शनिवार, 19 जून 2010

लड़ाकू विमान

हवाओं को हराकर आसमान पर छाने वाले
आसमान में लकीरें नहीं खिंचीं होतीं कि इतना तुम्हारा और इतना हमारा। इसीलिए इन सीमाओं पर खास निगाह रखनी पड़ती है। इस अदृश्य बॉर्डर से आने वाले दुश्मन से निपटने के लिए वायुसेना का ताकतवर होना ज़रूरी है। तभी तो हमारी वायुसेना में शामिल हैं एक से बढ़कर एक लड़ाकू विमान।
भारतीय वायुसेना में किसी भी सक्षम वायुसेना की तरह लड़ाकू विमान, हैलिकॉप्टर, ट्रेनर विमान और वाहक विमान शामिल हैं।

लड़ाकू विमान मिग
मिग का विकास सोवियत संघ में हुआ था। यह लड़ाकू विमानों की एक जानी-मानी श्रंखला है। शीत युद्ध के दौरान इन विमानों का दुनियाभर में प्रयोग हुआ था। वायुसेना ने 60 के दशक से इन विमानों का रूस से आयात शुरू किया था। आज ये वायुसेना के प्रमुख लड़ाकू विमान हैं।
मिग-21
मिग-21 विमान हवाई सुरक्षा में अहम भूमिका निभाते आए हैं। वायुसेना के बेड़े में ऐसे तीन सौ से अधिक विमान हैं लेकिन पिछले कई वषों से इन विमानों के दुर्घटनाग्रस्त होने की दर काफी अधिक हो जाने के कारण अब इन्हें सेवा से हटाया जा रहा है।

मिग-23,25 और 27
मिग 21 के साथ ही भारतीय वायुसेना के पास मिग 23, 25 और मिग 27 भी हैं। पाकिस्तान को अमेरिका से मिले एफ 16 विमानों को टक्कर देने के लिए रूस ने सत्तर के दशक में भारत को मिग 23 विमान उपलब्ध कराए थे। मिग के पायलट इसकी बेहद तेज गति के कायल हैं। इन विमानों की पहली परख सियाचिन ग्लेशियर पर भारतीय ध्वज फहराए जाने के लिए हुए आपरेशन मेघदूत में हुई थी, जब मिग 23 का व्यापक पैमाने पर इस्तेमाल किया गया।

जम्मू-कश्मीर के बनिहाल र्दे को रात के समय पार करने वाला यह पहला विमान बना। 1999 में ऑपरेशन सफेद सागर के समय टाइगर हिल्स पर दुश्मन के ठिकानों को नष्ट करने के लिए इन विमानों का ही प्रयोग किया गया था। तीन दशक की सेवाएं भारतीय वायु सेना को देने के बाद मिग 23 की सेवाएं मार्च 2009 में समाप्त कर दी गईं।

मिग-29
रूस में बने मिग-29 लड़ाकू विमानों को गत वर्ष दिसंबर में सेना में शामिल किया है। इन्हें 2012 में आईएनएस विक्रमादित्य (एडमिरल गॉर्शकोव) पर तैनात किया जाएगा।

संहारक सुखोई
इसे भारतीय वायुसेना का सबसे संहारक लड़ाकू विमान माना जाता है। अभी इसके आधुनिकीकरण की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए सुखोई- 30 एमकेआई विमानों में ब्रह्मोस मिसाइल की वायुसैनिक किस्म लगाई जाएगी। साथ ही दुनिया का अत्याधुनिक आएसा रडार भी लगाया जाएगा। आधुनिकीकरण की यह प्रक्रिया 2015 तक पूरी होगी और तब सुखोई-30 विमान दुनिया का सबसे संहारक विमान बन जाएगा।

वज्र है यह
फ्रांस में बना मिराज २क्क्क् भारतीय वायुसेना में वज्र के नाम से शामिल किया गया है। अभी इनके आधुनिकीकरण का काम चल रहा है। कारगिल युद्ध के दौरान दुश्मन के ठिकानों को नष्ट करने में इसने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

तेजस
मिग 21 की जगह वायुसेना में शामिल होने वाला तेजस एक हल्का लड़ाकू विमान है। भारत में बनने वाले इस विमान को अगले साल वायुसेना में शामिल कर लिया जाएगा।

हॉक
यह ब्रिटेन निर्मित आधुनिक प्रशिक्षण विमान हैं। इनका इस्तेमाल आमतौर पर पॉयलटों के प्रशिक्षण के लिए किया जाता है, लेकिन युद्ध की स्थिति में इनसे ज़मीन पर हमले भी किए जा सकते हैं।

भविष्य के विमान
भारत और रूस के अधिकारी इन दिनों पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के साझा विकास पर काम कर रहे हैं, जो दुनिया के सभी तत्कालीन लड़ाकू विमानों की क्षमता के बराबर होगा।

मिग-35भविष्य में इनके भारतीय वायुसेना में शामिल होने की उम्मीद है। मिग-35 में आएसा रडार लगा होगा। साथ ही, इलेक्ट्रॉनिक प्रतिरोधक प्रणालियों से लैस यह विमान दुश्मन के लड़ाकू विमान के सभी इलेक्ट्रॉनिक सिग्नलों को निरस्त कर
सकता है।

क्या है आएसा रडार
आएसा (एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे) रडार अपने आस-पास उड़ रहे 30 हमलावर विमानों पर नज़र रख सकते हैं और 150 किलोमीटर दूर से उन्हें देखकर अपनी रक्षात्मक प्रणाली को सचेत कर सकते हैं। आएसा रडार फिलहाल अमेरिका की पांचवीं पीढ़ी के एफ-22 और नौसेना के एफ-18 विमान में ही लगे हैं।

अवॉक्स
भारत दक्षिण एशिया का एकमात्र ऐसा देश है, जिसके पास हवाई चेतावनी और नियंत्रण प्रणाली अवॉक्स [एडब्ल्यूएसीएस] है, जिसे आकाश में आंख कहा जाता है। इज़राइल से खरीदा गया यह टोही विमान मई 2009 में वायुसेना में शामिल किया गया है।

ध्रुव, चेतक और चीता- यह वे हैलिकॉप्टर्स हैं, जिनका प्रयोग भारतीय वायुसेना सैनिकों और रसद को एक स्थान से दूसरे
स्थान पहुंचाने में करती है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें