शुक्रवार, 8 जुलाई 2016

भारत के ये 30 मंदिर सुनाते हैं आस्था और वैभव की दास्तां

कहा जाता है कि भारत की भूमि विद्वानों की भूमि है, जिसके पीछे भारत का गौरवशाली इतिहास गवाह रहा है. चिकित्सा से ले कर विज्ञान के क्षेत्र में आगे होने के बावजूद यह देश कई मायनों में बाकी देशों से हटकर है जिसमें आस्था भी एक अहम भूमिका निभाती है, जो इस देश को इतनी विविधता होने के बावजूद एक धागे में बांधे रखता है.इस आस्था को बनाये रखने में यहां मौजूद मंदिरों की भूमिका को भी नकारा नहीं जा सकता. चलिए आज हम आपको भारत के ऐसे ही 30 मंदिरों की सैर पर ले चलते हैं जो लोगों की आस्था का केंद्र तो है ही, इसी के साथ-साथ भारत के गौरवशाली इतिहास को भी समेटे हुए है.  - अरुण बंछोर

1. बद्रीनाथ मंदिर
उत्तराखंड का चमोली डिस्ट्रिक्ट, अलकनंदा नदी का किनारा भगवान बद्रीनाथ के घर के नाम से भी जाता है. बद्रीनाथ मंदिर हिन्दू धर्म के चार पवित्र धामों में से एक है. इसके अलावा बद्रीनाथ में भी एक छोटा चार धाम है जिसमे भगवन विष्णु के एक सौ आठ मंदिर हैं जो भगवन विष्णु को समर्पित हैं.
भगवान विष्णु की यात्रा करने वाले लोगों का यहां तांता लगा रहता है पर यहां पर की जाने वाली यात्रा केवल अप्रैल से ले कर सितम्बर तक ही रहती है. इस मंदिर से सम्बंधित दो खास फेस्टिवल हैं जो इसकी खासियत को और बढ़ाते हैं. माता मूर्ति का मेला: भगवान बद्रीनाथ की पूजा शुरू हो कर यह मेला सितम्बर तक चलता है जब तक कि मंदिर के कपाट बंद नहीं हो जाते.बद्री-केदार फेस्टिवल: आठ दिनों तक चलने वाला यह मेला बद्रीनाथ और केदारनाथ दोनों जगहों पर जून के महीने में मनाया जाता है.

2. सूर्य मंदिर, कोणार्क
ओड़िसा की पूरी डिस्ट्रिक्ट के पास है कोणार्क जो मंदिर के रूप में वास्तुकला का अद्भुत नमूना है. यह मंदिर भगवान सूर्य को समर्पित है. रथ के आकार में बने इस मंदिर में बारह पहिये हैं जिसे सात घोड़े खींचते हुए महसूस होते है.रबीन्द्रनाथ टैगोर ने इस मंदिर की खूबसूरती के बारे में कहा था की "यहां पत्थरों की भाषा इंसानों की भाषा को मात देती नज़र आती है".

3. बृहदीस्वरा मंदिर
बृहदीस्वरा मंदिर, को पेरुवुडइयर कोविल, राजराजेस्वरम भी कहा जाता है जिसे ग्याहरवीं सदी में चोल साम्राजय के राजा चोल ने बनवाया था. भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर भारत के सबसे बड़े मंदिरों में से एक है. यह मंदिर ग्रेनाइट की विशाल चट्टानों को काटकर वास्तु शास्त्र के हिसाब से बनाया गया है. इसमें एक खासियत यह है कि दोपहर बारह बजे इस मंदिर की परछाई जमीन पर नहीं पड़ती.

4. सोमनाथ मंदिर
गीता, स्कंदपुराण और शिवपुराण जैसी प्राचीन किताबों में भी सोमनाथ मंदिर का जिक्र मिलता है. सोम का मतलब है चन्द्रमा और सोमनाथ का मतलब, चन्द्रमा की रक्षा करने वाला. एक कहानी के अनुसार सोम नाम का एक व्यक्ति अपने पिता के श्राप की वजह से काफी बीमार हो गया था. तब भगवान शिव ने उसे बीमारी से छुटकारा दिलाया था, जिसके बाद शिव के सम्मान में सोम ने यह मंदिर बनवाया.
यह मंदिर भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है जो शौराष्ट्र के प्रभास क्षेत्र में है. ऐसी मान्यता है कि यह वही क्षेत्र है जहां कृष्ण अपना शरीर त्यागा था.
यह मंदिर अरब सागर के किनारे बना हुआ है और साउथ पोल और इसके बीच कोई जमीन नहीं है.

5.केदारनाथ मंदिर
हिमालय की गोद, गढ़वाल क्षेत्र में भगवान शिव के अलोकिक मंदिरों में से एक केदारनाथ मंदिर स्थित है. एक कहानी के अनुसार इसका निर्माण पांडवों ने युद्ध में कौरवों की मृत्यु के प्राश्चित के लिए बनवाया था. आठवीं सदी में आदि शंकराचार्य ने इसको दोबारा restored करवाया. यह उत्तराखंड के छोटे चार धामों में से एक है जिसके लिए यहां आने वालों को 14 किलोमीटर के पहाड़ी रास्तों पर से गुजरना पड़ता है.
यह मंदिर ठन्डे ग्लेशियर और ऊंची चोटियों से घिरा हुआ है जिनकी ऊंचाई लगभग 3,583 मीटर तक है. सर्दियों के दौरान यह मंदिर बंद कर दिया जाता है. सर्दी अधिक पड़ने की सूरत में भगवन शिव को उखीमठ ले जाया जाता है और पांच-छह महीने वहीं उनकी पूजा की जाती है.

6.सांची स्तूप
सांची, मध्य-प्रदेश के रायसेन डिस्ट्रिक्ट का एक सा गांव है जो कि बौद्धिक व ऐतिहसिक इमारतों का घर है जो यहां तीसरी ईसा पूर्व और बारवीं सदी के दौरान बनाये गए थे. इन सबमें सबसे प्रमुख है सांची स्तूप जहां महात्मा बुद्ध के अवशेष संभाल कर रखे गये हैं.इस स्तूप का निर्माण सम्राट अशोक द्वारा कराया गया था. इसके चार दरवाजे हैं जो प्रेम, श्रद्धा, शांति और विश्वास को दर्शाते हैं. UNESCOc द्वारा सांची स्तूप को वर्ल्ड हेरिटेज का दर्जा दिया चुका है.

7.रामनाथस्वामी (रामेश्वरम) मंदिर
ये मंदिर तमिलनाडु के पास एक छोटे से द्वीप के समीप है जिसे रामेश्वरम के नाम से जाना जाता है. यह हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार उनके चार पवित्र धामों में से एक है.एक मान्यता के अनुसार जब भगवान राम, रावण को हरा कर आये थे तो पश्चाताप के लिए उन्होंने शिव की पूजा करने की योजना बनाई क्योंकि उनके हाथों से एक ब्राह्मण की मृत्यु हो गयी थी. शिव की पूजा के लिए उन्होंने हनुमान को कैलाश भेजा जिससे वह उनके लिंग रूप को वहां ला सकें. पर जब तक हनुमान वापिस लौटते तब तक सीता माता रेत का एक लिंग बना चुकी थी. हनुमान द्वारा लाए गए लिंग को विश्वलिंग खा गया जबकि सीता द्वारा बनाये गए लिंग को रामलिंग कहा गया. भगवान राम के आदेश से आज भी रामलिंग से पहले विश्वलिंग की पूजा की जाती है.

8.वैष्णो देवी मंदिर
जम्मू कश्मीर के कटरा से 12 किलोमीटर त्रिकुट की पहाड़ियों पर जमीन से 5200 फ़ीट की ऊंचाई पर स्थित है वह पवित्र गुफा जहां माता वैष्णो देवी के दर्शन होते है.आज वहां वैष्णो देवी तीन पत्थरों के रूप में रहती है जिसे पिंडी कहा जाता है. हर साल लाखों लोग माता से आशीर्वाद लेने यहां आते हैं ऐसी मान्यता है कि माता अपने यहां आने वाले लोगों को खुद decide करती हैं और कोई भी व्यक्ति उन्ही की इच्छा से उन तक पहुंच पाता है.

9.सिद्धिविनायक मंदिर
मुंबई के प्रभा देवी में स्थित है सिद्धिविनायक मंदिर जिसे अठारवीं सदी में बनाया गया था. ऐसा माना जाता है कि किसी भी काम को शुरू करने से पहले गणेश जी की पूजा की जाती है इसलिए उन्हें विघ्नहर्ता भी कहा जाता है.वैसे तो इस मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, पर मंगलवार के दिन खासतौर पर यहां भीड़ रहती है.

10.गंगोत्री मंदिर
उत्तराखंड के उत्तरकाशी के गंगोत्री को गंगा का उद्भव स्थल माना जाता है. जब भागीरथ गंगा को स्वर्ग से लेकर आये थे तो यहीं पर भगवान शिव ने उन्हें जटाओं में बांधकर जमीन पर उतारा था. अठांरवीं सदी में बना यह मंदिर सफ़ेद ग्रेनाइट से बना हुआ है.

11.गोल्डन टेम्पल, अमृतसर
गोल्डन टेम्पल को हरमंदिर साहिब के नाम से भी जाना जाता है. यह सिखों के पवित्र स्थानों में से एक है. इस गुरुद्वारे के चार दरवाजे है जो कि यह दर्शाते है कि इस मंदिर के दरवाजे सभी के लिए खुले हुए हैं, चाहे वह किसी धर्म को मानने वाला हो, किसी भी सम्प्रदाय का हो. यह मंदिर यूनिवर्सल भाईचारे का अद्भुत नमूना है. गुरु ग्रन्थ साहिब को सबसे पहले इसी मंदिर में रखा गया था.

12.काशी विश्वनाथ मंदिर, बनारस
काशी विश्वनाथ मंदिर, पवित्र एवं प्राचीन शहर बनारस में स्थित है. यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है. विश्वनाथ का मतलब होता है विश्व का स्वामी. यह इस मंदिर की खासियत ही थी जो यहां गुरु नानक से लेकर तुलसीदास, विवेकानंद और आदि शंकराचार्य जैसे लोगों को खुद तक खींच लाई. ऐसा मानना है कि इस मंदिर को देखने मात्र से मोक्ष के सारे दरवाजे खुल जाते हैं.

13.जगन्नाथ मंदिर
बारवीं सदी में बना यह मंदिर उड़ीसा के पुरी में बना हुआ है जिस कारण इसे जगन्नाथ पुरी के नाम से भी जाना जाता है. यह मंदिर भगवान कृष्णा के साथ-साथ उनके भाई बलभद्र और उनकी बहन सुभद्रा को समर्पित है. इस मंदिर में गैर हिन्दुओं का प्रवेश वर्जित है.

14.यमुनोत्री टेम्पल
उत्तराखंड के उत्तरकाशी में उन्नीसवीं सदी का बना यह मंदिर कई बार प्राकृतिक आपदाओं के कारण नष्ट हो चुका है. गंगा के बाद यमुना को भी काफी पवित्रता कि दृष्टि से देखा जाता है.जमीन से 3291 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, जहां यमुना देवी कि पूजा की जाती है. मंदिर के दरवाजे अक्षय त्रित्या से लेकर दिवाली तक श्रद्धालुओं के लिए खुले रहते है

15.मिनाक्षी टेम्पल, मदुरई
मदुरई का मीनाक्षी मंदिर न केवल श्रद्धालुओं के बीच प्रसिद्ध है बल्कि यह कला के दीवानों के लिए भी किसी जन्नत से कम नहीं है. यह मंदिर देवी पार्वती और उनके पति शिव को समर्पित है.मंदिर के बीचों बीच एक सुनहरा कमल रुपी तालाब है. मंदिर में करीब 985 पिल्लर हैं, हर पिल्लर को अलग अलग कला कृतियों द्वारा उकेरा गया है. इस मंदिर का नाम विश्व के सात अजूबों के लिए भी भेजा जा चुका है.

16.अमरनाथ केव टेम्पल
जम्मू कश्मीर की बर्फीली पहाड़ियों में ज़मीन से 3888 मीटर ऊपर 5000 साल पुरानी गुफ़ा मौजूद है, जहां पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को 5 दिनों में 40 मील की चढ़ाई करनी पड़ती है.यह क्षेत्र साल भर बर्फ़ से ढका रहता है, यहां कि यात्रा केवल गर्मियों के दौरान ही की जाती है.उस समय भी यह क्षेत्र काफ़ी हद तक बर्फ़ से ढका हुआ रहता है.

17.लिंगराज मंदिर
मंदिरों के शहर उड़ीसा में एक और मंदिर है जो बड़ा होने के साथ-साथ अपने साथ इतिहास को भी समेटे हुए है. यह मंदिर श्रद्धालुओं के साथ साथ इतिहासकारों को भी अपनी तरफ आकर्षित करता है जिसकी वजह यहां कि एतिहासिक इमारते है.वैसे तो यह मंदिर शिव को समर्पित है पर यहां शिव के साथ साथ भगवान विष्णु कि भी पूजा कि जाती है, जिस कारण यह हरिहर के नाम से भी जाना जाता है.

18.तिरुपति बालाजी
आन्ध्र प्रदेश की तिरुमाला पहाडियों में बसा है तिरुमाला वेंकटेश्वारा मंदिर जिसे तिरुपति बालाजी के नाम से जाना जाता है, भगवान विष्णु को समर्पित है. यह मंदिर भारत में मौजूद सबसे अमीर मंदिरों में शुमार है. यहां पर प्रसाद के रूप में मिलने वाला लड्डू अपने स्वाद के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है.यहां पर मन्नत पूरी हो जाने पर लोग अपने बालों का चढ़ावा चढ़ाते हैं, जिससे यहां लगभग लाखों डॉलरों की कमाई होती है.

19.कांचीपुरम मंदिर
कांचीपुरम, साड़ियों के अलावा एक और चीज़ के लिए पहचाना जाता है. वो है यहां पर मौजूद हजारों मंदिर, जिसकी वजह से इसे मंदिरों का शहर भी कहा जाता है.

20.खजुराहो टेम्पल
इस मंदिर की खासियत का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि UNESCO द्वारा इसे वर्ल्ड हेरिटेज साईट घोषित किया गया है.यहां पर 10 वीं और 12 वीं सदी के कई मंदिर मौजूद है जो जैन और हिन्दू देवी-देवताओं को समर्पित हैं, जिनकी नक्काशी किसी को भी अपनी तरफ़ खींचने की क्षमता रखती है.

21.विरूपक्षा टेम्पल
7 वीं सदी में हम्पी में बना यह मंदिर आज भी अपने पूजा पाठ के लिए जाना जाता है. इसे unesco द्वारा राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जा चुका है.
यह मंदिर धार्मिक दृष्टि के अलावा पर्यटन कि दृष्टि से भी काफी महत्व रखता है.

22.अक्षरधाम मंदिर
यमुना का किनारा जहां एक ओर दिल्ली को दो भागों में बांटता है, वहीं अक्षरधाम मंदिर आस्था के जरिये दिल्ली के दोनों किनारों को आपस में जोड़ता है.
अक्षरधाम मंदिर, वास्तुशास्त्र और पंचशास्त्र के नियमों को ध्यान में रख कर बनाया गया है. इसका मुख्य गुम्बद मंदिर से करीब 11 फीट ऊंचा है.इस मंदिर को बनाने में राजस्थानी गुलाबी पत्थरों का उपयोग किया गया है.यहां पर होने वाला लाइट और म्यूजिक शो मंदिर कि सुन्दरता में चार चांद लगा देता है

23.श्री दिगंबर जैन लाल मंदिर
पुरानी दिल्ली अपने आप में कई तह्ज़ीबों और संस्कृतियों को खुद में समेटे हुए है इन्हीं संस्कृतियों में से एक है श्री दिगंबर जैन लाल मंदिर, जिसे मुग़ल शासक शांहजहां के समय में बनाया गया था.यह मंदिर होने के साथ साथ पक्षियों के लिए एक चैरिटेबल हॉस्पिटल भी चलाता है, जहां असहाय पक्षियों का ईलाज किया जाता है.

24.गोमतेश्वर मंदिर
10 वीं सदी में कर्णाटक के श्रवानाबेलागोला में बना यह मंदिर भगवान बाहुबली को समर्पित है जिन्हें गोमतेश्वर के नाम से भी जाना जाता है. यह मंदिर जैन धर्म के अनुयायियों के लिए काफी महत्व रखता है.इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि हर 12 साल बाद यहां महामस्तक अभिषेक किया जाता है, जो जैनियों के लिए एक महत्वपूर्ण त्यौहार है.

25.रणकपुर मंदिर
उदयपुर और जोधपुर के बीच पाली डिस्ट्रिक्ट में गांव रणकपुर में यह मंदिर स्थित है जिसे जैन धर्म के 5 पवित्र स्थलों में शुमार किया जाता है.यह पूरा मंदिर हल्के सफ़ेद रंग के मार्बल से बना हुआ है. जिसमें 1400 नक्काशी किये हुए पिलर लगे हुए हैं. यह मंदिर केवल प्राक्रतिक रौशनी का ही इस्तेमाल करता है, जिससे आध्यात्म में मदद मिलती है.

26.साईं बाबा मंदिर, शिर्डी
मुंबई से 296 किलोमीटर दूर शिर्डी में साईं बाबा कि समाधी पर यह मंदिर बना हुआ है. हर साल लगभग 25000 श्रद्धालु यहां बाबा के दर्शन के लिए आते है. राम नवमी, दशहरा और गुरु पूर्णिमा के दिन यहां खासतौर पर मेला लगता है.

27.श्री पद्मनाभस्वामी टेम्पल
केरला के तिरुवनंतपुरम में श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर स्थित है जो कि भगवान विष्णु को समर्पित है. यहां केवल हिन्दू ही प्रवेश कर सकते है. इस मंदिर में प्रवेश के लिए पुरुषों को सिर्फ धोती, जबकि औरतों को साड़ी पहनना जरुरी होता है.

28.द्वारकाधीश मंदिर
जैसा कि इस मंदिर के नाम से प्रतीत होता है, यह द्वारका में है और भगवान कृष्ण को समर्पित है. इसको जगत मंदिर भी कहा जाता है. यहां के प्रवेश द्वार को स्वर्ग द्वार और मोक्ष द्वार भी कहते है.

29.लक्ष्मी नारायण मंदिर
दिल्ली में इस मंदिर को बल्दो दास बिरला ने बनवाया था जबकि इसका उद्घाटन महात्मा गांधी ने किया था जो कि हर जाति वर्ग के लिए खुला था.
वैसे तो यह मंदिर लक्ष्मी और नारायण को समर्पित है पर मंदिर में इनके अलावा शिव, गणेश व अन्य भगवानों की मूर्तियां भी है.

30.इस्कॉन मंदिर
इस्कॉन मंदिर को कृष्ण बलराम मंदिर भी कहा जाता है जिसे 1975 में वृन्दावन में इस्कॉन समूह द्वारा बनवाया गया था. इस्कॉन मंदिर अपनी पवित्रता और सफाई के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है.इसके अंदर कृष्ण, राधा और बलराम कि पूजा की जाती है.

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