मंगलवार, 22 दिसंबर 2015

तमिलनाडू में पर्यटकों को उपलब्ध कराते हैं सभी सुविधाएं

अतिथि देवो भवः का निर्वाह करते हैं : मीणा
छत्तीसगढ़ सरकार अपना कार्यालय चलायें तो खुशी होगी

- अरुण कुमार बंछोर
रायपुर। तमिलनाडु के पर्यटन विभाग द्वारा राज्य में घूमने आए पर्यटकों के लिए टूर पैकेज की सुविधा है, जिसकी जानकारी आप यहां ऑनलाइन ले सकते हैं| सामान्य टूर पैकेज, रेल यात्रा पैकेज, विशेष पर्यटन और रद्दीकरण आदि की जानकारी भी यहां उपलब्ध है| आप भी तमिलनाडु भ्रमण की समयसीमा तय कर, टूर पैकेजों के खर्च की जानकारी घर बैठे ले सकते हैं | हम अतिथि देवो भवः का निर्वाह करते हैं। यहाँ कहना है तमिलनाडू राज्य पर्यटन विभाग कमिश्नर एवं पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक श्री हर सहाय मीणा का। वे कहते हैं कि छत्तीसगढ़ सरकार का वहां कार्यालय तो है पर बंद है वहां स्टाफ बैठाकर दफ्तर को फिर शुरू करें तो हमें खुशी होगी। श्री मीणा सरकारी दौरे पर रायपुर आये हैं। हमने उनसे हर पहलूओं पर बात की है।
० आपके राज्य में आने वाले पर्यटकों को सरकार क्या सुविधाएं उपलब्ध कराती है?
०० राज्य में घूमने आए पर्यटकों के लिए टूर पैकेज की सुविधा है। हमारे यहां अतिथि देवो भवः का निर्वाह करते हैं इसके लिए सरकार प्रतिबद्ध हैं।
० बाहर से आने वाले पर्यटकों को पर्यटन स्थलों की सम्पूर्ण जानकारी हो इसके लिए क्या व्यवस्था है?
०० राज्य के हर बस और रेलवे स्टेशनों पर सम्पूर्ण जानकारी उपलब्द्ध है। पर्यटकों को कही भी भटकना नहीं पड़ता है। पर्यटन विभाग की और से सभी भाषाओं के जानकार भी उपलब्ध कराये जाते हैं।
० तमिलनाडू को पर्यटन से कितनी आय हो जाती है?
०० देखिये आय मायने नहीं रखती, वैसे हमारा पर्यटन विकास निगम 1600 करोड़ कम मुनाफे में था। महत्वपूर्ण होता है कि कितने पर्यटक आये। हमने  पर्यटन स्थलों में मंदिरों, वन्य जीवन, भोजन, कला, संस्कृति, राज्य के संगीत से संबंधित संस्थानों को शामिल किया है।
० देश विदेश से कितने पर्यटक आते हैं और देश में स्थान क्या है?
०० तमिलनाडू का देशी पर्यटकों में पहला और विदेशी पर्यटकों में दूसरा स्थान हैं। 2014 में 3276 लाख देशी और 46 लाख 58 हजार विदेशी पर्यटकोण ने तमिलनाडू के पर्यटन स्थलों का भ्रमण किया है।
० छत्तीसगढ़ सरकार से पर्यटन को लेकर कोई अनुबंध या सहयोग है?
०० छत्तीसगढ़ सरकार से कोई मेलमिलाप नहीं है। दोनों अपने अपने पर्यटन स्थलों के लिए काम करते है। सहयोग हो सकता है। छत्तीसगढ़ सरकार का चेन्नई में अपना दफ्तर है पर स्टाफ नहीं होने के कारण बंद पड़ा हुआ है। अच्छा होगा दफ्तर को खोल दिया जाए। इससे ये होगा की जो लोग छत्तीसगढ़ से तमिलनाडू जाते हैं उन्हें छत्तीसगढ़ दफ्तर से सारी जानकारी और सुविधाये मिल जाएगी।
० तमिलनाडू में पुरातात्विक स्थानो की भरमार है। सबसे आकर्षक जगह कौन सी मानते हैं?
०० चेन्नई में पर्यटन के कई आकर्षण हैं। चेन्नई के समुद्र तट पर स्थित रिसोर्ट बहुत सुंदर हैं। मनीला तट चेन्नई का गौरव है। ऐतिहासिक सेंट जाॅर्ज किले की यात्रा आपको प्राचीन समय में खींच ले जाती है। चेन्नई में कई मंदिर, चर्च और आध्यात्मिक केन्द्र हैं। यहां के पार्थसारथी मंदिर और कपिलेश्वर मंदिर का निर्माण 13 वीं सदी में हुआ था और यह द्रविड़ वास्तुकला का नमूना है।
० इतिहास और संस्कृति को भी तमिलनाडू सरकार ने पर्यटन में शामिल किया है?
०० हाँ ,राज्य की संस्कृति से सबको परिचय कराते हैं। सन् 1851 में निर्मित चेन्नई का राजकीय संग्रहालय मद्रास संग्रहालय के नाम से लोकप्रिय है। कोलकाता के बाद यह भारत का दूसरा सबसे पुराना संग्रहालय है और यह अपने आप में किसी खजाने से कम नहीं है। कला, पुरातत्व, मावन विज्ञान, मुद्रा शास्त्र और बहुत कुछ बेहतरीन कृतियों का यहां भंडार है।

सोमवार, 21 दिसंबर 2015

कलेक्टर बनना चाहता है बाल कलाकार रज़ा खान

फिल्मो में काम करते रहेंगे 
छत्तीसगढ़ी फिल्मो में अपने अभिनय का जादू बिखरने वाले बाल कलाकार रजा खान की दिली इच्छा आईएएस की परीक्षा पास कर कलेक्टर बनने की है। अगर ऐसा होता है तो भी वे फिल्मो में काम करते रहेंगे। फिल्म दबंग देहाती में बड़े कलाकारों के साथ काम करके रज़ा खान बेहद खुश है। छालीवुड के सुपर स्टार करन खान भी उनके अभिनय के कायल हैं। रज़ा से दैनिक सन स्टार ने बेबाक बात की है।
0 फिल्म दबंग देहाती में आपका क्या रोल है और कैसे कर पाएं है?
00 ये मेरी दूसरी फिल्म है मुझे इस फिल्म में अच्छा रोल दिया गया है। इसमें मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला है। एक तो बड़े बड़े कलाकारो के साथ काम करने का मौका मिला है। इसका अपना अलग ही मजा है। करन खान के बारे में जितना सूना था उससे ज्यादा अच्छा है। बस अभी तो सीख रहा हूँ।
0 इसके पहले भी आपने करण खान के ही फिल्म में काम किया है?
00 हाँ फिल्म सिधवा सजन में मैंने उनके बचपन का किरदार निभाया है। उनके साथ काम करके मुझे बहुत ही अच्छा महसूस होता है।
0  पहली बार कैमरे के सामने आने से डर नहीं लगा?
00 नहीं इसके पहले हमेशा स्कूल के कार्यक्रमों में भाग लेता रहा हूँ।
0 आपको एक्टिंग का शौक कब से है ?
00 मुझे एक्टिंग का शौक बचपन से ही रहा है। आईना के सामने खड़े होकर एक्टिंग किया करता था तब मेरे पिता मोहम्मद निजाम खान को लगा कि मै एक अच्छा कलाकार बन सकता हूँ ।
0 फिर मौका कैसे मिला और आपके प्रेरणाश्रोत कौन है ?
00 मेरा कोई रोल मॉडल नहीं है। मेरे पिताजी ही मेरे प्रेरणाश्रोत है । करन खान ने मुझे मेरा काम देखा और मौका दिया है।
0 कभी आपने सोचा था की फिल्मो को ही अपना कॅरियर बनाएंगे ?
00 नहीं ! शुरू से ही मै एक्टिंग को कॅरियर बनाने की नहीं सोचा है और ना ही अब मेरा यह उद्देश्य है। पर इस लाईन पर काम करटा रहूँगा।
0  छालीवुड फिल्मो में आपको कैसी भूमिका पसंद है या आप कैसे रोल चाहेंगे।
00  मैं हर तरह की भूमिका निभाना चाहूंगा ताकि मुझे सभी प्रकार का अनुभव हो। छोटे बड़े सभी रोल मुझे पसंद है।
0 आपका कोई सपना है जो आप पूरा होते देखना चाहते हैं?
00 मेरी दिली इच्छा आईएएस की परीक्षा पास कर कलेक्टर बनने की है। फिर साथ साथ छालीवुड में भी कुछ करके दिखाना चाहता हूँ। अपनी मेहनत से एक अच्छा कलाकार कहलाना पसंद करूंगा। 

शनिवार, 12 दिसंबर 2015

फिल्म को ही कॅरियर बनाउंगी : सुहानी

गायिका बनने की चाहत है , मेरा शौक भी है 
हिन्दी फिल्म मीराधा की नायिका सुहानी जेठलिया कहती है की गायन मेरा शौक है और चाहत भी,लेकिन अब
फिल्म को ही अपना कैरियर बनाउंगी। जब इंडस्ट्री में आ ही गयी हूँ तो पीछे नहीं हटूंगी। इस फिल्म में छत्तीसगढ़ के अमिताभ कहे जाने वाले अशोक मालू ने भी काम किया है। उनका कहना है कि मुझे हर तरह के रोल करने की इच्छा है मीराधा में नायिका हूँ ,और अपनी भूमिका के साथ बहुत ही मेहनत की है। दैनिक सन स्टार ने उनसे हर पहलूओं पर बेबाक बात की।
0 फिल्म मीराधा में आपका क्या रोल है और कैसे कर पा रही है?
00 ये मेरी पहली फिल्म है मुझे नायिका का रोल दिया गया है। इसमें मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला है। मैंने एक आधुनिक लड़की राधा का किरदार निभाया है। इस फिल्म में बहुत मेहनत की है।
0  क्या है इस फिल्म में दर्शकों के लिए?
00 इस फिल्म में एक सन्देश है जो दर्शकों को पसंद आएगा। इसमें सब कुछ है दो नायिका और एक नायक है । आप अपने जिंदगी को कैसे जी सकते है इस फिल्म में बेहतर तरीके से बताया गया है। इस फिल्म को लेकर हम आश्वस्त हैं।
0  पहली बार कैमरे के सामने आने से डर नहीं लगा?
00 जी नहीं बिलकुल डर नहीं लगा। हम सब ने इसमें एक साथ कैमरे का सामना किया है।
0 इस फिल्म की क्या सम्भावनाये दिखती है?
00 बेहतर है। उम्मीद है कि और बॉलीवुड की अन्य फिल्मो की तरह ही चलेंगी। इसमें सब कुछ है। आप देखिये ,हमें तो पूरी उम्मीद है।
0 आपको एक्टिंग का शौक कब से है ?
00 मुझे एक्टिंग का शौक बचपन से ही रहा है। स्कूल में भी एक्टिंग किया करती थी। कई नाटकों में भाग लिया था। वैसे मेरा रुझान गायन की तरफ ही रहा है।
0 फिर मौका कैसे मिला और आपके प्रेरणाश्रोत कौन है ?
00 एक्टिंग मैंने खुद से सीखा है । मेरा कोई रोल मॉडल नहीं है। मेरे पिता श्री सूर्यप्रकाश जेठलिया इस फिल्म के निर्माता है और मेरे प्रेरणास्रोत भी। मेरे लगन को देखकर उन्होंने मुझे फिल्म करने के लिए प्रोत्साहित किया। उनके ही कारण मैं फिल्म में अच्छे से रोल कर पाई हूँ।
0 कभी आपने सोचा था की फिल्मो को ही अपना कॅरियर बनाएंगे ?
00 नहीं ! मेरा रुझान गायन की और ही था। एक्टिंग करने की कभी नहीं सोची थी । अब इसी लाईन पर काम करती रहूंगी, पीछे नहीं हटूंगी ।
0 आपका कोई सपना है जो आप पूरा होते देखना चाहती हैं?
00 हाँ मै छाहती हूँ कि मीराधा खूब चले जनता मेरी एक्टिंग को सराहे। इस फिल्म में मैंने दो गाने गाये है।
0 कभी आपको निराशा हुयी और सबसे ज्यादा उत्साहित कब हुई थी?
00 निराश कभी नहीं हुई हूँ। पर फिल्म में पहले और आख़िरी दिन मुझे खूब खुशी हुई थी क्योकि इससे मेरे जीवन में एक नया मोड़ आया है। 

गुरुवार, 10 दिसंबर 2015

छत्तीसगढ़ी फिल्मो में मौलिकता और संस्कृति की कमी झलकती है

 पात्र के अनुसार कलाकारों का चयन हो - विनय अम्बष्ड 
छत्तीसगढ़ी फिल्मो के खलनायक के रूप में तेजी से उभरे अम्बिकापुर के विनय अम्बष्ड का कहना है कि छत्तीसगढ़ी फिल्मो में मौलिकता और छत्तीसगढ़ी संस्कृति की कमी झलकती है। यही नहीं कलाकारों का चयन
भी पात्रों के अनुसार होना चाहिए। विनय अम्बष्ड ने थियेटर से अपने कॅरियर की शुरुआत की थी और आज छत्तीसगढ़ी फिल्मों का एक जाना पहचाना नाम बन गया है। उन्होंने बॉलीवुड की दो फिल्मे कर छत्तीसगढ़ का नाम रौशन किया है। अब वे लगातार फिल्मे ही करते रहना चाहते हैं। दैनिक सन स्टार ने उनसे हर पहलुओं पर बात की।
0 आपको एक्टिंग का शौक कब से है ?
00 मुझे एक्टिंग का शौक बचपन से ही रहा है। जब मै पांच साल का था तब पहली फिल्म देखा था ,तब से कुछ अलग करने की सोच ली थी। मन में लगन हो तो सब संभव है। मैंने थियेटर ज्वाइन किया और आज इस मुकाम पर हूँ।
0 छालीवुड की क्या सम्भावनाये दिखती है?
00 बेहतर है। आने वाले समय में यहां की फिल्मे बॉलीवुड की तरह ही चलेंगी।यहां फिलहाल दर्शकों की कमी है। लोगो में अपनी भाषा के प्रति वो रूचि नहीं है जो होनी चाहिए और जो दर्शक है उनकी रुझान हिन्दी फिल्मो की ऑर है।
0 तो छालीवुड की फिल्मे दर्शकों को क्यों नहीं खीच पा रही है?
00 क्योकि यहां की फिल्मो में अपनी संस्कृति और मौलिकता की कमी झलकती है। कलाकारों का चयन भी पात्रों के अनुसार नहीं होता क्योकि निर्माता सबसे पहले फाइनेंसर की तलाश में होता है। जो पैसा लगाता है वो कलाकार बन जाता है।
0 फिर मौका कैसे मिला और आपके प्रेरणाश्रोत कौन है ?
00 एक्टिंग मैंने खुद से सीखा है। मेरा कोई रोल मॉडल नहीं है। मै थियेटर से आया हूँ। मेरी पहली फिल्म एक हॉरर फिल्म है। सही मायने में मेरी पहली फिल्म सरपंच है जो बड़े परदे पर सफल रही है। पंकज कपूर मेरे आदर्श हैं। फिल्म राजा छत्तीसगढिय़ा ने मुझे छत्तीसगढ़ में अभिनेता के तौर पर पहचान दी है और अभी मेरे पास धर्मेन्द्र चौबे की करवट तथा बही तोर सुरता मा जैसे फिल्मे हैं।
0 कभी आपने सोचा था की फिल्मो को ही अपना कॅरियर बनाएंगे ?
00 हाँ ! शुरू से ही मै एक्टिंग को कॅरियर बनाने की सोचकर चला था। इसी लाईन पर काम करता रहूंगा। लगातार काम करूंगा।
0  छालीवुड फिल्मो में आपको कैसी भूमिका पसंद है या आप कैसे रोल चाहेंगे।
00  मैं हर तरह की भूमिका निभाना चाहूंगा ताकि मुझे सभी प्रकार का अनुभव हो। छोटे बड़े सभी रोल मुझे पसंद है। मैं किसी भी भाषा की फिल्म हो जरूर करूंगा।
0 सरकार से आपको क्या अपेक्षाएं हैं?
00 सरकार छालीवुड की मदद करे। टाकीज बनवाए, नियम बनाये , टाकिजों में छत्तीसगढ़ी फिल्म दिखाना अनिवार्य करे। छत्तीसगढ़ी फिल्मो को सब्सिडी दें ताकि कलाकारों को भी अच्छी मेहनताना मिल सके।
0 आप फिल्मो में भूमिका को लेकर कैसा महसूस करते हैं ?
00 जब मैं कोई भूमिका निभाता हूँ तो पहले गंभीरता से मनन करता हूँ। उसमे पूरी तरह से डूब जाता हूँ।
0 रिल और रियल लाइफ में क्या अंतर है?
00 रिल और रियल लाइफ में बहुत अंतर है। रील लाइफ काल्पनिक होता है और रियल लाइफ में सच्चाई होती है।
0 आपका कोई सपना है जो आप पूरा होते देखना चाहती हैं?
00 छालीवुड में कुछ करके दिखाना चाहता हूँ। अब लगातार फिल्मो में ही काम करते रहने की तमन्ना है। 

सोमवार, 7 दिसंबर 2015

फिल्म को ही कॅरियर बनाउंगी : अश्मिता बख्शी

 बॉलीवुड में महिला कलाकारों के साथ अन्याय नहीं होता
छोटे परदे की बहुचर्चित धारावाहिक नियति से बॉलीवुड में कदम रखने वाली अदाकारा अश्मिता बख्शी कहती है कि अब फिल्म को ही अपना कैरियर बनाउंगी। जब इंडस्ट्री में आ ही गयी हूँ तो पीछे नहीं हटूंगी। उनका कहना है कि बॉलीवुड में महिला कलाकारों के साथ अन्याय नहीं होता है बल्कि उनका अच्छे से ख्याल रखा जाता है। उनकी पहली हिन्दी फिल्म मकडज़ाल 11 नवम्बर को देशभर में रिलीज हो रही है जिसके प्रमोशन के सिलसिले में वह रायपुर में है। दैनिक सन स्टार ने उनसे हर पहलूओं पर बेबाक बात की।

0 फिल्म मकडज़ाल में आपका क्या रोल है और कैसे कर पा रही है?
00 ये मेरी पहली फिल्म है मुझे नायिका का रोल दिया गया है। इसमें मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला है। एक अच्छी कहानी पर बनी है। मैंने इस फिल्म  मेहनत की है।
0  क्या है इस फिल्म में दर्शकों के लिए?
00 इस फिल्म में एक सन्देश है जो फिल्म की बजट से भी बड़ा है। मुझे दुख है की एक किस सीन के चलते फिल्म को ए सर्टिफिकेट दे दिया गया। जबकि इससे ज्यादा किस सीन फिल्मो में देखने को मिलता है। आप अपने जिंदगी को कैसे जी सकते है इस फिल्म में बेहतर तरीके से बताया गया है।
0  पहली बार कैमरे के सामने आने से डर नहीं लगा?
00 नहीं इसके पहले धारावाहिक कर चुकी हूँ। कैमरे के सामने आने से डर नहीं लगता बल्कि अच्छा ही महसूस होता है।

0 इस फिल्म की क्या सम्भावनाये दिखती है?
00 बेहतर है। उम्मीद है कि और बॉलीवुड की तरह ही चलेंगी। इसमें सब कुछ है। आप देखिये आपको कालेज के दिन याद आ जाएंगे।
0 कैमरे के सामने आने से पहले कितनी तैयारी करती है ?
00 हमने पहले वर्कशॉप किया था जिससे करेक्टर को समझने का मौका मिला और अपनी भूमिका आसान हो गयी।
0 आपको एक्टिंग का शौक कब से है ?
00 मुझे एक्टिंग का शौक बचपन से ही रहा है। स्कूल में भी एक्टिंग किया करती थी।
0 फिर मौका कैसे मिला और आपके प्रेरणाश्रोत कौन है ?
00 एक्टिंग मैंने खुद से खीखा है । मेरा कोई रोल मॉडल नहीं है। धारावाहिक नियति में डायरेक्टर दिनेश जी ने मेरा काम देखा और मौका दिया है।
0 कभी आपने सोचा था की फिल्मो को ही अपना कॅरियर बनाएंगे ?
00 नहीं ! मैंने एमबीए की पढ़ाई की है फिर सीरियल में मौका मिला और काम करने लगी। अब मै एक्टिंग को कॅरियर बनाने की सोचकर चल रही हूँ। इसी लाईन पर काम करती रहूंगी, पीछे नहीं हटूंगी ।
0 आपका कोई सपना है जो आप पूरा होते देखना चाहती हैं?
00 बॉलीवुड में कुछ करके दिखाना चाहती हूँ। अपनी मेहनत से एक अच्छी एक्ट्रेस बनना चाहती हूँ।

रविवार, 29 नवंबर 2015

दबंग देहाती में काम कर मै बहुत खुश हूँ : दिव्या

  छालीवुड में कुछ बनकर जरूर दिखाउंगी
छत्तीसगढ़ी फिल्म दबंग देहाती से छालीवुड में कदम रखने वाली दिव्या यादव यूँ तो कई शार्ट फिल्मे कर चुकी है यह उनकी पहली फीचर फिल्म है। वे कहती है कि पहली ही फिल्म में सुपर स्टार करण खान के साथ काम करने का अपना अलग ही मजा है। फिल्म की शूटिंग चल रही है और मुझे बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है। अच्छा सोचकर इस लाईन में कदम रखी हूँ तो एक दिन छालीवुड में कुछ बनकर जरूर दिखाउंगी। दिव्या यादव से हमने कई मुद्दों पर बेबाक बात की है।
0 फिल्म दबंग देहाती में आपका क्या रोल है और कैसे कर पा रही है?
00 ये मेरी पहली फिल्म है मुझे दूसरी नायिका का रोल दिया गया है। इसमें मुझे बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है। एक तो बड़े कलाकार करन खान के साथ काम कर रही हूँ। इसका अपना अलग ही मजा है। करन खान के बारे में जितना सूना था उससे ज्यादा अच्छा है। बस अभी तो सीख रही हूँ।
0  पहली बार कैमरे के सामने आने से डर नहीं लगा?
00 नहीं इसके पहले कई शार्ट मूवी कर चुकी हूँ।
0 छालीवुड की क्या सम्भावनाये दिखती है?
00 बेहतर है। आने वाले समय में यहां की फिल्मे बॉलीवुड की तरह ही चलेंगी।यहां फिलहाल दर्शकों की कमी है। लोगो में अपनी भाषा के प्रति वो रूचि नहीं है जो होनी चाहिए और जो दर्शक है उनकी रुझान हिन्दी फिल्मो की ऑर है।
0 तो छालीवुड की फिल्मे दर्शकों को क्यों नहीं खीच पा रही है? 
00 जल्दी जल्दी फिल्मे आने से दर्शको का मन भंग हो जाता है। राजा छत्तीसगढ़िया को देखिये कैसी भीड़ खींच रही थी फिर मया 2 भी अच्छी चली । ऐसे ही फिल्मो की जरुरत है दर्शको को।

0 आपको एक्टिंग का शौक कब से है ?
00 मुझे एक्टिंग का शौक बचपन से ही रहा है। आईना के सामने खड़ी होकर एक्टिंग किया करती थी।
0 फिर मौका कैसे मिला और आपके प्रेरणाश्रोत कौन है ?
00 एक्टिंग मैंने खुद से खीखा है । मेरा कोई रोल मॉडल नहीं है। करन खान ने मुझे मेरा काम देखा और मौका दिया है।
0 कभी आपने सोचा था की फिल्मो को ही अपना कॅरियर बनाएंगे ?
00 हाँ ! शुरू से ही मै एक्टिंग को कॅरियर बनाने की सोचकर चल रही थी। इसी लाईन पर काम करती रहूंगी।
0  छालीवुड फिल्मो में आपको कैसी भूमिका पसंद है या आप कैसे रोल चाहेंगे।
00  मैं हर तरह की भूमिका निभाना चाहूंगी ताकि मुझे सभी प्रकार का अनुभव हो। छोटे बड़े सभी रोल मुझे पसंद है।
0 सरकार को आपको क्या अपेक्षाएं हैं?
00 सरकार छालीवुड को मदद करे। टाकीज बनवाए, नियम बनाये ताकि टाकिज मालिकों की मनमानी खत्म हो जाए।छत्तीसगढ़ी फिल्मो को सब्सिडी दें ताकि कलाकारों को भी अच्छी मेहनताना मिल सके।

0 आप फिल्मो में भूमिका को लेकर कैसा महसूस करते हैं ?
00 जब मैं कोई भूमिका निभाती हूँ तो पहले गंभीरता से मनन करती हूँ।
0 ऐसा कोई क्षण जब निराशा मिली हो?
00 कभी नहीं। मैं कभी निराश नहीं होता।
0 आपका कोई सपना है जो आप पूरा होते देखना चाहती हैं?
00 छालीवुड में कुछ करके दिखाना चाहती हूँ। अपनी मेहनत से एक अच्छी एक्ट्रेस बनना चाहती हूँ। 

बुधवार, 18 नवंबर 2015

अभिनय में जीवंत पैदा करती है ये अभिनेत्रियां

छत्तीसगढ़ी फिल्मो की चर्चित माँ एक नजर में 
व्यक्ति के जीवन रुपी ईमारत की बुनियाद माँ है 7 ईमारत चाहे जैसी भी बने लेकिन सबसे पहले बुनियाद डालनी ही पड़ती है, उसी प्रकार किसी भी जीवन की उत्पत्ति के लिए माँ जैसी बुनियाद आवश्यक है माँ  को शब्दों में व्यक्त करना आसान नहीं है किन्तु अगर मैं माँ  को परिभाषित करने की असफल कोशिश करता हूँ तो
पाता हूँ की  माँ  वो है जो सिर्फ और सिर्फ देना जानती है7 जब जीवन के हर क्षेत्र में मां का स्थान इतना अहम है तो भला हमारा छत्तीसगढ़ी सिनेमा इससे कैसे वंचित रह सकता था।  छत्तीसगढ़ी सिनेमा में भी छह ऐसी चर्चित अभिनेत्रियां हैं जिन्होंने मां के किरदार को सिनेमा में अहम बनाया है। छत्तीसगढ़ी सिनेमा में जब भी मां के किरदार को सशक्त करने की बात आती है तो  उपासना वैष्णव ,पुष्पांजली शर्मा , श्वेता शर्मा ,उर्वशी साहू , उषा विश्वकर्मा और भानुमति कोसरे का नाम आता है जिन्होंने अपनी बेमिसाल अदायगी से मां के किरदार को छत्तीसगढ़ी सिनेमा में टॉप पर पहुंचाया। वैसे तो कई और अभिनेत्रियां है जिन्होंने छत्तीसगढ़ी फिल्मो में माँ का किरदार निभाया है पर परदे पर इन छह को ज्यादा सराहा गया। आज हम जिन छह अभिनेत्रियों की बात कर रहे हैं उन्हें छत्तीसगढ़ फिल्म एसोसिएशन ने बेस्ट अभिनेत्री के एवार्ड से सम्मानित कर चुके हैं।

पुष्पांजली को किस्मत ने फिल्मो में खींच लाया 
अभिनेत्री पुष्पांजली ने मां की भूमिका निभाकर एक अलग अध्याय रचा है। उन्हें प्रकाश अवस्थी, अनुज शर्मा,
करण खान, चन्द्रशेखर चकोर जैसे तमाम बड़े नायको की माँ की भूमिका निभाने की वजह से ही छत्तीसगढ़ की निरुपा राय भी कहा जाता है। पुष्पांजली ने 71 फिल्मों में माँ की भूमिका निभाई है। मया के घरौंदा में उनकी भूमिका वाकई गजब थी। मां के रूप में जब भी पर्दे पर आई लोगों ने उन्हें खूब प्यार दिया। पहुना, टूरी नंबर वन आदि में उनकी भूमिका दमदार थी। लेकिन पुष्पांजली खुद विदाई और मया 2 में अपनी भूमिका को सबसे अच्छी मानती है। पुष्पांजली को आज छत्तीसगढ़ी सिनेमा की बेहतरीन अदाकारा माना जाता है। फिल्मों में उनकी एंट्री बड़े ही निराले ढंग से हुई। कभी अभिनय न तो की थी और ना ही कभी सोची थी। डायरेक्टर एजाज वारसी इन्हे फिल्मो में लेकर आये और डॉ अजय सहाय ने इनका हौसला अफजाई किया, जिसकी वजह से ही आज वे इस मुकाम को पा सकी है। वे कहती है कि मां के चरित्न को फिल्म में जीवंत बनाने की पूरी कोशिश करती हूँ। 80  से अधिक फिल्मो में काम कर चुकी पुष्पांजली को किस्मत ने फिल्मो में खिंच लाया। माँ की भूमिका निभाना उन्हें बेहद पसंद है वैसे पुष्पांजली कई फिल्मो में भाभी की भूमिका भी निभा चुकी है। उनकी तमन्ना इस भूमिका को लगातार आगे भी जीते रहने की है।

अच्छे कामों से मिला श्वेता को मुकाम
बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री राखी की तरह अदा बिखेरने के कारण ही श्वेता शर्मा को छत्तीसगढ़ी फिल्मो की राखी कहा जाने लगा है। श्वेता हर तरह की भूमिका निभाने में माहिर है। करीब 15  माँ फिल्मो में माँ की भूमिका निभा चुकी श्वेता कहती है कि मन में लगन और दृढ़ इच्छा हो तो कोई भी काम असंभव नहीं होता। टीवी देख- देखकर मैंने भी फिल्मो में काम करने की सोची थी और आज सबके सामने हूँ। छत्तीसगढ़ी फिल्मो में उनकी एंट्री भी नाटकीय ढंग से हुई थी। कोरियोग्राफर मनोजदीप ने उन्हें मंच दिया और फिल्मो में काम करने को प्रोत्साहित किया ,बस फिर क्या था फिल्मो में आ गयी । कम पढ़ी लिखी होने के बावजूद श्वेता ने अपने अभिनय को ऐसे निभाया कि हर तरफ उनके कामों की तारीफ़ होने लगी और उन्हें छत्तीसगढ़ी फिल्मो की राखी कही जाने लगा। निर्देशक एजाज वारसी ने ही पुष्पांजली की तरह इन्हें भी ब्रेक दिया और आज एक सफल अभिनेत्री है। श्वेता की भूमिका को लोगो ने कई फिल्मो में सराहा लेकिन श्वेता को खुद राजा छत्तीसगढिय़ा में अपनी भूमिका बहुत पसंद है। वो बताती है कि बिना तैयारी के शूटिंग में गयी थी और बेहतर ढंग से भूमिका निभा पाई।

लोकगायिका से अभिनेत्री बनी भानुमति
राष्ट्रीय सम्मान से नवाजी जा चुकी छत्तीसगढ़ की लोकगायिका से अभिनेत्री बनी भानुमति कोसरे छत्तीसगढ़ी फिल्मो में माँ और भाभी की भूमिका निभाती है। वे सम्मान की भूखी है , कहती है कि कलाकार को सम्मान चाहिए। उनका कहना है कि सरकार के नुमाईंदे राज्य के कलाकारों का सम्मान करना सीखे क्योकि वे सम्मान के ही भूखे होते है। दूरदर्शन रायपुर,भोपाल के लिए लोकगीत गा चुकी भानुमति बताती है कि परिवार वालों के विरोध के बाद भी वे इस क्षेत्र में  बनाई है। 15 छत्तीसगढ़ी फि़ल्में, कई एल्बम और स्टेज शो कर चुकी भानुमति लोकगायिका के लिए राष्ट्रीय एवार्ड से सम्मानित हो चुकी है। कारी, ऐसे होते प्रीत, पठौनी के चक्कर,  भुला झन देबे, सजना मोर, छलिया, मया 2, सिधवा सजन उनकी चर्चित फिल्मे हैं। भानुमति अपनी हर भूमिका में ऐसे रम जाती है जैसे वे असल जिंदगी हो। उनकी इसी कला के चलते निर्माता उन्हें पसंद करते है।

उपासना को निगेटिव रोल पसंद है 
छत्तीसगढ़ी फिल्मो की सबसे सीनियर अदाकारा उपासना वैष्णव ने अब तक 85 फिल्मे की है जिसमे अधिकाँश फिल्मों में वे माँ की भूमिका में ही है। उसने हिन्दी,तेलुगु और भोजपुरी फिल्मे भी की है। छत्तीसगढ़ी फिल्मो में उपासना बच्चों पर प्यार लुटाती हुई नजर आती है पर उसे खुद निगेटिव रोल पसंद है। मया फिल्म
में उन्होंने निगेटिव किरदार किया है जिसे दर्शकों ने खूब पसंद कियायह भूमिका उन्हें भी पसंद है। तँहू दीवाना महू दीवाना से वह खलनायिका के नाम से चर्चित हुई ,लकिन मोर डौकी के बिहाव में वह नायिका के रूप में सामने आई। क्षमानिधि मिश्रा ने इस रोल में उन्हें आजमाया और सफल रहे। उपासना कहती है कि रोल कोई भी हो उसे जीवंत बनाना ही उनका शौक है। अब वह कुछ हटकर रोल करना चाहती है। वे कहती है कि हमारी इमेज एक साफ सुथरी और आदर्श नायिका की होती है जिसे पूरी तरह भुला कर हमें एक ऐसा किरदार निभाना पड़ता है जो खलनायिका के गुण भी दिखा दें और दर्शक भी उसे पसंद करें ।

माँ की भूमिका पसंद है उर्वशी को 
`छत्तीसगढ़ी फिल्मो की चर्चित नाम है उर्वशी साहू जिन्होंने 19 फिल्मों में माँ और भाभी की भूमिका निभाई है। झन भुलाहू माँ-बाप ला उनकी एक बेहतरीन फिल्म है जिसमे उन्हें दर्शकों ने खूब सराहा। मोर डौकी के बिहाव में तो उन्होंने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। इस फिल के लिए उन्हें बेस्ट चरित्र अभिनेत्री का एवार्ड भी मिला। उर्वशी कहती है कि उसे सभी तरह के रोल पसंद है।

आदरणीय होती है माँ की भूमिका : उषा 
छत्तीसगढ़ी फिल्मो में माँ की भूमिका निभाने वाली उषा विश्वकर्मा कहती है कि माँ की जो भूमिका होती है,
उसकी अकसर कदर नहीं की जाती और कभी-कभी तो उसे नीची नजऱों से देखा जाता है। उनका मानना था कि नौकरी-पेशा, बच्चे से ज़्यादा ज़रूरी है और यह भी कि बच्चों को सँभालना किसी सज़ा से कम नहीं। उषा 9 फिल्मे कर चुकी है जिसमे दगाबाज को वह अपनी सबसे बेहतर फिल्म मानती है। वे कहती है कि माँ की भूमिका बहुत ही चुनौतीपूर्ण होती है और आगे भी वह इस प्रकार की चुनौतीपूर्ण भूमिका निभाती रहेंगी।