लेकिन यह अंधविश्वास नहीं है ज्योतिष के अनुसार मंगली स्त्री या पुरुष अपने जीवन साथी से विशेष अपेक्षाएं रखते हैं, तथा जीवन साथी के मामले में बहुत संवेदनशील होते हैं। मंगली जातक सहवास के मामले में प्रबल होते है, अत: वह अपने साथी से भी उतनी अपेक्षा रखते है। परंतु यदि उनका साथी पूर्णत: उनका सहयोग नहीं करता, तब उनमें विवाद उतपन्न होने का भय होता है। इस कारण शास्त्र जोर देता है कि मंगली का विवाह मंगली से हि हो परंतु कही-कही अपवाद स्वरूप लड़के की कुंडली में मंगल हो और लड़की की कुंडली में 1, 4, 7, 8, 12 स्थान में शनि हो या मंगल के साथ गुरु हो तब भी मंगल का प्रभाव समाप्त माना जाता है। मंगली जातक का विवाह विलंब से पर अच्छी जगह होता है।
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