए हैं। इस फिल्म में हमारी कल्चर दिखती है फिर सबने अच्छी मेहनत की थी । जिसका परिणाम है।
0 आपको एक्टिंग का शौक कब से है ?
00 मुझे एक्टिंग का शौक बचपन से ही रहा है। 1996 में मै थियेटर से जुड़ा फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा । फिल्म देख- देखकर मैं कलाकारों की नक़ल किया करता था। एक्टिंग में रूचि बचपन से ही था पर मौका नहीं मिल रहा था। मैं बहुत कुछ करना चाहता हूँ इस क्षेत्र में ।
0 फिर मौका कैसे मिला और आपके प्रेरणाश्रोत कौन है ?
00 फिल्म छईंया भुईंया की शूटिंग देखने सुरेश निगम के साथ गया था ,जहां मुझे सतीश जैन जी ने पूछा - एक्टिंग में रूचि है ,जब मैंने हाँ कहा तो उसी फिल्म में मुझे काम दिया । जो सबको पसंद आया।
0 कभी आपने सोचा था की फिल्मो को ही अपना कॅरियर बनाएंगे ?
00 हाँ ! शुरू से ही मै एक्टिंग को कॅरियर बनाने की सोचकर चल रहा था।
0  छालीवुड फिल्मो में आपको कैसी भूमिका पसंद है या आप कैसे रोल चाहेंगे।
00  मैं हर तरह की भूमिका निभाना चाहूंगा ताकि मुझे सभी प्रकार का अनुभव हो। छोटे बड़े सभी रोल मुझे पसंद है। पर विलेन की भूमिका मुझे ज्यादा पसंद है।
0 सरकार से क्या अपेक्षाएं हैं?
00 सरकार अभिभावक की भूमिका में आये और छालीवुड को मदद करे।
0 कोई ऐसा अवसर आया हो ,जब आप बहुत उत्साहित हुई हो?
00 हमेशा उत्साहित रहता हूँ । इसके लिए कोई ख़ास समय की जरुरत नहीं होती ।
0 ऐसा कोई क्षण जब निराशा मिली हो?
00 कभी नहीं। मैं कभी निराश नहीं होता। हारने जैसे माहौल में भी ऊर्जा पैदा करता हूँ।
0 आपका कोई सपना है जो आप पूरा होते देखना चाहती हैं?
00 इतिहास बनाना ही मेरा मकसद है । जिस दिन मरुँ लोग मेरे पीछे चले ।
0  आप फिल्म करवट बनाने जा रहे हैं । ये आईडिया कहाँ से मिला?
00 फिल्म मांझी देखकर। उस फिल्म का कांसेप्ट मुझे बहुत ही पसंद आया फिर सोचा की ऐसा मैं भी कुछ करूँ।



संगीत मेरा शौक नहीं इबादत है : अनिल

0 मुकेश की हूबहू आवाज निकालते है 
प्रशासनिक अधिकारी अनिल कोचर संगीत की दुनिया में एक जाना पहचाना नाम है। मुकेश की आवाज में वे जब गाते है तो लोगो को पुराने दिन याद आ जाते हैं और वे अपने बीच मुकेश के होने का एहसास करते हैं। शासकीय सेवा में आने से पहले ही अनिल कोचर संगीत का जादू बिखेरने की राह पर चल पड़े थे। वे कहते हैं कि संगीत मेरा शौक नहीं इबादत है। आनंद जी कल्याण जी से सम्मानित होकर अनिल बेहद गौरान्वित महसूस करते हैं। टी सीरीज में उनका एल्बम मौजूद है। साथ ही दिशा टीवी में काव्यांजली में वे अपनी आवाज का जादू दिखा चुके हैं। प्रस्तुत है बातचीत के संपादित अंश।
0 आपको गाने का शौक कब से है ?
00 मुझे गाने का शौक बचपन से ही रहा है।  गाने में रूचि शुरू से ही था पर मौका नहीं मिल रहा था। मैं बहुत कुछ करना चाहता हूँ इस क्षेत्र में ।
0 आप मुकेश की आवाज में कैसे गा लेते हैं?
00 इसके लिए मैंने बहुत ही प्रेक्टिस की है और मेरी मेहनत का ही फल है कि आज मैं इस मुकाम पर हूँ।
0 सरकारी नौकरी में होते हुए भी आप गाने के लिए समय कैसे निकाल लेते हैं?
00 निकालना पड़ता है वह भी जीवन का एक हिस्सा है। मन में लगन हो तो सब कुछ संभव है।
0 आज के युवा पुराने गीतों को महत्त्व नहीं देते क्यों?
00 ऐसा नहीं है आज भी पुराने गानों के प्रति लोगो का रुझान है। पुराने गीत सदाबहार है और रहेंगे।
0 आपके प्रेरणाश्रोत कौन है ?
00  मैंने अपने से ही गाने की शुरुआत  की है और काफी संघर्ष भी किया है। मेरा कोई रोल मॉडल नहीं है।
0 कभी आपने सोचा था की गानों में इतना लोकप्रिय हो जाएंगे?
00 नहीं ! पर अब लगता है कि गाने ने मुझे ज्यादा लोकप्रिय बना दिया है।
0 कोई ऐसा अवसर आया हो ,जब आप बहुत उत्साहित हुई हो?
00 जब कल्याण जी ने मुझे बेहतर गाने और आवाज के लिए सम्मानित किया था।
0 ऐसा कोई क्षण जब निराशा मिली हो?
00 कभी नहीं। मैं कभी निराश नहीं होता।
0 आपका कोई सपना है जो आप पूरा होते देखना चाहते हो ?
00 मेरा सपना है कि गानों में बॉलीवुड में छा जाऊं।



छत्तीसगढ़ की मनाली बॉलीवुड में मचाएगी धूम

0 आनंद जी और अनूप जलोटा से है प्रभावित 
आकाशवाणी और दूरदर्शन में एंकरिंग से अपनी कला की शुरुआत करने वाली गायिका मनाली सांखला आज लोगो के बीच एक जाना पहचाना नाम है। मशहूर संगीतकार आनंद जी और भजन गायक अनूप जलोटा से प्रभावित मनाली इन दोनों के ही नहीं बल्कि बॉलीवुड के तमाम दिग्गज संगीतकारों के चहेती बन गयी है। टी सीरीज में जसगीत का एल्बम जल्द ही आने वाली है। साथ ही हिन्दी फिल्मो में उनकी आवाज भी लोगो के कानों में गूंजेगी। मनाली को लता जी प्रेरणा मिली है तो आनंद जी उन्हें गाने की कला सिखातें हैं। मनाली सांखला को बॉलीवुड के सभी मनाली से हमने हर पहलूओं पर बात की है।
मनाली को गाने का शौक बचपन से ही रहा है। उनके पति दर्शन सांखला एक मशहूर टी वी एंकर और धारावाहिक काब्यांजली के होस्ट है। मनाली की आवाज जल्द ही टी सीरीज के एल्बमों में सुनने को मिलेगी। प्रभु इशू पर तीन एल्बम बनने जा रही है जो मनाली की आवाज में होगी। साथ ही टी सीरीज उनकी आवाज पर एक जसगीत का एल्बम बना रहां है। मनाली कहती है कि मैं बहुत ही सौभाग्यशाली हूँ कि मुझे बॉलीवुड के तमाम बड़े संगीतकारों का प्यार और साथ मिलता है। अनूप जलोटा जी मेरे सात गाने सुनकर बहुत प्रभावित हुए थे। आनंद जी मुझे गाने की कला बतातें है। मशहूर फिल्म निर्देशक मोंटी शर्मा मुझसे बहुत ज्यादा भरोसा करते हैं उनके आने वाली फिल्मो में मेरी आवाज सुनाई देंगी। बॉलीवुड की दुनिया में कदम रखकर मैं  बहुत ही गौरान्वित हूँ। मेरी कोशिश होगी की छत्तीसगढ़ का नाम मैं दुनिया के पटल पर फैला सकूँ। मनाली सांखला को बॉलीवुड के सभी बड़े गीतकार और संगीतकारों से सीखने का सौभाग्य मिला है। छत्तीसगढ़ की वह पहली महिला है जिसे तमाम दिग्गजों ने अपना प्यार और साथ दिया है।
मुझे अपनी पत्नी पर गर्व है : दर्शन 
मशहूर टीवी एंकर दर्शन सांखला का कहना है कि मुझे अपनी पत्नी मनाली और उसकी कला पर गर्व है। उनकी आवाज में वो जादू है जो दुनिया भर के कलाप्रेमी को आकर्षित करने की क्षमता रखती है । बॉलीवुड के सभी छोटे बड़े संगीतकार उनकी आवाज से प्रभावित है। जल्द ही मनाली बॉलीवुड की शान बने यही मेरी तमन्ना है।




कविता लिखना बहुत बड़ी चुनौती है : सुनीता शर्मा

जितने सफल होंगे उतने ही ज्यादा दुश्मन होते हैं
रायपुर।  घर, नौकरी और साहित्य की जिम्मेदारी बखूबी निभाने वाली सुनीता शर्मा एक जाना पहचाना नाम है। कई कवि सम्मेलनों में अपनी कविताओं का लोहा मनवा चुकी सुनीता कविता लिखने और स्टेज पर कविता पाठ करने को सबसे बड़ी चुनौती मानती है। माता पिता की प्रेरणा से लेखन में कदम रखने वाली सुनीता की दिली इच्छा अंतर-राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने की है। गौमाता की सबसे बड़ी भक्त सुनीता गौरक्षा पर कविता लिखकर देश को गौरक्षा का सन्देश देना चाहती हैं। वे कहती है कि जो जितना सफल होते है उतने ही उनके ज्यादा दुश्मन होते है। उनकी कविता संग्रह समर्पण बाज़ार में उपलब्ध है जिसमे 50 कविताओं का समावेश है। सुनीता शर्मा से हमने हर पहलूओं पर बेवाक बात की है। पेश है बातचीत के संपादित अंश।                                  -  अरुण कुमार बंछोर
-----------------------------------------------------
संक्षिप्त परिचय 
0 नाम                - सुनीता शर्मा
0 शिक्षा              - बी काम , एम ए , बीजेएमसी
0 व्यवसाय           - नौकरी महिला प्रकोष्ठ अधिकारी जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, रायपुर
0 रुचि                - लेखन , पेंटिंग , तीर्थाटन
0 उपलब्धि           - कविता संग्रह समर्पण
                     - नायिका अवार्ड , ब्रम्ह सम्मान , चिंगारी सम्मान , स्त्री शक्ति सम्मान ,
                       उत्कृष्ट कर्मचारी सम्मान, सावन क्वीन सम्मान, पावन कवियित्री सम्मान ,
                       लाखे पुरूस्कार , गौपालन गौरक्षा सम्मान ।
-----------------------------------------------------
0 कविता लिखने की ओर रुझान कैसे हुआ?
00 बचपन से ही मेरा रुझान इस ओर रहा है। बचपन में कुछ ना कुछ करती रहती थी। स्कूल में थी तो माँ -बाप बहुत प्रेरित करते थे। उसी माहौल में लिखना सीखा है।
0 मतलब पारिवारिक माहौल ने ही आपको लिखना सिखाया?
00 हाँ ! मेरे पापा स्वर्गीय वी एल शर्मा ओर माता श्रीमती सरोज शर्मा ही मेरे आदर्श है। उसके बाद मेरे पति अश्विनी कुमार शर्मा का बहुत बड़ा सहयोग रहा है तभी आज मैं इस मुकाम पर हूँ।
0 घर परिवार और नौकरी के बीच कविता लिखने के लिए समय कैसे निकाल पाती हैं?
00 जिस समय मूड होता है उसी समय लिखती हूँ। खासकर रात में या कही सफर पर होती हूँ तो लिखती हूँ। ज्यादातर मै सरकारी नौकरी में होने के कारण दौरे पर होती हूँ तो समय रास्ते में समय का उपयोग करती हूँ।
0 कभी-कभी आपको आलोचना भी सहनी पड़ती होगी ?
00 हाँ जरूर ! जो जितना सफल होते है उतने ही उनके ज्यादा दुश्मन होते है।
0 कविता लिखना कितनी बड़ी चुनौती है?
00 बहुत बड़ी चुनौती लगती है । थीम ऐसा हो, जिसमे सरल , कवि मन और पाठकों के लिए हो। इसे सोचने , समझने और शब्दों में ढालना चुनौती है।
0  इस क्षेत्र  में कभी निराशा हुई है ?
00 कभी नहीं! मैं कभी निराश नहीं होती।
0  और कभी ऐसा क्षण हो आया हो जब आप बहुत ज्यादा उत्साहित हुई हो?
00 अखिल भारतीय कवि सम्मलेन का संचालन कर बहुत उत्साहित हुई थी। वो सुखद क्षण था और यादगार लम्हा।
0 आपको इसके लिए परिवार से कितना सहयोग मिलता है?
00 पूरा सहयोग मिलता है। एक लड़की होने के बाद भी मेरे माता-पिता ने मुझे कभी बंधन में नहीं रखा। और आज मेरे पति भी मेरे हर कदम में हर पल मेरे साथ होते हैं , इसलिए आज मैं इस मुकाम पर हूँ।
0 ऐसा आपका कोई सपना जो आप पूरा होते हुए देखना चाहती हों?
00 राष्ट्रीय अंतर-राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बने , यही सपना है। साथ ही गौरक्षा पर कविता लिखकर देश को गौरक्षा का सन्देश देना चाहती हूँ।